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घूम आइए ब्रिटेन या चुका डालिए फीस

प्रिया नायर /  May 01, 2017

पाउंड स्टर्लिंग में कमजोरी आने से उन लोगों की बांछें खिल गई हैं, जो मौज-मस्ती के लिए ब्रिटेन की सैर करना चाहते हैं या उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए वहां जाना चाहते हैं। उन लोगों के लिए भी यह खुशखबरी है, जो ब्रिटेन में जायदाद खरीदना चाहते हैं क्योंकि पिछले तीन महीनों में रुपये के मुकाबले पाउंड 5 फीसदी लुढ़का है, जिससे उन्हें बेहद कम कीमत पर संपत्ति मिल सकती है।

 
शिक्षा सलाहकार फर्म द चोपड़ाज के सह-संस्थापक नवीन चोपड़ा कहते हैं कि जिन लोगों की संतानों को इसी साल ब्रिटेन जाना है (वहां शैक्षिक सत्र अगस्त और अक्टूबर के बीच में शुरू होता है), उन्हें अपने पास मौजूद रुपयों को इसी समय पाउंड में बदलवा लेना चाहिए ताकि उनके पास रकम तैयार रहे। वह कहते हैं, 'ब्रिटेन में अधिकतर विश्वविद्यालय पंजीकरण के बाद ही शिक्षण शुल्क लेते हैं। छात्रों को आम तौर पर केवल आवेदन शुल्क (यदि लगा तो) अथवा पुष्टिï या कन्फर्मेशन शुल्क ही देना होता है, जो 500 से 1,000 पाउंड होता है। इसके अलावा शिक्षण शुल्क के नाम पर पेशगी कुछ भी नहीं लिया जाता। इसलिए यदि ब्रिटेन आपकी पहली पसंद है तो मौजूदा दर पर रुपये को पाउंड में बदलकर आप रकम तैयार रख सकते हैं।'
यदि आपकी संतान का प्रवेश सुनिश्चित हो गया है तो आप विश्वविद्यालय से शिक्षण शुल्क पेशगी लेने का अनुरोध कर सकते हैं। लेकिन याद रखिए कि प्रवेश की पुष्टिï स्नातक स्तर पर आए अंकों पर निर्भर करती है और भारत में अधिकतर कॉलेज अपने परिणाम जून या उसके आसपास ही घोषित करते हैं।
 
उच्च शिक्षा के मामले में ब्रिटेन हमेशा ही कुछ अधिक खर्चीला स्थान रहा है क्योंकि वहां की मुद्रा रुपये के मुकाबले बहुत महंगी है। वहां एक साल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए औसत शुल्क 16,000 से 17,000 पाउंड होता है, जो पाउंड की मौजूदा कीमत के हिसाब से 1,31,000 रुपये से 1,39,000 रुपये के बीच बैठता है। जो पहले से ही ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें काफी फायदा होगा क्योंकि वहां रहने का उनका खर्च कम हो गया होगा।
 
हालांकि पढ़ाई के मामले में ब्रिटेन भारतीयों के लिए प्राथमिकता नहीं रह गया है। जब से वहां के वीजा नियमों में परिवर्तन हुआ है तभी से भारतीय छात्र वहां जाने में अधिक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। चोपड़ा कहते हैं, 'ब्रिटेन को वही लोग तरजीह देते हैं, जिनका वहां कारोबार आदि होता है। मध्य वर्ग के छात्र ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, कनाडा या आयरलैंड जैसे देशों का रुख करते हैं।' यूके काउंसिल फॉर इंटरनैशनल स्टूडेंट अफेयर्स की वेबसाइट के अनुसार भारत से वहां जाने वाले छात्रों की संख्या घट रही है। 2013-14 में वहां 19,750 छात्र गए थे, लेकिन 2014-15 में आंकड़ा 18,320 रह गया। 2015-16 में केवल 16,745 छात्र वहां पढऩे गए।
 
अलबत्ता ट्रैवल कंपनियों से ब्रिटेन के हॉलिडे पैकेज के बारे में खूब पूछा जा रहा है क्योंकि सैलानी पाउंड की गिरती कीमत का फायदा उठाना चाहते हैं। कॉक्स ऐंड किंग्स में हेड - रिलेशनशिप्स करण आनंद का कहना है, 'इस मौके का फायदा उठाने के लिए हमने केवल ब्रिटेन के पैकेज शुरू किए हैं। पिछले कुछ महीनों में हमने समूह में या अकेले ही ब्रिटेन की सैर करने वालों की अच्छी भीड़ देखी है।' हवाई किराये भी इस समय काफी सस्ते हैं, जिससे वह सैर सपाटे का किफायती ठिकाना बन गया है। मिसाल के तौर पर आठ दिन/सात रात के ग्रुप पैकेज 'जेम्स ऑफ ब्रिटेन' की कीमत हवाई किराये के बगैर केवल 60,000 रुपये प्रति व्यक्ति पड़ रही है। इसमें लंदन, कार्डिफ, मैनचेस्टर, लिवरपूल और यॉर्क की सैर कराई जाती है। बहरहाल ऐंबिट कैपिटल के हेड - इक्विटीज प्रमोद गब्बी मानते हैं कि विदेश में निवेश की गुंजाइश तलाशने वालों को पाउंड की रपटन से मामूली फायदा ही होगा। वह बताते हैं, 'पाउंड के अवमूल्यन से शायद मार्जिन में मदद मिलेगी, लेकिन यही सबसे अहम नहीं होगा। संपत्ति की प्रमुख गुणवत्ता पर नजर डालनी चाहिए। यह बाजार विशेष और संपत्ति वर्ग के बुनियादी कारकों पर निर्भर करता है। इक्विटी में कंपनी का नकदी प्रवाह काफी कुछ तय करता है।' पाउंड अभी स्थिर है और आने वाले समय में उसमें कुछ गिरावट का ही अंदेशा है। हालांकि फ्रांस के चुनावों में यदि इमैनुएल मैक्रॉन के हाथ सत्ता आती है तो यूरो संभलेगा और उसके साथ ही पाउंड भी कुछ चढ़ सकता है।
Keyword: tourism, Britain,,
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