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नोटबंदी बिसरे, एटीएम फिर भरे

करण चौधरी और अभिषेक रक्षित / नई दिल्ली 05 07, 2017

एटीएम जाने से पहले लोगों के मन में 'नो कैश' का खटका

नोटबंदी के 6 माह बीत चुके हैं लेकिन लोगों के मन में अब भी खटका रहता है कि कहीं एटीएम जाने पर उन्हें खाली हाथ वापस तो नहीं आना होगा। 'क्या एटीएम में नकदी है?' राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लोदी रोड में एक एटीएम के बाहर तैनात वीर सिंह से अब भी कई लोग यह सवाल पूछ बैठते हैं। नोटबंदी के दौरान लोगों को एटीएम के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने की लगभग आदत सी हो गई थी और एटीएम के आगे 'नो कैश' के बोर्ड से भी उन्हें अक्सर रूबरू होना पड़ता था। शायद यही वजह है कि एटीएम जाने से पहले लोगों के मन में यह खटका लगा रहता है। 

सिंह कहते हैं, 'ज्यादातर लोग अब भी सोचते हैं कि नकदी की कमी है और एटीएम खाली चल रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है। सप्ताह के बाकी दिनों में दो बार नकदी डालते हैं और रविवार को एक बार रकम डाली जाती है। दिल्ली-एनसीआर में नकदी की कमी नहीं है और लोगों के कतारों में खड़े होने की बात पुरानी हो गई है।' राजधानी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में नकदी की उपलब्धता सामान्य है और कोई दिक्कत आती भी है तो वह तकनीकी होती है। देश के दूसरे हिस्से में भी हालात लगभग सामान्य हो गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट चलन से वापस लेने की घोषणा की थी, जिसके बाद उथल-पुथल मच गई और नोट बदलने और एटीएम से रकम निकालने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। इस दौरान बैंकों में पुराने नोट खूब जमा हुए। हालांकि सरकार या आरबीआई ने अब तक यह खुलासा नहीं किया कि बैंकों में 30 दिसंबर तक और आरबीआई की अधिकृत शाखाओं पर पुराने नोट बदलने की अवधि में कितनी रकम जमा हुई।

बेंगलूरु में गार्डन सिटी कॉलेज में काम करने वाले निखिल ने कहा, 'अब एटीएम में ज्यादातर समय नकदी रहती है और बैंकों में भी भीड़ कम हो गई हैं। हालांकि कभी-कभी सप्ताहांत पर दिक्कत होती है।' कोलकाता में टीसीएस में काम करने वाले प्रसन्नजित सेन इस बात से खुश हैं कि बैंक तेजी से स्थिति सामान्य करने में सफल रहे। वह कहते हैं, 'अब पर्याप्त मात्रा में नकदी उपलब्ध है। वैसे, मैं ज्यादातर डिजिटल माध्यम से लेन-देन करता हूं, इसलिए मुझे एटीएम से अधिक रकम निकालने की जरूरत भी नहीं होती।'

कोलकाता के ही टॉलीगंज इलाके के अकाउंटिंग मैनेजर शंकु मुखर्जी नकदी की उपलब्धता के साथ ही नोटबंदी के कदम से भी खुश हैं। वह कहते हैं, 'पहले एटीएम में ज्यादातर 2,000 के नोट होते थे, जो कम दुखदायी नहीं था क्योंकि इसे भुनाने में खासी परेशानी होती थी। लेकिन अब 500 और 100 रुपये के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।' हालांकि मुंबई के कुछ इलाकों में एटीएम अब भी खाली चल रहे हैं। देश के दूसरे मझोले और छोटे शहरों में भी हालात सुधरे हैं लेकिन कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में नकदी की उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

आरबीआई के आंकड़ों के अुनसार 28 अप्रैल तक नोटबंदी से पहले उपलब्ध 17.97 लाख करोड़ रुपये के नोट के मुकाबले 28 अप्रैल तक देश में 14.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक के नोट उपलब्ध थे। दूसरे शब्दों में कहें तो छह महीनों में नकदी की स्थिति 79.9 प्रतिशत तक सामान्य हो गई है। अब अर्थव्यवस्था में नकदी लौट आई है और डिजिटल लेन-देन भी हो रहे हैं, लेकिन उस सीमा तक नहीं जितनी सरकार और बैंकों ने उम्मीद की थी। नकदी दोबारा उपलब्ध होने से लोग फिर नकद लेन-देन की पुरानी आदत पकड़ चुके हैं। हालांकि सरकार और बैंकों ने कुछ कड़े उपाय किए हैं, जिनसे लोग नकद व्यवहार छोडऩे पर विवश हो रहे हैं।

