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एनपीए नीति पर फैसला जल्द

अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली April 30, 2017

केंद्रीय कैबिनेट भारतीय बैंकिंग व्यवस्था के 6 लाख करोड़ रुपये के डूबते धन को लेकर नए ढांचे पर इस सप्ताह के आखिर तक फैसला कर सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 5,000 करोड़ रुपये की पेंशन योजना पर भी फैसला होने की संभावना है। सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) का ढांचा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और बैंकिंग नियमन अधिनियम की परिकल्पना के मुताबिक होगा। इन संशोधनों से बैंकों को वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक फैसले करने की अनुमति मिल सकेगी, जांच एजेंसियां बाद में इसकी जांच नहीं कर सकेंगी। इसके अलावा गैर निष्पादित संपत्तियों से निपटने के बारे में फैसला करने के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक को सरकारी बैंकों की ओर से हस्तक्षेप करने का अधिकार मिल जाएगा।
 
सरकार का मानना है कि इन दो विधेयकों की कानूनी कार्रवाई के अलावा मौजूदा व्यवस्था में भी बैंकों को खराब संपत्ति से निपटने के लिए पर्याप्त अधिकार दिए गए हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक संसद के मॉनसून सत्र में दोनों संशोधन संभव हैं। नए ढांचे में रिजर्व बैंक की निगरानी में कई निरीक्षण समितियों का गठन हो सकेगा, जो मूल्य के आधार पर 35-40 प्रमुख एनपीए के मामले में प्रगति निगरानी करेंगी, जिनकी कुल एनपीए में हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा है। यह निरीक्षण समितियां कर्जदाताओं को निर्णय लेने, संयुक्त कर्जदाता मंचों (जेएलएफ) की निगरानी, किसी खास परियोजना के लिए बैंकरों के कंसोर्टियम बनाने में मदद करेंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि  समितियां यह फैसला करने में सक्षम बनाई जा सकती हैं कि किसी मामले में किस बैंक की कितनी हिस्सेदारी होगी, साथ ही अगर जेएलएफ में किसी बात को लेकर गतिरोध होता है तो समिति हस्तक्षेप कर सकती है। 
 
जैसा कि पहले खबर दी गई थी, ढांचा जेएलएफ को एनपीए के मामले में ज्यादा प्रïभावी तरीके से निपटने में सक्षम बना सकता है, जिसके लिए मौजूदा दिशानिर्देशों में बदलाव किया जा सकता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक खराब कर्ज या टॉक्सिक एसेट के मामले में किया गया फैसला जेएलएफ के सभी कर्जदाताओं के लिए बाध्यकारी है, अगर एक्सपोजर की 75 प्रतिशत शर्तों को मंजूरी दी गई हैं या पूर्ण संख्या में से 60 प्रतिशत की मंजूरी मिली हुई है। बहरहाल इस सीमा को बहुत ज्यादा माना जा रहा है और इसलिए नियमों में कुछ बदलाव हो सकता है जिससे जेएलएफ, एनपीए के बारे में सामान्य बहुमत के आधार पर फैसला कर सके। 
 
ऐसे बैंक जो कंसोर्टियम का हिस्सा हैं, उन्हें परियोजना की स्थिति खराब होने को लेकर उनमें समझौता न होने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उम्मीद की जा रही है कि इस मसले को हल करने के लिए केंद्र सरकार एक प्रावधान लाएगी जिसके तहत बैंकों के एक सामान्य बहुमत से उनके खराब कर्ज की मात्रा के आधार पर फैसला हो सकेगा तो अन्य बैंकों के लिए भी बाध्यकारी होगा जो उस समूह में शामिल हैं। एक्सपोजर का नया स्तर मौजूदा 75 प्रतिशत से नीचे तय किया जा सकता है। नई पेंशन नीति को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है, जिसमें सचिवों की समिति को अधिकार देने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि पद से सेवानिवृत्त होने वाले किसी कर्मचारी की पेंशन उस पद पर रहते हुए निकाले गए हाल के वेतन के अनुरूप होगी। 
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक NPA,,
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