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बेहतर हो कंपनी प्रशासन : सेबी

एन सुंदरेश सुब्रमण्यन / नई दिल्ली April 28, 2017

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) कंपनी प्रशासन और प्रतिभूति बाजार में निवेशकों की जागरूकता में सुधार की खातिर कई कदम उठाने पर विचार कर रहा है। नियामक की इच्छा प्रक्रिया में सुधार और बेहतर क्रियान्वयन व्यवस्था की ओर बढऩे की भी है। सीआईआई के सालाना समारोह में सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कई मसलों का जिक्र किया, जिस पर अगले कुछ महीनों के दौरान नियामक की नजर रहेगी। नियामक के निदेशक मंडल की हाल में बैठक संपन्न हुई है, जहां सेबी ने कई कदम उठाने का फैसला लिया है और इसमें जिंसों में ऑप्शन की शुरुआत शामिल है।
 
एक ओर जहां सेबी अधिग्रहण संहिता, गैर-सूचीबद्धता के नियम और पुनर्खरीद के नियमों की समीक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह संस्थागत निवेशकों के प्रबंधन की खातिर एकसमान नई संहिता लाने पर विचार कर रहा है। एकसमान संहिता की अनुपस्थिति पर सेबी चेयरमैन ने कहा, चूंकि ज्यादातर संस्थान निष्क्रिय बने हुए हैं, ऐसे में प्रवर्तक ऐसे संस्थानों को शामिल करने में प्राथमिकता दे रहे हैं। सेबी इस संहिता पर अन्य नियामकों मसलन आईआरडीएआई व पीएफआरडीए के साथ काम कर रहा है।
 
उन्होंने उन तरीके पर अप्रसन्नता जताई, जिसके तहत स्वतंत्र निदेशकों व अंकेक्षकों के संस्थान काम कर रहे हैं। त्यागी ने कहा, स्वतंत्र निदेशकों की अवधारणा में काफी कमियां हैं। मौजूदा व्यवस्था प्रवर्तकों की दया पर निर्भर है। इसकी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ये निदेशकों की किसी चीज पर प्रतिबद्धता नहीं होती। खास तौर से उन्होंने उन कंपनियों में छोटे शेयरधारकों के हितों की रक्षा पर जोर दिया, जहां प्रवर्तकों व संस्थागत निवेशकों की कुल हिस्सेदारी 80 फीसदी से ज्यादा है।
 
त्यागी ने उदाहरणों का संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा, स्वतंत्र निदेशक बिना कोई कारण बताए या स्वास्थ्य वजहों से इस्तीफा देते हैं, जो अक्सर फर्जी होता है। त्यागी ने कहा, इन निदेशकों के ऊपर हिस्सेदारों को यह बताने की जवाबदेही है कि वास्तव में उन्होंने किस वजह से इस्तीफा दिया। किसी कंपनी के वित्तीय हालात की जानकारी देने में अंकेक्षकों की अहम भूमिका होती है, पर स्व नियमन की व्यवस्था काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, यहां गंभीर मसले हैं और सेबी का ध्यान खींच रहे हैं। उन्होंंने कहा, कोई कदम उठाने से पहले नियामक इन मसलों पर बातचीत करेगा।
 
बाजार नियामक कैपिटल ऐंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट (आईसीडीआर) नियमन के मसौदे की भी समीक्षा कर रहा है। त्यागी ने कहा, नियामक बड़े मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसका बेहतर प्रभाव सामने आए। पदभार संभालने के बाद त्यागी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 447 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। एनएसई के नए सीईओ के लिए मंजूरी प्रक्रिया पर उन्होंने कहा, सेबी एक्सचेंज से पूछे गए सवाल के जवाब के आधार पर इस पर विचार कर रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या यह मंजूरी अगले दो हफ्ते में मिल जाएगी, उन्होंने कहा, इससे भी ज्यादा वक्त लग सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि एनएसई ने आईपीओ से पहले अनुचित एक्सेस व कोलोकेशन से जुड़े मसले के निपटान का फैसला किया है, जिसमें कुछ महीने लग सकते हैं।
Keyword: sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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