रियल एस्टेट में 2 लाख रुपये से ऊपर नकदी प्रतिबंधित है और जितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है, उतनी ही राशि के जुर्माने का प्रावधान है। आयकर विभाग के इस समय के आक्रामक रवैये को देखते हुए कोई भी जोखिम लेना नहीं चाहता।  इसके अलावा कुछ बैंकों ने एक निश्चित सीमा के ऊपर नकद निकासी या जमा पर भारी मात्रा में कैश हैंडलिंग शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसकी वजह से भी नकदी का कारोबार हतोत्साहित होगा। लेकिन नोटबंदी से नकदी आधारित उद्योगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। तमाम लघु एवं सूक्ष्म कारोबार बंद हो गए हैं और उनमें कामकाज सामान्य नहीं हो पाया। तमाम स्थापित कंपनियों ने लोगों की छंटनी कर दी और वे उनकी जगह पर कर्मचारी नहीं रख रही हैं। औपचारिक अर्थव्यवस्था में शायद सबसे ज्यादा असर नकदी पर निर्भर माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र पर पड़ा है। सितंबर 2016 मेंं अनुपालन न होने का प्रतिशत 1.4 था, जो फरवरी 2017 में 23.7 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया। 

बहरहाल तमाम समीक्षक उम्मीद कर रहे थे कि आने वाली तिमाहियों में अर्थव्यवस्था सुस्त होगी और इसका बहुत बुरा असर होगा, ऐसा कुछ नहींं हुआ। वित्त वर्ष 2016-17 में वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही और चालू वित्त वर्ष मेंं 7.5 प्रतिशत और इसके अगले वर्ष में वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। नकदी के उभार का सरकार की ओर से डिजिटल लेन देन को प्रोत्साहित किए जाने पर भी असर पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक मार्च की तुलना में अप्रैल महीने में डिजिटल लेन देन मात्रा व संख्या दोनों हिसाब से घटा है। नोटबंदी के बाद मार्च महीने में डिजिटल लेन देन सर्वोच्च स्तर पर रहा था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में कुल डिजिटल लेन देन 1.095 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मार्च के 1.495 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 26.78 प्रतिशत कम है। बहरहाल मार्च के बाद डिजिटल लेन देन के मामले में अप्रैल महीना दूसरे स्थान पर है।  आंकड़े सिर्फ 8 बैंक  के हैं और डिजिटल लेन देन की पूरी तस्वीर सामने नहीं है, लेकिन इससे मोटे आंकड़े का पता चलता है। 

उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि पूंजी बाजार में नोटबंदी के बाद ज्यादा धन का प्रवाह शुरू हो गया है, ऐसे में नोटबंदी के दौरान डिजिटल लेन देन में आई तेजी अब सुस्त पड़ रही है। केपीएमजी इंडिया के पार्टनर, टैक्स अमरजीत सिंह ने कहा, 'हम देख रहे हैं कि स्टॉक मार्केट में ज्यादा धन जा रहा है और आईपीओ के ग्राहक बढ़ रहे हैं। नोटबंदी के बाद वित्तीय तकनीक कंपनियों के लेन देन में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हमारा मानना है कि निकट भविष्य में भुगतान वालेट जैसी व्यवस्था मेंं बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। बहरहाल भीम जैसे ऐप लोगों के बीच लोकप्रिय हो सकते हैं।' 

डिजिटल नकदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले 6 महीनों के दौरान कई पहल की है। भीम को करीब 3 करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया है। आधार भुगतान, जिसमें बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल होता है, धीरे धीरे लोकप्रिय हो रहा है।  पेमेंट काउंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन और इट्जकैश के एमडी नवीन सूर्या ने कहा, 'धन का अंतरण आगे और बढ़ेगा। पिछले महीने करीब 4,500 करोड़ रुपये का डिजिटल लेन देन हुआ है। यह आगे और बढऩे जा रहा है।' बहरहाल ऑनलाइन वॉलेट दिग्गज पेटीएम जैसी कंपनियों का कहना है कि उपभोक्ता और ग्राहक डिजिटल भुगतान तरीके को तेजी से अपना रहे है। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसके वॉलेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़कर 21.8 करोड़ हो गया है।

(साथ में अनूप रॉय और अलनूर पीरमोहम्मद)
Keyword: नोटबंदी, एटीएम, नकदी डालते, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलूरु, कोलकाता, आरबीआई, रियल एस्टेट,
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