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निष्क्रियता की कीमत

संपादकीय /  April 23, 2017

दूरसंचार क्षेत्र का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। विभिन्न नेटवर्क और सरकार के बाद अब बैंकों को झटका सहने की तैयारी करनी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऐसे दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनमें दूरसंचार क्षेत्र के लिए मानक प्रावधानों का जिक्र है। विभिन्न नेटवर्क का ब्याज कवरेज अनुपात एक से नीचे आ गया है। यानी उनका परिचालन मुनाफा उनके ब्याज दायित्वों के निर्वहन के लिए पर्याप्त नहीं है। उसने बैंकों से कहा है कि वे अधिकतम 30 जून तक दूरसंचार क्षेत्र की समीक्षा पेश करें और इस क्षेत्र में उच्चतम दर पर मानक परिसंपत्तियों के लिए प्रावधान तैयार करने पर विचार करें ताकि बैलेंस शीट में आवश्यक मजबूती लाई जा सके। इसके अलावा जो दबाव पड़ रहा है वह क्षेत्र के जोखिम को परिलक्षित करे। माना जा रहा है कि अगर प्रोविजनिंग में इजाफा किया गया तो इसका असर चालू वित्त वर्ष में बैंकों के मुनाफे पर पड़ेगा। कुल मिलाकर विभिन्न नेटवर्क पर 400,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। 

 
यह बात ध्यान देने लायक है कि दिसंबर 2015 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा था कि दूरसंचार क्षेत्र अभी भी बिजली और इस्पात क्षेत्र की तुलना में बेहतर है। वहीं दिसंबर 2016 संस्करण में आरबीआई ने दूरसंचार क्षेत्र को ऐसे क्षेत्रों की सूची में डाल दिया जिनका 60 फीसदी से अधिक जोखिम बैंकों पर है। ऐसे अन्य क्षेत्र हैं बुनियादी विकास, इस्पात, कपड़ा और बिजली। ताजा परिपत्र से पता चलता है कि दूरसंचार क्षेत्र का प्रदर्शन तब से बहुत तेजी से बिगड़ा है। जब नेटवर्क स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए बोली लगाते हैं तो बैंक ऋण बहुत अहम हो जाता है। अब जबकि दूरसंचार ऋण निगरानी में हैं, ऐसे में यह संदेह है कि दूरसंचार कंपनियों को शायद ही इस वर्ष नीलामी में शामिल होने के लिए पैसा मिल सके। गौरतलब है कि यह सरकार के राजस्व का अहम हिस्सा रहा है। 
 
रिलायंस जियो द्वारा अपनी मुफ्त पेशकश बढ़ाए जाने के बाद विभिन्न नेटवर्क की वित्तीय स्थिति बिगड़ गई। कायदे से तो एक नई कंपनी तीन महीने तक प्रारंभिक पेशकश कर सकती है लेकिन रिलायंस जियो की पेशकश सितंबर के आरंभ से मार्च के आखिर तक चलती रही। बस कंपनी इनके नाम बदलती रही। बाजार प्रतिस्पर्धियों के पास अपने शुल्क कम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसका असर उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ा। 31 दिसंबर को समाप्त तिमाही के आंकड़ों का अध्ययन करें तो क्रेडिट सुइस के मुताबिक क्षेत्र की ईबीआईटीडीए (आयकर, मूल्यहस और भुगतान देनदारी पूर्व) आय में सालाना आधार पर 16 फीसदी और तिमाही आधार पर 14 फीसदी की गिरावट आई। चार सूचीबद्घ नेटवर्क में से केवल एक भारती एयरटेल ने इस तिमाही में मुनाफा दर्शाया। इंडिया रेटिंग्स और रिसर्च ने अनुमान जताया था कि जियो की मुफ्त पेशकश से उद्योग के राजस्व में 20 फीसदी की गिरावट आई।
 
घटी आय के बाद, सरकार को पहली बार दूरसंचार से आने वाले राजस्व में कमी की आशंका पैदा हो गई है। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को लिखे एक पत्र में पूर्व दूरसंचार सचिव जे एस दीपक ने यह मसला उठाया। लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क में हाल के दिनों तेज गिरावट आई है। सरकार को नेटवर्क से यही राशि मिलती है। अगर नियामक ने समय पर कदम उठाकर जियो को 90 दिन के बाद मुफ्त पेशकश करने से रोक दिया होता तो हालात इतने बुरे नहीं होते। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने गत सप्ताह यह बात दोहराई और कहा कि ट्राई की निष्क्रियता की वजह से संभव है इस क्षेत्र के पतन का सूत्रपात हो गया हो। बैंक भी इसके असर से अछूते नहीं रह जाएंगे। इस निष्क्रियता का खमियाजा बैंक, सरकार और अब बैंकों को भी चुकाना होगा। 
Keyword: telecom, jobs, दूरसंचार,
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