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अच्छे निवेश में बनी हुई है दिलचस्पी : बोफा एमएल

विशाल छाबडिय़ा /  May 05, 2017

इक्विटी व डेट में फंड जुटाने की गतिविधियां हाल के समय में मजबूत रही हैं। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के प्रबंध निदेशक (इंडिया ग्लोबल कॉरपोरेट ऐंड इन्वेस्टमेंट बैंकिंग ग्रुप) असित भाटिया ने विशाल छाबडिय़ा को दिए साक्षात्कार में कहा, पहली तिमाही अच्छी रही है और वह 2017 को लेकर आशान्वित हैं। उन्होंने बाजार की अन्य प्रवृत्तियों पर भी अपनी राय सामने रखी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

 
सौदे के लिहाज से साल 2017 अब तक कैसा रहा है? साल के लिए क्या कोई लक्ष्य या योजना है?
 
पूंजी बाजारों व विलय-अधिग्रहण की गतिविधियों के लिए यह काफी व्यस्त अवधि रही है। पहली तिमाही में किसी तरह की शिकायत निश्चित तौर पर नहीं मिली है। हमें उम्मीद है कि अगले तीन महीने में भी पहली तिमाही की तरह ही मजबूत रफ्तार बनी रहेगी।
 
जब आप कंपनियों से बात करते हैं तो उनके पेशकश प्रस्ताव और रकम जुटाने की योजना आदि के बारे में कैसी धारणा नजर आती है?
 
डेट कैपिटल बाजार में कंपनियां अब ऑफशोर बॉन्ड बाजार पर दो वजहों से ज्यादा ध्यान दे रही हैं - ब्याज दर आकर्षक बना रहेगा और क्रेडिट स्प्रेड निचले स्तर पर है क्योंकि काफी नकदी उपलब्ध है जो बेहतर प्रतिभूतियों की तलाश में है। दिलचस्प रूप से हम नई योजनाओं की पेशकश भी देख रहे हैं, जिसे निवेशक हाथोंहाथ ले रहे हैं। इसी तरह इक्विटी के मामले में अकेले मार्च तिमाही में हमने दो क्यूआईपी की अगुआई की, जो भारतीय मानक के हिसाब से खासे बड़े सौदे थे। इसे हाथोंहाथ लिया गया और यह करीब-करीब बाजार कीमत पर हुआ। यह बताता है कि अच्छी प्रतिभूतियों में निवेशकों की दिलचस्पी है।
 
क्या भारतीय कंपनियां रकम जुटाने के लिए नए जरिये का इस्तेमाल कर रही हैं और यह किस तरह से अलग है? क्या भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था इसमें मदद कर रही है?
 
हां, आज भारत के आर्थिक हालात अच्छे हैं। लेकिन अंतत: निवेशक वैयक्तिक कंपनियों को देखते हैं। इसलिए अच्छी प्रतिभूति जारी करने वाली कंपनी (जो निवेशकों को यह बताती रहती हैं कि कंपनी व उद्योग में क्या हो रहा है, आने वाले समय में जिसमें अच्छी बढ़त की संभावना हो और अच्छे कॉरपोरेट गवर्र्नेंस के मानक हों) की प्रतिभूतियां बिक जाती हैं। निवेशक अच्छी कंपनियों को समर्थन देना चाहते हैं। बाजार में नकदी है, लिहाजा कुछ भी और सबकुछ नहीं बिक जाता है। बाजार का उतारचढ़ाव एक अन्य कारक है। इसलिए हमें प्रतिभूति जारी करने के समय का ध्यान रखना होता है। पिछले कुछ समय में कई घटनाएं हुई हैं मसलन अमेरिकी चुनाव, दुनिया भर की भूराजनैतिक स्थिति, फ्रांस के चुनाव, ब्रेक्सिट आदि, जिससे बाजार में उतारचढ़ाव देखा गया है। इसके परिणामस्वरूप सौदे के क्रियान्वयन का समय काफी सख्त हो गया है।
 
पिछले 12 महीने में हमने नए क्षेत्रों के कई आईपीओ मसलन डायग्नोस्टिक्स, जीवन बीमा आदि में देखे हैं। आईपीओ में क्या कोई नया क्षेत्र उतर रहा है?
 
नए क्षेत्र भविष्य में बाजार में दस्तक देना जारी रखेंगे और ई-कॉमर्स इसका एक उदाहरण है। हमने इस क्षेत्र की तरफ से वास्तव में कोई प्रतिभूति नहींं देखी है। ई-कॉमर्स क्षेत्र में कुछ एकीकरण हो रहा है, लेकिन अभी भी लग रहा है कि प्रतिभूतियां भविष्य में ही जारी होंगी। रीट्स व इनविट्स आ रहे हैं और अगले कुछ महीनों में इन क्षेत्रों से भी कुछ कामयाब प्रतिभूतियां देखेंगे। नए क्षेत्रों को बाजार में लाने के मामले में बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच आगे रहा है। उदाहरण के लिए निजी क्षेत्र का पहला बैंक, विमानन कंपनी, दूरसंचार कंपनी, दूरसंचार टावर कंपनी, पहली जीवन बीमा कंपनी आदि। 
 
सरकार ने भी विनिवेश व आईपीओ के जरिए कई पेशकश की योजना बनाई है। क्या बाजार ऐसी भारी आपूर्ति को समाहित कर सकता है?
 
समाहित करने के लिए बाजार में अभी पर्याप्त नकदी है। अच्छी प्रतिभूतियों के लिए निश्चित तौर पर नकदी उपलब्ध होती है। वास्तव में इश्यू का आकार बड़ा हो रहा है। पिछले साल हमने जिस आईपीओ का प्रबंधन किया वह करीब 6,000 करोड़ रुपये का था और यह पिछले छह साल का सबसे बड़ा आईपीओ था। साथ ही इसे जरूरत से ज्यादा आवेदन मिला।
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