Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, August 22, 2017 09:01 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

कर से परे कृषि

संपादकीय /  May 02, 2017

लंबे समय से यह चर्चा चलती रही है कि करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए कृषि आय को भी कर दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। हाल ही में नीति आयोग की कार्ययोजना पेश करते समय आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय ने कृषि आय को कर प्रणाली में शामिल करने का सुझाव बताकर इस विवाद को जन्म दे दिया। हालांकि देबरॉय के बयान के तत्काल बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस संभावना को खारिज कर दिया। जेटली ने कहा कि कृषि आय पर कर लगाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगडिय़ा ने भी कहा कि सरकार किसानों की आय को दोगुना करने की योजना बनाने में लगी हुई है। लिहाजा कर लगाने का सवाल ही नहीं उठता है। इसके बावजूद देबरॉय के बयान से निकले संदेश को अच्छी तरह से लिया गया है। 

 
अगर सरकार कर दायरा बढ़ाना चाहती है तो उसका स्वाभाविक तरीका यह है कि करारोपण से दी जाने वाली छूटों और अपवादों को या तो खत्म कर दिया जाए या न्यूनतम किया जाए। देबरॉय की राय के मुताबिक एक खास सीमा से अधिक कृषि आय पर ही कर लगाया जाना चाहिए। हालांकि पानगडिय़ा आशंका जता चुके हैं कि ऐसा करना सरकार के अन्य लक्ष्यों के साथ टकराव पैदा करेगा। इसके अलावा सियासी नजरिये से भी इस राह पर कदम बढ़ा पाना सरकार के लिए खासा मुश्किल होगा। 
 
लेकिन यह ध्यान रखना भी अहम है कि कृषि आय को कर दायरे में लाने से होने वाला राजकोषीय लाभ कम ही होगा। इसकी वजह यह है कि कर दायरे में लाए जाने वाले किसानों की संख्या काफी कम होगी। दरअसल पिछले कुछ दशकों में भारत में खेतों का आकार लगातार सिकुड़ता चला गया है जिससे कृषि अधिक लाभ का काम नहीं रह गया है। खेतों के बंटवारे से खेतों का औसत आकार काफी छोटा हो गया है। हालत यह है कि देश के 86 फीसदी से अधिक खेत आकार में दो हेक्टेयर से भी छोटे हैं। 
 
वर्तमान वित्त वर्ष में 2.5 लाख रुपये से अधिक आय पर ही कर लगाने का प्रावधान किया गया है। लेकिन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के नवीनतम आंकड़ों की मानें तो 10 हेक्टेयर से अधिक खेत वाला एक कृषक परिवार भी साल भर में औसतन 2.35 लाख रुपये ही कमा पाएगा। इस तरह कृषि आय पर निर्भर बहुत  कम परिवार ही कर दायरे में लाए जा सकेंगे। अगर बढ़ते राजकोषीय बोझ के चलते ऐसा फैसला किया जाता है तो उसके लिए कई अन्य तरीके भी हो सकते हैं। कृषि आय पर कर लगाने से अच्छा है कि कृषि क्षेत्र को समर्थन मूल्य और अन्य तरीकों से दी जा रही तमाम सब्सिडी पर रोक लगा दी जाए। इसके स्थान पर कई देशों में लागू प्रत्यक्ष आय समर्थन का तरीका आजमाया जा सकता है। लेकिन इस आय को कुछ समय बाद अर्जित आयकर प्रणाली में शामिल करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इससे लोग स्वेच्छा से कर प्रणाली का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित होंगे। हालांकि अगर सरकार इसे लेकर चिंतित है कि कृषि आय पर मिली छूट का इस्तेमाल अन्य स्रोतों से हुई आय पर कर देने से बचने के लिए किया जा रहा है तो कर नियमों को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करना ही उसका सही तरीका हो सकता है। निश्चित रूप से कृषि आय पर कर लगाने जैसे प्रस्ताव पर फैसला करने के पहले सभी बिंदुओं पर गौर करना होगा। इसके अलावा नीति आयोग को भी ग्रामीण क्षेत्र के लिए कारगर संरचनात्मक बदलावों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। 
Keyword: agri, farmer, income tax, niti aayog,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या एस्सार ऑयल के सौदे से पटरी पर आएगा एस्सार समूह ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.