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राज्य अब सस्ती बिजली से करें निवेश आकर्षित

ज्योति मुकुल और श्रेया जय / नई दिल्ली 05 09, 2017

साक्षात्‍कार
केंद्रीय विद्युत मंत्री पीयूष गोयल ने जब सत्ता संभाली तो उन्हें कर्ज से दबीं वितरण कंपनियां, रुकीं बिजली परियोजनाएं मिली थीं, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
ज्योति मुकुल और श्रेया जय ने की उनसे बातचीत

वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली जल्द ही हकीकत में बदलने वाली है, ऐसे में राज्यों को निवेश आकर्षित करने के लिए नवीनतम तरीके अपनाने होंगे क्योंकि नई कराधान व्यवस्था में राज्यों की ओर से उत्पाद शुल्क रियायत नहीं दी जा सकेगी। यह कहना है केंद्रीय बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन मंत्री पीयूष गोयल का। गोयल का मानना है कि निवेश को सस्ती बिजली और जमीन के साथ ही कारोबार में सुगमता के जरिये आकर्षि किया जा सकता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में गोयल ने कहा, 'सरकार का ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि जो भी निवेश करें, उन्हें स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।'

बिजली क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि कोयला आधारित संयंत्रों का युग खत्म नहीं होने जा रहा है। पारंपरिक बिजली उत्पादन क्षमता में इजाफा न केवल 25 साल पुराने संयंत्रों को बदलने के जरिये होगा बल्कि अल्ट्रा मेगा पावर प्लांटों (यूएमपीपी) के माध्यम से भी क्षमता में इजाफा होगा। यूएमपीपी के तहत बोली के लिए नई व्यवस्था के दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गोयल ने उम्मीद जताई कि कंपनियां कम और वाजिब शुल्क दरों के आधार पर बोली लगाएंगी। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के बाद अब सौर ऊर्जा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'पहले विनिर्माण व्यवहार्य नहीं होती थी क्योंकि उसका उत्पादन काफी छोटे पैमाने पर किया जाता था।'

बीएस बातचीत

 बिजली केलिए नहीं चुकाने होंगे ज्यादा दाम

क्या निवेश नहीं आने की वजह से परंपरागत ऊर्जा का उत्पादन घट रहा है? बिजली की बढ़ती मांग कैसे पूरी की जाएगी? 

हम अपने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का उत्पादन तत्काल 50 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा 20,000 मेगावॉट बिजली के लिए विद्युत खरीद करार नहीं हैं और वे एक्सचेंजों पर बिजली बेच रहे हैं। इस क्षमता को कभी भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा 70,000 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र विभिन्न चरणों में हैं, जिनसे 2022-23 तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। आने वाले समय में बिजली उत्पादन की क्षमता में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी। मुझे नहीं लगता कि अगर मांग दो अंकों में बढ़ती है तो निकट भविष्य में बिजली की कोई कमी आएगी। हालांकि हम पहले ही यह महसूस कर चुके हैं कि हमें क्षमता में लगातार बढ़ोतरी जारी रखनी होगी। 

इसके लिए मेरेे पास दो योजनाएं हैं। जहां हमारे 25 साल से ज्यादा पुराने संयंत्र हैं, उनकी जगह सुपरक्रिटिकल संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे स्वाभाविक रूप से क्षमता में इजाफा होगा। हमारे पास कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए जल्द ही यूएमपीपी की स्थापना होनी शुरू हो जाएगी। हमने ऐसे प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिनसे बैंकों को कर्ज देने में कोई परेशानी नहीं होगी। मैं इस बात से खुश हूं कि हमने पहले बोली नहीं लगाई क्योंकि ब्याज दरें घट रही हैं और उपकरणों की लागत भी नीचे आ रही है, इसलिए हमें पहले जितनी आकर्षक कीमतों पर बोली मिल सकती हैं। देश को बिजली के लिए बहुत ज्यादा कीमत नहीं चुकानी होगी। किसी भी व्यक्ति को बिजली के लिए 3 से 3.5 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा दाम नहीं चुकाने होंगे। 
 
आपने खरीद में कैसे पारदर्शिता लाने की योजना बनाई है?
मैं मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये उपलब्ध डिस्पैच (क्रम, जिसके तहत वितरण कंपनियां बिजली की खरीद को प्राथमिकता देती हैं) के मैरिट ऑर्डर बनाने जा रहा हूं। 
 
बिजली ऐसा क्षेत्र है, जिसमें फंसा कर्ज बहुत बड़ा मसला है। बैंक एनपीए पर नए अध्यादेश के बाद आप इस क्षेत्र में प्रस्ताव को किस तरह देखते हैं?

