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लौह अयस्क निर्यात पर दाम का प्रहार!

जयजित दास / भुवनेश्वर May 01, 2017

पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश के लौह अयस्क निर्यात में खासा सुधार देखे जाने के बाद इसके मंदी के क्षेत्र में प्रवेश करने से वित्त वर्ष 2018 में इसकी चाल गड़बड़ा सकती है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2016-17 के दौरान लौह अयस्क निर्यात चार गुना बढ़कर 2.4 करोड़ टन हो गया था। निर्यातकों को 95 डॉलर प्रति टन का स्तर छूने वाले अंतरराष्टï्रीय दामों से काफी मदद मिली। मजबूत कीमत के इस रुख में चीन की बढ़ती मांग ने आग में घी का काम किया।

 
चीन के बंदरगाहों पर लौह अयस्क की मालसूची 13.3 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो 2004 के बाद सबसे ज्यादा थी। इससे निर्यात में तेजी ने भारतीय लौह अयस्क निर्यात के फिर से जीवित होने की चिंगारी सुलगा दी। एक समय में भारत वैश्विक व्यापार का सिरमौर हुआ करता था लेकिन लौह अयस्क की कीमतों में गिरावट ने भारत के निर्यात की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लौह अयस्क के बेंचमार्क दाम लुढ़ककर छह महीने के निम्रतम स्तर 61 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए जो फरवरी की तुलना में 30 प्रतिशत तक गिर गए थे।
 
ओडिशा के एक प्रमुख निर्यातक ने कहा कि कीमतों में मजबूती के रुख से लौह अयस्क निर्यात ने रफ्तार पकड़ ली थी। 30 प्रतिशत के अत्यधिक निर्यात शुल्क के बावजूद खनिक 28 डॉलर प्रति टन का मार्जिन पा सकते थे। हालांकि कीमतों में गिरावट एक बाधा है। 60-65 डॉलर प्रति टन पर निर्यात संभव नहीं है। विश्लेषकों को इस साल आगे भी लौह अयस्क के दामों में कोई ज्यादा मजबूती नजर नहीं आ रही है। इसके दाम 60-70 डॉलर प्रति टन के दायरे में रहने की उम्मीद है। केएम विसारिया फैमिली ट्रस्ट के निवेश प्रबंधक गिरीराज डागा ने कहा कि लौह अयस्क के दामों में सुधार की संभावना नहीं है क्योंकि चीन ने इस्पात उत्पादन में कमी कर दी है। इस्पात की मांग बुरी तरह प्रभावित है और इससे लौह अयस्क की कीमतों को नीचे रखने का दबाव रहेगा। विदेश व्यापार में भारत के अपनी खोयी हुई स्थिति फिर से प्राप्त करने की संभावना नहीं है क्योंकि लौह अयस्क की कीमत का परिदृश्य मंद है। इसके अलावा कर्नाटक और गोवा में कई प्रमुख खनिक अब भी काम नहीं कर रहे हैं।
 
2011-12 में देश से लौह अयस्क निर्यात 12.7 करोड़ टन पहुंच गया था। घरेलू इस्पात इकाइयों के संरक्षण के लिए 30 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगाने जैसे संरक्षणवादी उपायों के कारण तब से निर्यात पर असर पड़ा है। 2014-15 में लौह अयस्क निर्यात में ऐतिहासिक गिरावट आई और यह 50 लाख टन पर आ गया। उस समय देश शुद्ध रूप में लौह अयस्क का आयातकर्ता बन गया था।
Keyword: iron ore, लौह अयस्क,
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