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नीति आयोग बने ज्यादा परामर्शदाता : राज्य

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली April 23, 2017

नीति आयोग संचालन परिषद की आज हुई बैठक में राज्य के मुख्यमंत्रियों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दौर को लेकर अपनी चिंताएं जताईं, जिनमें इसका किसानों, कारोबारियों व कुटीर और लघु उद्योगों के हितों पर असर शामिल है। वाम शासित केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अंतर राज्यीय परिषद (आईएससी) और नीति आयोग जैसे मंचों के घटते महत्त्व को लेकर चिंता जताई। अपने भाषण में राजे ने कहा कि नीति आयोग और आईएससी की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित किए जाने की जरूरत है, जिससे एक दूसरे के क्षेत्र मेंं अनावश्यक हस्तक्षेप और भ्रम की स्थिति से बचा जा सके। विजयन ने कहा कि नीति आयोग, योजना आयोग का कमजोर उत्तराधिकारी व विकल्प है। उन्होंने शिकायत की कि सकारात्मक बहस और चर्चा धीरे धीरे खत्म हो रही है और आईएससी व राष्ट्रीय विकास परिषद जैसे मंच अब निष्क्रिय हो गए हैं।  
 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को छोड़कर सभी 31 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का प्रतिनिधित्व किया, जो दिल्ली के निकाय चुनाव में व्यस्त थे। विजयन ने यह भी कहा कि सहकारी संघवाद न सिर्फ लिखित बयानों और दस्तावेजों में होना चाहिए बल्कि केंद्र व राज्यों के संबंध के मामले में गतिशील व जीवंत होना चाहिए। जीएसटी के मसले पर राजे ने कहा कि सोमवार से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा में यह विधेयक पारित होने वाला है। राजे ने कोटा पत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट को जीएसटी में 5 प्रतिशत के निचले स्लैब में डालने की जोरदार वकालत की है। राजे ने कहा, 'कोटा पत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट पर अन्य राज्यों में ऊंची दरों पर कर लगाया जाता है। फिटमैंट समिति उच्च कर स्लैबों में फिट करने का फैसला कर सकती है।' उन्होंने कहा, 'मैं संगमरमर, कोटा पत्थर, बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट को पांच फीसदी के निचले स्लैब में डालने पर गौर करने का अनुरोध करती हूं।'
 
विजयन ने कहा कि चिंता है कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य किसानों व छोटे कारोबारियों की उचित समस्याओं व उनके हितों का संरक्षण करने में सक्षम नहीं होंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद उनके राज्य को केंद्र सरकार के ज्यादा राजस्व हस्तांतरण का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बिहार के राजस्व मेंं 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, न कि 40 प्रतिशत की। उन्होंने कहा कि बिहार को 2015-16 और 2016-17 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 19,000 करोड़ रुपये कम मिले हैं। 
 
कृषि क्षेत्र के बारे में कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को पूरा करना चाहिए, जिसमें किसानों को उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य देने को कहा गया था। उन्होंने केंद्र सरकार से यह साफ करने को कहा कि किसानोंं की आमदनी मौजूदा मूल्यों पर दोगुनी की जाएगी, या स्थिर मूल्य पर। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एडाप्पडी के पलानिस्वामी ने केंद्र को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार शीघ्र ही राज्य जीएसटी विधेयक पारित होने के लिए विधानसभा में पेश करेगी। उन्होंने चेताया भी कि जीएसटी व्यवस्था में राजस्व के किसी नुकसान की भरपाई के अभाव में तमिलनाडु को परेशानी नहीं होनी चाहिए। 
 
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा, 'जीएसटी ने हमें दिखाया है कि ऐसे जटिल मुद्दों पर भी सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रहित में राज्य एवं केंद्र साथ आ सकते हैं और सहमति हासिल कर सकते हैं।' गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा कि उनका राज्य केंद्र की विजनरी कार्यक्रमों एवं पहलों को लागू करने में केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहा है।  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने  पर्वतीय राज्यों के लिए विकास रणनीति बनाने के लिए नीति आयोग में ही प्रकोष्ठ बनाए जाने को कहा।
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