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उपचारात्मक कार्य के दायरे में सबसे पहले आईडीबीआई बैंक

अभिजित लेले / मुंबई May 10, 2017

आईडीबीआई बैंक के गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के ऊंचे स्तर और परिसंपत्तियोंं पर नकारात्मक रिटर्न के मद्देनजर संशोधित त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) प्रणाली के तहत सबसे पहले आईडीबीआई बैंक पर गौर किया जाएगा। पीसीए के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उधारी वितरण और शाखा विस्तार पर रोक लगाते हुए तमाम कारोबारी गतिविधियों पर पाबंदी लगा देगा। बैंक को सुधार की राह लाने के लिए ऐसा किया जाता है।
 
पीसीए के तहत आईडीबीआई बैंक को अनिवार्य तौर पर पूंजी का स्तर बढ़ाने और लाभांश भुगतान से परहेज करने जैसे तमाम उपचारात्मक पहल करने होंगे। गंभीर मामलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बीमारू बैंक के प्रबंधन के वेतन भुगतान पर पाबंदी लगाई जा सकती है ताकि वह पीसीए ढांचे से बाहर होने के लिए पात्र हो सकें। आईडीबीआई बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजी जानकारी में कहा है कि आरबीआई ने उसके एनपीए के बढ़ते स्तर और परिसंपत्तियों पर नकारात्मक रिटर्न (आरओए) के मद्देनजर पीसीए की पहल शुरू की है। दिसंबर 2016 के अंत तक बैंक का शुद्ध एनपीए 20,949 करोड़ रुपये (9.61 फीसदी) और आरओए -1.09 रहा। बैंक ने दावा किया है कि आरबीआई की इस पहल से उसके प्रदर्शन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
 
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पीसीए पर एक नोट में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के 21 में से 16 बैंक (एसबीआई के सहायक बैंकों को छोड़कर) और निजी क्षेत्र के 16 में से 2 बैंक पीसीए ढांचे के दायरे में आ सकते हैं। कुल मिलाकर इससे (पीसीए) मध्यम अवधि में बैंकिंग प्रणाली में मजबूती आने और बेहतर तरीके से प्रबंधित एवं दमदार बैंकों में सुधार होने की उम्मीद है। जबकि इससे कमजोर बैंकों और उनके प्रवर्तकों/पबंधन पर प्रणाली एवं प्रक्रिया में सुधार करने के लिए दबाव बढ़ेगा।
 
परिसंपत्ति गुणवत्त में जबरदस्त गिरावट से आईडीबीआई बैंक की लाभप्रदता को काफी झटका लगा है। दिसंबर 2016 में समाप्त पिछले नौ महीने के दौरान उसका कुल घाटा 1,958 करोड़ रुपये रहा जबकि वित्त वर्ष 2016 में उसे 3,664 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। इसकी मुख्य वजह प्रावधान लागत में जबरदस्त वृद्धि रही है। दिसंबर 2016 में समाप्त पिछले नौ महीने के दौरान बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) 1.4 फीसदी रहा।
Keyword: bank, atm, cash, IDBI,
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