बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकार पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में खट्टर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 21, 2017 06:57 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

सरकार पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में खट्टर

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  May 08, 2017

हरियाणा विधानसभा के लिए जब वर्ष 2014 में चुनाव हो रहे थे तो ओम प्रकाश चौटाला की अगुआई वाले इंडियन नैशनल लोकदल को जीत का दावेदार माना जा रहा था। लेकिन भ्रष्टाचार के एक मामले में चौटाला के जेल में बंद होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार में उतरने से पूरा परिदृश्य बदल गया। मोदी ने भाषणों में हरियाणा में दशकों से चली आ रही वंशवादी राजनीति और भ्रष्टाचार के आरोपों पर जमकर प्रहार किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव में अपनी तरफ से किसी को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश नहीं किया था लेकिन मोदी लोगों को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि वह खुद हरियाणा के मामलों पर नजर रखेंगे। उन्होंने हरियाणवी मतदाताओं से भरोसा रखने की अपील की थी और वहां के लोगों ने भरोसा बनाए रखा। इस तरह हरियाणा की राजनीति में मनोहर लाल खट्टर का पदार्पण हुआ।

 
खट्टर और मोदी एक दूसरे को उस समय से जानते थे जब मोदी हरियाणा के पार्टी प्रभारी हुआ करते थे। खट्टर आपातकाल के दौरान 1975 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपर्क में आए थे और दो साल बाद उससे विधिवत जुड़ गए थे। आरएसएस की विचारधारा और उसके स्वयंसेवकों के आचरण से प्रभावित खट्टर 1980 में संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए थे। अपनी ही तरह संघ से भाजपा में आए मोदी के साथ जुड़कर वह राजनीति में भी सक्रिय हो गए। मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद गुजरात के भुज एवं कच्छ इलाकों में भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई तो खट्टर को पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों का जिम्मा सौंपा गया। उन्हें वर्ष 2002 में जम्मू कश्मीर का चुनाव प्रभारी बनाया गया था। खट्टर को 2014 में हरियाणा चुनावों के पहले चुनाव अभियान समिति का प्रमुख भी बनाया गया था।
 
मूलत: पश्चिमी पाकिस्तान से ताल्लुक रखने वाले खट्टर का परिवार काफी गरीब था और विभाजन के बाद हरियाणा में बस गया था। खट्टर के साथ मोदी के बेहद आत्मीय रिश्ते रहे हैं। आरएसएस संगठन से जुड़े मामलों और भाजपा के सहयोगी ढांचे के बारे में खट्टर की गहरी समझ मोदी को प्रभावित करती रही है। व्यक्तिगत जीवन में अपनी ईमानदारी के लिए भी खट्टर जाने जाते रहे हैं। कई सरकारों के कार्यकाल में हरियाणा अवैध वसूली और भ्रष्टाचार से जूझता रहा है। ऐसे में खट्टर एक ऐसी रोशनी की तरह सामने आए जिसकी चमक इस अंधियारे को दूर करने के लिए जरूरी थी।
 
लेकिन खट्टर की राह इतनी आसान भी नहीं थी। उन्होंने भाजपा को हरियाणा में चुनाव भले ही जिता दिया था लेकिन खुद पहली बार विधायक चुने गए थे। भाजपा ने हरियाणा विधानसभा की 90 में से 47 सीटें जीती थीं। ऐसे में मुख्यमंत्री पद पर ऐसे शख्स को बिठाने की जरूरत थी जो आपसी झगड़ों को निपटाने का नैतिक अधिकार रखता हो। खास तौर पर विधानसभा में मामूली बहुमत होने से यह और भी जरूरी हो गया था। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तो युवा जाट नेता कैप्टन अभिमन्यु को कमान देने के पक्ष में बताए जा रहे थे। लेकिन बागडोर खट्टर को मिली और इस पर नाराजगी जताने में अन्य दावेदारों ने अधिक देर नहीं की थी।
 
वैसे खट्टर को भी हालात का अहसास था। इससे निपटने के लिए उन्होंने आरएसएस या उससे जुड़े रहे लोगों पर भरोसा करने की नीति अपना ली। खट्टर ने नौकरशाही के शीर्ष पदों पर नियुक्ति के समय उनकी योग्यता का ध्यान न रखते हुए आरएसएस से उनके या उनके परिवार के संपर्कों को ही तवज्जो दी। इसका परिणाम बहुत खराब रहा। नकारे अधिकारियों और अनुभवहीन मंत्रियों ने जाट समुदाय के बीच पसरते गुस्से से संबंधित खुफिया जानकारी को भी नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने इस सूचना पर भी गौर नहीं किया कि जाट अपने घरों में बड़े पैमाने पर केरोसिन तेल और अन्य ज्वलनशील पदार्थों को जमा करने में लगे हुए हैं। हरियाणा देखते ही देखते हिंसात्मक प्रदर्शनों की लपटों में घिर गया। ऐसी स्थिति में पुलिस और खुफिया विभाग के प्रमुखों पर फौरन गाज गिरनी चाहिए थी। लेकिन उनमें से एक इस समय हरियाणा का सूचना आयुक्त है जबकि दूसरा बिजली बोर्ड का प्रमुख बना हुआ है।
जाट आंदोलन के दौरान मुरथल में कुछ महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामलों की जांच करने वाले प्रकाश सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बाकायदा नाम लेकर कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। लेकिन राज्य सरकार ने अब तक आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई नहीं की है।
 
वैसे नौसिखुआ मुख्यमंत्री होने में कोई बुराई नहीं है। एक समय भजनलाल और बंसीलाल भी नौसिखुआ मुख्यमंत्री ही थे लेकिन उनकी मदद के लिए समर्पित और अनुभवी अधिकारियों की एक पूरी फौज हुआ करती थी। बंसीलाल हरियाणा का कायापलट करने में इसलिए कामयाब हुए थे कि उनके भरोसेमंद अधिकारी एस के मिश्रा ने राज्य की सड़कों को दुरुस्त कर दिल्ली से लोगों को घूमने-फिरने के लिए आने की सोच पर काम किया था। इसी तरह भजनलाल के समय मुख्य सचिव बी एस ओझा उनका दाहिना हाथ माने जाते थे। बहरहाल खट्टर इन दिनों सरकार पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। कई बार मंत्रिमंडल की बैठकों में वह अपने मंत्रियों की भी खिंचाई करने लगते हैं। इससे परेशान हरियाणा भाजपा के 12 विधायकों ने पिछले महीने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर शिकायत भी की थी। 
 
इस बीच हरियाणा नया निवेश आकर्षित करने में पिछड़ता जा रहा है। इन्वेस्ट हरियाणा सम्मेलन में 5 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक के निवेश प्रस्ताव आए थे लेकिन उनका कार्यान्वयन नहीं हो पा रहा है। चीन के वांडा ग्रुप ने सोनीपत में 10 अरब डॉलर का निवेश करने की बात कही थी लेकिन सरकार के साथ मतभेद गहराने से अब वह खटाई में पड़ गया है। खट्टर को सरकार चलाने के इस पहलू के बारे में भी अहसास कराने की जरूरत है। 
Keyword: haryana, khattar, हरियाणा विधानसभा,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 इन्फ्रा के दर्जे से लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.