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इच्छाशक्ति जरूरी

संपादकीय /  May 08, 2017

गत सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि वे काले धन से निपटने के लिए चलने वाले अभियान 'ऑपरेशन क्लीन मनी' का क्रियान्वयन करें। इस बात को लेकर किसी के मन में कभी कोई संशय नहीं रहा है कि अवैध धन काफी हद तक कर वंचना से जुटाया जाता है और काले धन को सफेद करना लंबे समय से देश की बड़ी समस्या बना हुआ है। ऐसे में उम्मीद यही थी कि राजस्व अधिकारियों को संबोधित करते वक्त प्रधानमंत्री कर चोरी रोकने के लिए तेज कदमों की वकालत करेंगे, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के फायदों पर बात करेंगे और सरकार के बेनामी लेनदेन (निरोधक) संशोधन अधिनियम के प्रवर्तन की प्रतिबद्घता जताएंगे। यह अधिनियम पिछले वर्ष ही बना है। 

 
यह बात ध्यान देने लायक है कि राजस्व विभाग पहले ही कर चोरी के मामलों का पता लगाने के लिए अपनी गतिविधियां तेज कर चुका है ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके। बेनामी लेनदेन कानून के तहत अब तक 240 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके तहत अब तक 55 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा इस कानून के तहत करीब 60,000 मामले चिह्निïत किए गए हैं जहां अत्यधिक नकदी का इस्तेमाल किया गया था। प्रवर्तन अधिकारियों ने 9,330 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता लगाया है। इसके अलावा करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकदी और मूल्यवान वस्तुएं जब्त की गईं।
 
ये सारी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि सरकार काले धन से निपटने की दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है। लेकिन इसके साथ ही साथ कुछ चौकसी बरतने की भी आवश्यकता है कि कहीं जांच और प्रवर्तन पर अत्यधिक जोर देने के चलते काले धन की जड़ पर प्रहार करने संबंधी अन्य अहम और जरूरी कदम छूट न जाएं। प्रभावी प्रवर्तन या सक्षम जांच एक सीमा तक ही उपयोगी साबित हो सकती है। कर वंचना के मामलों का पता लगाना अथवा कर वंचकों के खिलाफ कदम उठाना काले धन का पता लगाने में कुछ हद तक ही मददगार हो सकता है। हालांकि इसका असर भी समय-समय पर घोषित की जाने वाली माफी योजनाओं के चलते कमजोर पड़ जाता है। ये योजनाएं कर वंचकों को पाकसाफ निकलने का मौका देती हैं। जाहिर है कर वंचना करने वालों का प्रोत्साहन समाप्त करने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना है। 
 
सरकार को कम दरों वाली एक सामान्य और स्थिर कर व्यवस्था लागू करनी चाहिए। यहां सरकार का इरादा राजस्व विभाग के वास्तविक नियमों और उनके प्रवर्तन से मेल खाता हुआ होना चाहिए। उदाहरण के लिए जनरल एंटी-अवॉयडेंस रूल्स (गार) और प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट (पीओईएम) व्यवस्था की मदद से देश की कर व्यवस्था को अत्यधिक पारदर्शी, साधारण और विवेकाधिकार मुक्त हो जाना था। लेकिन देश का उद्यमी जगत पहले ही गार और पीओईएम के नियम निर्माण को लेकर संदेह कर रहा है। इसी प्रकार जीएसटी में पांच दरों की व्यवस्था की गई है। इससे विभिन्न वस्तुओं के लिए दरें तय करने को लेकर मनमानेपन और कुछ खास क्षेत्रों के साथ अनुकूल बरताव के लिए लॉबीइंग की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि कर दरों को कम करने का एक प्रयास किया गया लेकिन रियायतों को समाप्त करने की दर बहुत धीमी रही है। कर अधिकारियों को कर दाताओं के अनुकूल और उनसे मित्रवत बनाने संबंधी कर सुधार अभी भी दूर की कौड़ी है। चूंकि अनेक विशेषज्ञ समितियों ने ये लक्ष्य हासिल करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं इसलिए सरकार के पास विचारों की कमी नहीं है। केवल क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति की दरकार है।
Keyword: narendra modi, development, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,
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