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'निवेशकों के लिए आकर्षक बाजार'

हंसिनी कार्तिक और विशाल छाबडिय़ा /  May 01, 2017

यूबीएस की एशिया प्रशांत मामलों की अध्यक्ष कैथरिन शीह और कंट्री हेड (भारत) एवं प्रबंध निदेशक आशिष कामत ने हंसिनी कार्तिक और विशाल छाबडिय़ा के साथ विशेष बातचीत में कहा कि भारत निवेशकों और स्वयं यूबीएस के लिए एक आकर्षक स्थान बना रहेगा। शीह का मानना है कि अल्पावधि में दुनियाभर के बाजार समेकित हो सकते हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
भारत समेत दुनिया भर के सूचकांक नई ऊंचाई पर हैं। यह आनुपातिक रूप से बुनियादी समर्थन के बगैर संभव हुआ है। क्या आप इसे लेकर चिंतित हैं?
 
कैथरीन शी: चाहे अमेरिका हो या भारत या फिर चीन, हम इक्विटी को लेकर अभी भी 'ओवरवेट' (सकारात्मक) बने हुए हैं। हम निवेश-ग्रेड बॉन्डों के बजाय इक्विटी को पसंद कर रहे हैं। लेकिन यदि अल्पावधि समेकन की स्थिति सामने आती है तो हमें आश्चर्य नहीं होगा। बाजार में जोखिम के कारक मौजूद हैं। फ्रांस में चुनाव हैं और पहला राउंड बाजारों के लिए सकारात्मक है। इसके अलावा यूरोप में तनाव दिख रहा है और कोरिया में भी यही स्थिति है। इसलिए वेल्थ मैनेजरों के तौर पर हम विविधता पर जोर देते हैं। हमारा मानना है कि निवेशकों को बाजार हालात से फायदा उठाने के लिए वैश्विक रूप से विविधतापूर्ण रुख अपनाने और कुछ हद तक रक्षात्मक निवेश को बनाए रखने की जरूरत होगी।
 
क्या तेजी को देखते हुए आप भारत पर 'ओवरवेट' नजरिये पर विचार करेंगे?
 
शी: हम भारत पर ओवरवेट बने हुए हैं। यह एक आकर्षक बाजार है। हम भारतीय बाजार पर अपने नजरिये में बदलाव नहीं लाएंगे। लेकिन यदि कुछ ग्राहक कुछ मुनाफा कमाना चाहते हैं तो इसमें हमें आश्चर्य नहीं होगा।
 
बाजार में तरलता की स्थिति के बारे में आपका क्या कहना है?
 
आशिष कामत: जहां तक विकास की कहानी का सवाल है, आपके लिए बाजार में डी-मार्ट जैसी मिड-कैप कंपनियां अधिक उपलब्ध होंगी। इसलिए आप बाजार में मजबूती देखेंगे और उसके बाद प्रवर्तक शेयरधारिता में कमी आएगी जिससे कुछ खास शेयरों में तरलता बढ़ेगी। भारत में 7 से 7.5 फीसदी के बीच वृद्घि को देखते हुए वैश्विक फंड लगातार निवेश कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद, घरेलू नकदी भी बाजार में जगह तलाशने में सफल रही है।
 
लेकिन पिछले प्रदर्शन के मुकाबले 7 प्रतिशत की वृद्घि अभी भी कम है...
 
कामत: हमारे ग्राहकों ने हमें बताया है कि मोदी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में चुनावी जीत दर्ज करने से आशावाद का निर्माण हुआ है। हम अपनी तुलना हमेशा चीन के साथ करते रहे हैं। अब हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। हमें इस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि हम जीएसटी और नोटबंदी जैसे सुधारों की मदद से किस तरह से दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकते हैं। ये सुधार दीर्घावधि में लाभदायक साबित होंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए कुछ हद तक दबाव की स्थिति बनी रहेगी। सेबी और आरबीआई नकदी के वैकल्पिक स्रोत के तौर पर बॉन्ड बाजार को मजबूती प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं।
 
क्या आप मानते हैं कि भारत दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे संरक्षणवाद से अलग रहेगा?
 
कामत: मैं नहीं मानता कि अमेरिका किसी को व्यापार युद्घ शुरू करते देखना पसंद करेगा। संरक्षणवाद से उत्पादन की लागत बढ़ सकती है और इसके परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति पर असर दिख सकता है। इसलिए मैं नहीं मानता कि ट्रंप की 15 प्रतिशत की कर दर आश्चर्यजनक है। इससे अमेरिका में कंपनियों को निर्माण गतिविधि बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा। कई अमेरिकी कंपनियां अपना लगभग 50 प्रतिशत राजस्व अमेरिका से बाहर से हासिल करती हैं। अमेरिकी कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहेंगी कि अमेरिकी सरकार वैश्विक रूप से लगातार बढऩे की उनकी क्षमता को बाधित न करे। 
 
भविष्य में अमेरिकी ब्याज दरों और अमेरिकी डॉलर की चाल के बारे में आपका क्या राय है?
 
शी: हमें उम्मीद है कि अमेरिकी दरों में दो बार और इजाफा होगा और इस साल इनमें आधा फीसदी की वृद्घि और होगी। इसे देखते हुए हमारा मानना है कि अमेरिका के लिए यूरो का कम मूल्य है। हम यूरो में तेजी देखना शुरू करेंगे लेकिन फिलहाल राजनीतिक कारकों की वजह से इस पर दबाव बना हुआ है। 
 
क्या अमेरिकी दरों में वृद्घि से भारत में वैश्विक प्रवाह प्रभावित होगा?
 
शी: आधा फीसदी की दर वृद्घि प्रवाह पर ज्यादा असर नहीं डाल सकती है, इसके बजाय हमारा मानना है कि यह बैंकों के लिए लाभकारी होगी क्योंकि वे अधिक ब्याज आय कमाने में सक्षम होंगे। 
 
यूबीएस ने हाल में शानदार तिमाही परिणाम दर्ज किए हैं। भारत का योगदान कितना महत्त्वपूर्ण है?
 
शी: भारत हमारे परिचालन का अभिन्न हिस्सा है। भारत में अब हमारे दो नए व्यावसायिक समाधान केंद्र हैं और हमारे साथ यहां 11,000 से अधिक लोग काम करते हैं। यहां हमारे दो यूबीएस यूनिवर्सिटी भी हैं। हम भारत में अपने परिचालन में विस्तार का सिलसिला बरकरार रखेंगे और यहां दीर्घावधि के लिए निवेश कर रहे हैं। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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