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बड़ी गिरावट का जोखिम बरकरार

पुनीत वाधवा /  May 07, 2017

बाजार अपनी सर्वाधिक ऊंचाई पर है। ऐम्बिट कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी सौरभ मुखर्जी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि यदि निवेशक अपने पोर्टफोलियो से प्रतिफल हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले शेयर खरीदने और इन्हें एक दशक तक बनाए रखने की जरूरत होगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

 
अगले 6 से 12 महीनों के दौरान बाजार के लिए आपका क्या नजरिया है?
 
आगामी आय के 18 गुना (अनुमानित) पर बाजार महंगा दिख रहा है। यदि वित्त वर्ष 2018 में दो अंक की वृद्घि हासिल होती है तो मौजूदा महंगा मूल्यांकन बरकरार रह सकता है। हमें आशंका है कि जैसा कि पिछले चार वर्षों में देखने को मिला, उसी तरह बीएसई सेंसेक्स के लिए आय वृद्घि फिर से एक अंक में रह सकती है। 
 
संभावित जोखिम क्या हैं? 
 
बाजार में बड़ी गिरावट का जोखिम है जो गैर-बैंक ऋणदाता द्वारा अपने गैर परिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडी) भुगतान जैसे घटनाक्रम से जुड़ा हो सकता है। मैं वैश्विक घटनाक्रम के बारे में विशेषज्ञ नहीं हूं, लेकिन जैसा कि हम सब जानते हैं राजनीतिक जोखिम (ट्रंप, ब्रेक्सिट, सीरिया, उत्तर कोरिया) बना हुआ है। साथ ही यह भी स्पष्टï नहीं है कि वैश्विक रूप से शेयर बाजार इन जोखिमों की स्थिति पर कितने समय तक निर्भर बना रहेगा। 
 
मौजूदा हालात में आप फंड प्रवाह (विदेशी और घरेलू) के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
 
हम आने वाले कई वर्षों के लिए शेयरों और बॉन्ड बाजारों में मजबूत प्रवाह (गैर-अमीर लोगों से) की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि हरेक तिमाही में ऐसे प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है क्योंकि छोटे निवेशक लालच और भय के अपने स्वयं के चक्रों के हिसाब से काम करते हैं। 
 
फिलहाल निवेशकों के लिए आपकी क्या सलाह है?
 
जो निवेशक एक से तीन वर्ष की समयावधि के दौरान बाजार से कमाई करना चाहते हैं, उन्हें मौजूदा समय में परहेज करना चाहिए। ऐम्बिट के विश्लेषक बार बार यह कह चुके हैं कि शुरुआती स्तर का मूल्यांकन आपके पोर्टफोलियो के प्रतिफल पर असर नहीं डालेगा, बशर्ते कि आपकी निवेश अवधि तीन साल से अधिक हो। जिन लोगों को तीन साल की अवधि से कम समय में पैसा कमाने की जरूरत है, उन्हें स्वर्ण, अल्पावधि सरकारी बॉन्डों और इक्विटी के समावेश पर जोर देना चाहिए। ऐसा पोर्टफोलियो 9 से 12 प्रतिशत सालाना का प्रतिफल दे सकता है, भले ही इक्विटी बाजारों पर दबाव बना हुआ हो।
 
क्या आप इन बाजारों में मूल्यांकन को उचित मानते हैं?
 
जिस सेक्टर को लेकर हम अधिक चिंतित हैं, वह है वित्तीय सेवा। इसमें मूल्यांकन बढ़ा हुआ है और बुनियादी आधार तेजी से कमजोर हो रहा है। दूसरी तरफ, प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों ने इन क्षेत्रों में स्पष्टï रूप से अवसर पैदा किए हैं। भले ही इन शेयरों को नजरअंदाज कर दिया गया हो, लेकिन इनमें से कुछ शेयर निवेशकों को अच्छा प्रतिफल देंगे। 
 
मिड- और स्मॉल-कैप के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
 
यदि बाजार में अधिक तेजी आती है तो स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयर भी मजबूत होंगे। एक वर्ष और तीन वर्षीय अवधि को पसंद करने वाले निवेशकों को इन शेयरों में अपने निवेश को सीमित रखने की जरूरत है। दूसरी तरफ, यदि आप मेरी तरह अपने पोर्टफोलियो को 5 से 10 साल के आधार पर तैयार करना चाहते हैं तो आपको उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों (जिनमें कई स्मॉल-कैप और मिड-कैप होंगे) को खरीदने और अपने पोर्टफोलियो को एक दशक तक नहीं छूने की जरूरत है।
 
मार्च तिमाही के परिणाम का अब तक सत्र आपकी नजर में कैसा रहा है?
 
मार्च तिमाही के परिणाम प्रभावशाली नहीं हैं। तीन बड़े निजी बैंकों और तीन बड़ी सीमेंट कंपनियों को छोड़कर कर कोई कंपनी ने निराशाजनक परिणाम दर्ज किया है। अब तक घोषित हुए वित्तीय परिणामों के अनुसार यात्री वाहनों (और इनके वित्त पोषण) को छोड़कर, अर्थव्यवस्था के किसी अन्य सेगमेंट में सकारात्मक तेजी मुश्किल से ही दर्ज की गई है। इस संदर्भ में, बाजार में ऊंचा मूल्यांकन चिंताजनक है।
 
क्या भारतीय उद्योग जगत जीएसटी के लिए तैयार है?
 
मैं नहीं मानता कि कोई व्यक्ति या कोई कंपनी फिलहाल जीएसटी के लिए, या उसके बाद की प्रक्रियाओं के लिए पूरी तरह तैयार हो सकती है। मैंने जिन कंपनियों या लोगों से मुलाकात की, उनमें से कोई भी कार्यशील पूंजी चक्र और मूल्य निर्धारण पर जीएसटी के प्रभाव को लेकर पूरी तरह अवगत नहीं हो सकती है। स्पष्टï है कि अनुपालन का बोझ मुख्य रूप से छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) द्वारा अधिक महसूस किया जाएगा, क्योंकि वे इस स्तर के बदलाव से निपटने के लिए जरूरी वित्त और आईटी टीमों से संपन्न नहीं हैं। एसएमई में, मुझे उन कंपनियों को लेकर अधिक चिंता है जो पूरी तरह से अपनी आय का खुलासा नहीं करती हैं। ऐसी कंपनियां जीएसटी लागू होने के बाद कर जांच के दायरे में आएंगी। मैं इसे लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि ऐसी कंपनियां उस स्थिति में कितने समय तक बची रहेंगी। जब छोटी कंपनियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा तो बड़ी कंपनियां उनकी बाजार हिस्सेदारी हथिया लेंगी और तब संभव कीमतें बढ़ जाएंगी।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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