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ईडी और कर विभाग को धार!

श्रीमी चौधरी / मुंबई 05 08, 2017

जांच एजेंसियों को मिलेंगी ज्यादा शक्तियां

 सरकार कर रही धन शोधन निरोधक अधिनियम में संशोधन की तैयारी, ईडी और आयकर विभाग आरोप पत्र दाखिल करने के बाद जब्त संपत्तियां कर सकेंगे नीलाम

सरकार धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) में लाएगी प्रावधान, जिससे ईडी, आईटी विभाग आर्थिक अपराधियों की संपत्ति कर सकेंगे नीलाम
इस कदम से सहारा और एनएसईएल जैसे मामलों में रकम वसूलने में मिलेगी मदद, साथ ही निवेशकों को भी जल्द मिल पाएगी रकम
वित्त मंत्रालय ने ईडी एवं कर अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर किया विचार
मौजूदा पीएमएलए प्रावधानों में केवल संपत्ति की अस्थायी जब्ती का ही है प्रावधान

बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए रिजर्व बैंक को ज्यादा अधिकार देने के बाद सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर (आईटी) विभाग को ज्यादा अधिकार दे सकती है। इससे ये एजेंसियां डिफॉल्टरों या काले धन को सफेद बनाने में लिप्त लोगों की कुर्क संपत्तियों की जल्द से जल्द नीलामी करके निवेशकों को उनका पैसा लौटा सकेंगी। इस तरह के कदम से नैशनल स्पॉट एक्सचेंज, सहारा डिपॉजिटर्स और कई अन्य सामूहिक निवेश योजनाओं में वसूली की प्रक्रिया तेज करने में मदद मिल सकती है। इन योजनाओं में निवशेकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगा है।

ईडी और आईटी जैसी सरकारी संस्थाओं को ज्यादा अधिकार देने के लिए सरकार धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) में संशोधन कर सकती है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत ये एजेंसियां मामले की सुनवाई शुरू होने या फिर आरोपपत्र दाखिल होने के तुरंत बाद कुर्क संपत्तियों की नीलामी कर सकती हैं। पीएमएलए के मौजूदा प्रावधानों के तहत ईडी को किसी घोटाले में शामिल व्यक्ति की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क करने का अधिकार है। इसके बाद संबंधित अधिकारी इस बारे में सक्षम अधिकारी के पास शिकायत करता है।

इस मामले की जानकारी रखने वाले ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित मंत्रालय ने इस बारे में ईडी और आईटी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की है। इस संशोधन का मकसद वसूली प्रक्रिया को तेज करना है। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत पीएमएलए के तहत संपत्ति कुर्क करने का मकसद आरोपी को अवैध तरीके से कमाई गई संपत्ति का फायदा लेने से रोकना है। आरोपी कुर्की के खिलाफ 180 दिन भी भीतर सक्षम अधिकारी के पास अपील कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस न्यायिक कार्यवाही में 180 दिन लग सकते हैं और अगर मामला उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में गया तो इसमें कई साल लग सकते हैं। 

ईवाई के पार्टनर सुधीर कपाडिय़ा ने कहा, 'डिफॉल्टर को फंड का बेजा इस्तेमाल करने से रोकने के लिए सक्षम अधिकारी को ज्यादा अधिकार देने का विचार अच्छा है। अलबत्ता चुनौती यह होगी कि मामले का पूरी तरह निपटारा होने तक संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता। अगर कानून को सख्त बनाया जाता है तो इससे फैसला होने में कम समय लगेगा और वसूली प्रक्रिया में तेजी आएगी।' ईडी का मानना है कि मौजूदा कानून डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई में आड़े आ रहा हैं क्योंकि वसूली की प्रक्रिया लंबी है और इसके लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी पड़ती है। ईडी के वकील हितेन वेणेगांवकर ने कहा, 'इन बदलावों से अवैध तरीकों से हासिल उन संपत्तियों की तेजी से वसूली में मदद मिलेगी जिन्हें अचल संपत्ति में बदल दिया गया है। साथ ही उन मामलों में भी ये बदलाव मददगार होंगे जहां निवेशकों को अदालत के फैसले का इंतजार है।' उन्होंने कहा कि इस संशोधन से दीवानी फैसले को अंतिम रूप देंगे जो अभी तक अदालत के फैसले पर निर्भर रहता है।

काले धन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है जिसके तहत ईडी को सीधे तौर पर किसी आरोपी के खिलाफ जांच करने का अधिकार मिल सके। मौजूदा व्यवस्था के तहत ईडी तभी जांच शुरू कर सकती है जब पुलिस या सीबीआई किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करती है। एसआईटी ने साथ ही कहा है अगर कोई संदिग्ध अवैध तरीके से हासिल कमाई का खुलासा जांच पूरी होने के एक महीने के अंदर नहीं करता है तो ईडी को उसकी संपत्ति कुर्क करने का अधिकार होना चाहिए। इस बीच, सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा का कार्यकाल आज एक साल के लिए बढ़ा दिया गया। चंद्रा को मई 2018 तक एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है। सीबीडीटी आयकर विभाग का शीर्ष नीति निर्माता निकाय है। चंद्रा ने पिछले साल 1 नवंबर को सीबीडीटी प्रमुख का कार्यभार संभाला था। 

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