बिजली क्षेत्र में दो तरह की दिक्कते हैं। इसमें कुछ ऐसी परियोजनाएं हैं, जो स्थापित हो चुकी हैं। ये पूरी हो सकती हैं, लेकिन उनके पास पीपीए नहीं हैं। हमें यह देेखने को मिलेगा कि मांग बढऩे पर उनके से कुछ अपना कारोबार शुरू करेंगी। कुछ ऐसे विद्युत संयंत्र हैं, जिनमें खुद प्रवर्तक सुस्त हैं। ऐसे मामलों में नतीजे ऋणदाताओं और प्रवर्तकों दोनों को भुगतने होंगे। हम कृत्रिम रूप से मांग सृजित या लोगों को बिजली खराब करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। इसके विपरीत हम ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दे रहे हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि 6.5 फीसदी सीएजीआर रही है, जो पिछले 10 साल में 6.16 फीसदी रही है। यह 6.5 फीसदी वृद्धि एलईडी के जरिये 3 फीसदी बचत के बाद है। अगर हम कुशलता और एलईडी पर ध्यान नहीं देते तो बिजली की मांग में वृद्धि 9 से 9.5 फीसदी रहती। इसके साथ कैप्टिव बिजली उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो रही है।

आपके मुताबिक बिजली की ताजी मांग किन क्षेत्रों से आएगी? 
मेक इन इंडिया के प्रयासों और कारोबार को आसान बनाने से कुछ मांग निकलेगी। लेकिन अगर निवेशकों को यह पता होगा कि हमारे यहां पूरे वर्षभर बिजली की कमी रहती है और उन्हें 8 से 10 रुपये की दर पर बिजली खरीदनी होगी तो कौन भारत में आएगा। मैं राज्यों को इस बात के लिए प्रोत्साहित कर रहा हूं कि जीएसटी के बाद कोई उत्पाद शुल्क या कोई अन्य शुल्क रियायत नहीं होगी। एकमात्र उम्मीद कारोबार में आसानी के अलावा रियायती दरों पर जमीन और बिजली देना होगी। उत्तर प्रदेश इस पर काम कर रहा है। 
आपने सौर ऊर्जा क्षेत्र में विनिर्माण को कैसे प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है? 
मुझे सोच-समझकर अपने कार्यक्रम संचालित करने होंगे। अगर मैंने बहुत से लक्ष्य तय किए तो मैं कुछ भी हासिल नहीं कर पाऊंगा। पहले स्थापित होने वाले विनिर्माण संयंत्रों की क्षमता फायदेमंद नहीं थी क्योंकि उनकी क्षमता बहुत कम थी। मेरा पहला और मुख्य मकसद भारतीय तंत्र में सौर को स्थापित करना होगा और भारत में इसकी क्षमता बढ़ानी होगी। मुख्य काम सौर ऊर्जा की उत्पादन लागत को घटाना था ताकि राज्य खरीद के लिए प्रोत्साहित हों। 3 रुपये पर सौर ऊर्जा सस्ती है और इसमें सुरक्षा भी है क्योंकि अगले 25 वर्षों तक भी इसकी लागत इतनी ही रहेगी। उस समय कोयले से उत्पादित बिजली 10 से 15 रुपये हो जाएगी। 
 
अब हम देख रहे हैं कि वायबिलिटी गैप फंडिंग के बिना बोलियां कम आ रही हैं। क्या आपको लगता है अक्षय ऊर्जा के लिए ऐसी या अन्य किसी मदद खत्म कर विनिर्माण के लिए सब्सिडी दी जाए? 
मैं इस पर विचार कर रहा हूं। संभवतया आपको ऐसा जल्द ही देखने को मिले। विनिर्माण के लिए सब्सिडी देना खराब विचार नहीं है। हम सख्त गुणवत्ता मानक जैसी चीजों पर भी विचार कर सकते हैं ताकि हमें अपने सौर कार्यक्रमों के लिए अच्छी गुणवत्ता के उपकरण मिल सकें। आपको एक मान्यता प्राप्त आपूर्तिकर्ता बनना होगा। सख्त मानक बनाए रखने की एक प्रक्रिया होगी।
Keyword: जीएसटी, निवेश, कराधान, उत्पाद शुल्क, रियायत, बिजली, ऊर्जा, खनन, पीयूष गोयल, साक्षात्कार,
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Comments
 
S K srivastava
05-Sep-17
 
यद एसा हुआ तो यह बहुत बडी उप्ल्ब्धी कही जायेगै
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