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सेंसेक्स 30,000 के पार, किस ओर बढ़ रहा बाजार?

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली 04 26, 2017

बाजार में बहार, क्या रह पाएगी बरकरार

दिसंबर 2016 के हालिया निचले स्तर से एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स में करीब 4,300 अंक यानी 17 फीसदी की उछाल दर्ज हुई है
मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में तेजी और भी ज्यादा रही है और एनएसई का मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक क्रमश: इस अवधि में 32 व 36 फीसदी चढ़ा है
रियल्टी, टिकाऊ उपभोक्ता, पूंजीगत सामान, बैंक व तेल और गैस आदि क्षेत्र में 24 से 64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है
बाजार अभी वित्त वर्ष 2018 के  आय अनुमान के 17.5 गुने पर कारोबार कर रहा है, जो ऐतिहासिक औसत 14-16 गुने से ज्यादा है, लेकिन यह अभी भी 2008 के सर्वोच्च स्तर 20 गुना से कम है

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स बुधवार को 30,000 के पार निकल गया और 190 अंक की उछाल के साथ 30,133 अंक पर बंद हुआ। दूसरी ओर नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 0.5 फीसदी की उछाल के साथ 9,351 अंक की नई ऊंचाई पर बंद हुआ। दिसंबर 2016 के हालिया निचले स्तर से एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स में करीब 4,300 अंक यानी 17 फीसदी की उछाल दर्ज हुई है। वैश्विक स्तर पर भी यह प्रदर्शन के मामले में अग्रणी बाजार है। मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में तेजी और भी ज्यादा रही है और एनएसई का मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक क्रमश: इस अवधि में 32 व 36 फीसदी चढ़ा है। रियल्टी, टिकाऊ उपभोक्ता, पूंजीगत सामान, बैंक व तेल और गैस आदि क्षेत्र में 24 से 64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

आम बजट की नकारात्मक चीजों के सिवा विदेशी व देसी निवेशकों की नकदी की बौछार, चुनाव के नतीजे (देसी विधान सभा चुनाव व फ्रांस के नतीजे) और सूचकांक में शामिल कुछ कंपनियों की तरफ से मार्च तिमाही में बेहतर आय पेश किया जाना कुछ प्रमुख कारक रहे हैं। शानदार बढ़ोतरी के बावजूद ज्यादातर विश्लेषक लंबी अवधि के नजरिये से आशावादी हैं। वैश्विक व देसी स्तर पर जब तक नकारात्मक खबरें नहीं आएंगी, उनका मानना है कि तब तक बाजार मेंं बेहतरी बनी रहेगी।

एवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटिजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्यू हॉलैंड ने कहा, जब तक वैश्विक बाजार का प्रदर्शन जारी रहेगा, भारत भी बेहतर प्रदर्शन करेगा। वैश्विक बढ़त की रफ्तार दुनिया भर के निवेशकों को उत्साहित कर रहे हैं। फ्रांस मेंं पहले दौर के नतीजे को देखते हुए अल्पावधि में बाजार का जोखिम भी अब काफी कम है। हालांकि कुछ चिंताएं हैं। ज्यादातर विश्लेषक महंगे मूल्यांकन की बात कर रहे हैं और इस वास्तविकता पर भी कि कंपनियों की आय में सुधार की दरकार है। बाजार अभी वित्त वर्ष 2018 के  आय अनुमान के 17.5 गुने पर कारोबार कर रहा है, जो ऐतिहासिक औसत 14-16 गुने से ज्यादा है, लेकिन यह अभी भी 2008 के सर्वोच्च स्तर 20 गुने से कम है।

कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के कार्यकारी निदेशक संजीव प्रसाद ने कहा, हम फंडामेंटल में अहम बदलाव के बिना शेयरों की कीमतों में तीव्र परिवर्तन की थाह लेने में सक्षम नहीं हैं। लगता है कि कुछ मामलों में निवेश का मूल सिद्धांत नकदी है। सक्रिय निवेशक शेयर के फंडामेंटल वैल्यू पर फैसला लेते हैं, न कि नकदी के आधार पर। हम सिर्फ उम्मीद कर सकते हैं कि मूल्यांकन को समर्थन देने के लिए फंडामेंटल में पर्याप्त सुधार हो। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इक्विटी में 41,487 करोड़ रुपये निवेश किया है। अप्रैल में बुधवार तक उन्होंने 2,156 करोड़ रुपये निवेश किया। एनएसडीएल के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

यूबीएस सिक्योरिटीज के भारतीय शोध प्रमुख गौतम चौचडिय़ा ने कहा, हमें बाजार में गिरावट के लिए उत्प्रेरक की दरकार है। सिर्फ इस कारण से कि मूल्यांकन महंगे हैं, बाजार में गिरावट के लिए पर्याप्त कारण नहीं है। जोखिम प्रतिफल अनुपात निश्चित तौर पर निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर पर आकर्षक नहीं है और नया निवेश पांच साल के नजरिये से किया जाना चाहिए। दिसंबर 2017 के लिए निफ्टी का हमारा लक्ष्य 8,800 रुपये है। हमारा सबसे अच्छा और आशावादी लक्ष्य 9,700 है। क्षेत्र के लिहाज से हम चुनिंदा वित्तीय कंपनियां, कंज्यूमर, आईटी सेवा, वाहन कलपुर्जा आदि पर ओवरवेट हैं। अंडरवेट में इंडस्ट्रियल्स व इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

आय के अलावा विश्लेषक अर्थव्यवस्था व कंपनियों की आय पर जीएसटी के क्रियान्वयन के असर और मॉनसून की प्रगति के अनुमान के लेकर सचेत हैं। इनका कहना है कि कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही में मॉनसून कैसा रहता है, यह देखने वाली बात होगी। उनका मानना है कि दो देसी घटनाक्रम में बाजार को अवरोधित करने की क्षमता है। डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक यू आर भट्ट ने कहा, आय के अलावा जीएसटी का क्रियान्वयन और दूसरी छमाही में मॉनसून तेजी में अवरोध पैदा कर सकता है। हमें नहीं लगता कि आने वाले दिनों में आय का समर्थन मिलेगा। हमें वैश्विक भूराजनैतिक स्थिति पर भी नजर रखनी होगी। इस कैलेंडर वर्ष में तीव्र बढ़ोतरी को देखते हुए निफ्टी-50 घटकर 9,000 के स्तर तक आ सकता है। अन्य देसी व वैश्विक कारक से अगर सहारा न मिला तो बाजार दिसंबर के अंत तक करीब 15 फीसदी फिसल सकता है।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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