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बैंकों के कर्ज का दर्द होगा कम

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 05 03, 2017

मंत्रिमंडल का निर्णय

मंत्रिमंडल ने फंसे कर्जों की वसूली के लिए नीति को दी मंजूरी, इस्पात उद्योग को भी राहत
एनपीए मसले के समाधान के लिए बैंकिंग नियमन कानून व भ्रष्टाचार निरोधक कानून में होगा संशोधन
आईटीडीसी भोपाल, गुवाहाटी और भरतपुर के अशोक होटल संबंधित राज्यों को सौंपे जाएंगे
राष्ट्रीय इस्पात नीति, 2017 और सरकारी एजेंसियों द्वारा घरेलू इस्पात उत्पादों के इस्तेमाल की नीति को भी मिली मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज बैंकों के फंसे कर्जों के समाधान के लिए नई व्यवस्था को मंजूरी दे दी। वसूल न हो पाने वाले कर्ज की समस्या से निपटने के लिए सरकार बैंकिंग नियमन अधिनियम में संशोधन करेगी। देश के इस्पात उद्योग को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय इस्पात नीति को भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा भोपाल, भरतपुर और गुवाहाटी के आईटीडीसी होटलों को संबंधित राज्य सरकारों को सौंपने का भी फैसला किया गया। केंद्रीय पेंशनभोगियों की पेंशन से जुड़ी असंगति भी दूर करने का फैसला किया गया।

बैंकिंग अधिनियम में संशोधन के लिए सरकार अध्यादेश जारी करेगी जिसके तहत रिजर्व बैंक और उसकी निगरानी समितियों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे। ये समितियां और केंद्रीय बैंक फंसे कर्ज के मामले में फैसला करते समय बैंकों की तरफ से काम करेंगे। देश के सरकारी बैंकों के इस समय करीब 6 लाख करोड़ रुपये विभिन्न संपत्तियों में फंसे हुए हैं और इस कर्ज की वसूली नहीं हो पा रही है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पत्रकारों को इसका ब्योरा नहीं दिया और कहा कि बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम निर्णय लिए गए हैं। जेटली ने कहा कि बैंकिंग कानून में संशोधन प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जा रहा है जहां से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार इन संशोधनों में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम में संशोधन भी शामिल है। समझा जाता है कि दोनों संशोधनों को संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है। कैबिनेट के फैसले के अनुसार देश के सबसे ज्यादा और न वसूले जा रहे 35 से 40 कर्जों की प्रगति पर निगरानी के लिए रिजर्व बैंक के नेतृत्व में कई निगरानी समितियां बनाई जाएंगी। ये कर्ज बैंकों के कुल फंसे कर्ज का 60 फीसदी तक है।

राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत सरकार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में घरेलू इस्पात को तरजीह दी जाएगी। इसका मकसद घरेलू इस्पात उद्योग को वैश्विक रूप से प्रतिस्पद्घी बनाना और प्रति व्यक्ति उपभोग बढ़ाना है। इस नीति से कर्ज में दबी इस्पात कंपनियों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा। नीति के तहत देश में इस्पात का सालाना उत्पादन 2025 तक बढ़ाकर 30 करोड़ टन किया जाएगा। इसके लिए 2030-31 तक 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद देश में इस्पात का उपभोग 2030 तक बढ़ाकर 160 किलोग्राम करना है। इस समय उपभोग महज 60 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है। सरकार का मानना है कि देश में मौजूद इस्पात उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल सरकार द्वारा पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जाना चाहिए।

मंत्रिमंडल की बैठक में विजयवाड़ा हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा देने और भारतीय पर्यटन विकास निगम के भोपाल, गुवाहाटी और भरतपुर होटलों को संबंधित राज्यों की सरकारों को भी सौंपने का फैसला किया गया। इस बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने अंत्योदय अन्न योजना के तहत 2.5 करोड़ परिवारों को राशन दुकानों के जरिये एक किलोग्राम चीनी पर सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी दे दी। सरकार ने रक्षाकर्मियों की पेंशन से संबधित कुछ असंगति भी दूर करने का फैसला किया। इनमें एक फैसला ब्रिगेडियर की पेंशन से संबंधित है। इसके तहत पेंशनरों को दो विकल्प दिए गए हैं।
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय मंत्रिमंडल,
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