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सब्सिडी की जगह मिलेगी नकदी!

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 05 09, 2017

जम्मू-कश्मीर के लोगों को मिलेगी बुनियादी आमदनी

 प्रधानमंत्री जम्मू-कश्मीर में सार्वभौमिक बुनियादी आय पर लेंगे फैसला
 यूबीआई के तहत लाभार्थियों के लिए अन्य सभी सब्सिडी खत्म कर दी जाएंगी और उनकी जगह इतनी ही राशि उनके बैंक खाते में नकद डाली जाएगी
 जम्मू-कश्मीर में प्रायोगिक तौर पर कुछ जिलों में लागू न कर पूरे राज्य में एक साथ इस योजना को लागू करने पर हो रहा है विचार
 जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने सबसे पहले की थी इस योजना की परिकल्पना, वित्त मंत्री को इस योजना पर दे चुके हैं प्रस्तुति भी

जम्मू-कश्मीर सरकार और मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन इस अशांत राज्य में सार्वभौमिक बुनियादी आय (यूबीआई) को लागू करने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति की तैयारी कर रहे हैं। यूबीआई के तहत लाभार्थियों के लिए अन्य सभी सब्सिडी खत्म कर दी जाएंगी और उनकी जगह इतनी ही राशि उनके बैंक खाते में नकद डाली जाएगी।

जम्मू-कश्मीर में इस कार्यक्रम को लागू करने या न करने का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री हसीब द्राबू और सुब्रमण्यन की टीमें एक विस्तृत प्रस्तुति तैयार कर रही हैं, जो इस महीने के अंत तक प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी जा सकती है। एक अधिकारी ने बताया, 'जम्मू-कश्मीर में यूबीआई को कुछ जिलों में एक प्रायोगिक परीक्षण के रूप में नहीं बल्कि पूरे राज्य में लागू करने के बारे में विचार-विमर्श हो रहा है।' अधिकारी ने बताया, 'वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस विचार का समर्थन किया है। अब एक प्रस्तुति प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष की जाएगी।'

हालांकि यूबीआई की अवधारणा पर पिछले काफी समय से विचार-विमर्श हो रहा है। सुब्रमण्यन ने 2016-17 की अपनी आर्थिक समीक्षा में इसके बारे में विस्तार से चर्चा की थी। सुब्रमण्यन ने कहा था, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय सामाजिक न्याय और उत्पादक अर्थव्यवस्था के बारे में सोचने में एक बड़ा और दमदार बदलाव है। यह 21वीं सदी का सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है, जिस तरह 20वीं शताब्दी में नागरिक और राजनीतिक अधिकारों में बड़े बदलाव हुए थे।'

सुब्रमण्यन ने कहा कि यूबीआई से गलत आवंटन खत्म होगा, जो वर्तमान सब्सिडी योजनाओं के तहत मौजूद है। हालांकि ऐसे कार्यक्रम की व्यावहारिकता को लेकर संदेह हैं क्योंकि इसमें सबसे पहले राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना जैसी बड़ी एïवं लोकप्रिय योजनाओं को खत्म करना होगा। जेटली ने कहा है कि वह वर्तमान सब्सिडी के बदले गरीबों को नकद भुगतान के पक्ष में हैं। लेकिन यूबीआई जैसी महत्त्वाकांक्षी योजना और अन्य योजनाएं साथ-साथ नहीं चल सकतीं। इसे उन योजनाओं की जगह लागू करना होगा।

जनवरी में पेश किए गए अपने 2017-18 के कश्मीर बजट में द्राबू ने यूबीआई के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रस्ताव किया था। यह उन सबी लोगों के  लिए था, जो गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं और उन्हें प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के माध्यम से धन मुहैया कराया जा रहा है। द्राबू ने जेटली के समक्ष यूबीआई को लेकर प्रस्तुति भी दी थी। द्राबू ने अपने बजट भाषण में कहा था, 'इस समय हम सामाजिक कल्याण योजनाओं पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। यह खर्च ढेर सारी योजनाओं के माध्यम से हो रहा है। यूबीआई से न सिर्फ सभी तरह की खामियां दूर होंगी बल्कि इन लाभों को लोगों तक पहुंचाने पर आने वाले खर्च में बहुत ज्यादा कमी आएगी।'
Keyword: subsidy, cash, जम्मू-कश्मीर,,
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