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'फिलहाल तो निवेश में बने रहें निवेशक'

पुनीत वाधवा /  April 30, 2017

एक बहुराष्ट्रीय बैंकिंग समूह जूलियस बेयर गु्रप के एशियाई मामलों के शोध प्रमुख मार्क मैथ्यूज ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि पिछले सप्ताह बाजार के सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में खरीदारी बरकरार रखेंगे, क्योंकि वे सुधार की कहानी को पसंद करते हैं। उनका कहना है कि भारत को लेकर उनका हमेशा से यह मानना रहा है कि यह खरीदारी करने और निवेश बनाए रखने के लिहाज से उपयुक्त बाजार है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:


भारतीय सूचकांकों ने पिछले सप्ताह नई ऊंचाई को छुआ था। अब बाजार के लिए आगे की राह कैसी रहेगी?
 
बाजार ऊपर जा सकते हैं। बाजार अपने दीर्घावधि एवरेज (एलटीए) के अनुरूप मुश्किल से ही कारोबार कर रहे हैं। जब वे एलटीए से नीचे हैं तो इसकी वजह है खराब अर्थव्यवस्था, देश में राजनीतिक परिदृश्य या वैश्विक कारक आदि। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, मुद्रास्फीति नियंत्रित है और कॉरपोरेट आय वृद्घि काफी मजबूत दिख रही है। केंद्र सरकार द्वारा सही नीतियों को लागू किए जाने और ताजा विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने से उसके अन्य कार्यकाल के लिए संभावना मजबूत हुई है।
 
क्या आप मूल्यांकन को लेकर चिंतित नहीं हैं?
 
मूल्यांकन कुछ हद तक ऊपर है, लेकिन यह एलटीए से बहुत ज्यादा ऊपर नहीं है। मेरा मानना है कि यह एलटीए से ऊपर रहेगा क्योंकि अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है और देश में राजनीतिक स्थायित्व भी है। 
 
मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांक  अपने लार्ज-कैप प्रतिस्पर्धियों को मात दे चुके हैं। आगे इनका प्रदर्शन कैसा रहेगा?
 
यह फंड प्रवाह की गति पर निर्भर है। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) प्रवाह के बजाय भारत में घरेलू प्रवाह अधिक महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू निवेशकों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों के लिए स्वाभाविक रूप से दिलचस्पी बनी रहेगी। इसे देखते हुए घरेलू फंड प्रवाह मजबूत बना रहेगा और इससे मिड-कैप और स्मॉल-कैप क्षेत्रों को मदद मिलेगी।
 
अगली कुछ तिमाहियों में एफआईआई के निवेश प्रवाह की रफ्तार कैसी रहेगी?
 
मेरा मानना है कि एफआईआई भारत में खरीदारी बरकरार रखेंगे, क्योंकि वे 'सुधार की कहानी' को पसंद करते हैं और मानते हैं कि भाजपा अगले आम चुनाव के लिए अधिक सुरक्षित है। साथ ही उन्हें तेल कीमतों में अब ज्यादा तेजी आने की भी उम्मीद नहीं है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद स्थिति होगी। तीसरा, उभरते बाजार (ईएम) लोकप्रिय बाजार हैं। चीन ने कई मजबूत आंकड़े दर्ज किए हैं। ताईवान और सिंगापुर का निर्यात भी मजबूत दिख रहा है। इसलिए, अपेक्षाकृत अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और एशिया में मजबूत वृद्घि दरों के समावेश को देखते हुए उभरते बाजारों को लोकप्रिय बाजार समझा जाना उचित है।
 
क्या बाजार अर्थव्यवस्था पर जीएसटी क्रियान्वयन के प्रभाव को नजरअंदाज कर रहे हैं?
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का असर दिखने में कम से कम दो साल लग जाएंगे। तब तक अन्य सुधार प्रयासों पर भी अमल होगा। यदि तब तक मोदी-नीत सरकार राज्य सभा में आंकड़े अपने पक्ष में करने में सफल रहती है तो सुधार की रफ्तार तेज हो सकती है। जीएसटी भारत के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश में व्यापार और निवेश में तेजी आएगी।
 
क्या आप सरकार द्वारा अब तक उठाए गए नीतिगत कदमों को लेकर संतुष्ट हैं?
 
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में कई 'सुधारक' आगे आए हैं जिनमें शिंजो अबे से लेकर डॉनल्ड ट्रंप मुख्य रूप से शामिल हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी के सुधार प्रयासों का वाकई सकारात्मक परिणाम दिखने की संभावना है, क्योंकि उन्होंने भारत को बेहद सक्षम देश बनाने की दिशा में काफी काम किया है। बैंकरप्सी ऐक्ट, फसल बीमा अधिनियम, रियल एस्टेट अधिनियम, जीएसटी सभी बेहद महत्त्वपूर्ण हैं। लेकिन इनके सफलतापूर्वक क्रियान्वयन में कुछ वर्ष लगेंगे। विधानसभा चुनाव परिणाम (खासकर उत्तर प्रदेश में) अगले साल राज्य सभा में बहुमत हासिल करने की सरकार की क्षमता के लिए शुभ संकेत है। मेरी नजर में, भारत आपके दीर्घावधि के लिए 
प्रमुख पोर्टफोलियो का हिस्सा बन सकता है। 
 
निवेशकों के लिए आपका क्या सुझाव है?
 
निवेश बनाए रखें। जो लोग पहले ही निवेश कर चुके हैं, उन्हें अपने निवेश को लेकर कुछ करने की जरूरत नहीं है। मैं मौजूदा हालात में भारतीय कंपनियों पर कुछ निवेश का सुझाव देना चाहूंगा। भारत के बारे में मेरी धारणा हमेशा से यही रही है कि यह देश खरीदारी करो और बनाए रखे वाला बाजार है। 
Keyword: bank, बैंकिंग समूह जूलियस बेयर,
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