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पीरामल से नहीं मिला ऐबट को दम

अनीश फडणीस और राम प्रसाद साहू / मुंबई April 21, 2017

वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल दिग्गज ऐबट ने जब पीरामल हेल्थकेयर के फॉर्मूलेशन कारोबार का अधिग्रहण 3.7 अरब डॉलर में किया था, तब उसने 2020 तक इससे 2.5 अरब डॉलर राजस्व के अनुमान का लक्ष्य रखा था। लेकिन मौजूदा हालात में कंपनी के लिए यह लक्ष्य हासिल करना कठिन लग रहा है। ऐबट ने उभरते बाजारों में अपनी पैठ बढ़ाने की रणनीति के तहत यह अधिग्रहण किया था। लेकिन सरकार के हालिया कदमों- दवाओं और स्टेंट की कीमतों की सीमा तय करने, नियत खुराक मिश्रण वाली दवाओं की बिक्री को नियंत्रित करने आदि से दवा निर्माता के लिए चुनौती काफी बढ़ गई है। 
 
भारत में दो मुख्य इकाइयों के माध्यम से परिचालन करने वाली ऐबट ने अपनी निनजी कंपनी ऐबट हेल्थकेयर के मार्फत यह अधिग्रहण किया था। पीरामल के अधिग्रहण से कंपनी के पास 350 ब्रांडेड दवाइयां आईं, वहीं स्टेंट कारोबार ऐबट हेल्थकेयर का अपना कारोबार था। दोनों कंपनियां एकीकृत तौर पर शीर्ष स्थान सेे खिसक गईं और उनकी जगह सन फार्मा (रैनबैक्सी के अधिग्रहण के बाद) देश की पहली कंपनी बन गई। इससे भारत में अपने कारोबार को बढ़ाने में ऐबट को और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भरात के 1 लाख करोड़ रुपये के दवा बाजार में ऐबट की बाजार हिस्सेदारी 6.28 फीसदी है जबकि सन फार्मा की बाजार हिस्सेदारी 8.78 फीसदी है।
 
2010 में अधिग्रहण के समय अमेरिकी प्रवर्तक कंपनी को उम्मीद थी कि इस अधिग्रहण से अगले पांच साल में कंपनी की बिक्री 20 फीसदी बढ़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पीरामल के जिस ब्रांड का अधिग्रहण किया गया, 2010 में उसका राजस्व 2,000 करोड़ रुपये का था, वहीं उस समय ऐबट के भारतीय परिचालन का कारोबार करीब 2,200 करोड़ रुपये का था।
 
मार्च 2016 में ऐबट की दोनों भारतीय इकाइयों की एकीकृत बिक्री 6,800 करोड़ रुपये रही, जो मौजूदा विनियम दर के आधार पर 1 अरब डॉलर से थोड़ा ज्यादा है। अगर ऐबट को तय बिक्री लक्ष्य को हासिल करना है तो मार्च 2020 तक उसे सालाना 25 फीसदी की दर से विकास करना होगा। लेकिन मौजूदा समय में उसकी वृद्घि दर इसके आधे से भी कम है, ऐसे में 2020 के लक्ष्य को हासिल करना काफी कठिन है। एआईओसीडी के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2016 को समाप्त  12 महीने में कंपनी की बिक्री में 11.3 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई। सरकार की स्टेंट मूल्य निर्धारण नीति से भी ऐबट पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सरकार ने इसकी अधिकतम कीमत 30,000 रुपये तय की है, जबकि ऐबट के उत्पाद की कीमत इससे अधिक थी। ऐबट हेल्थकेयर के वैस्कुलर कारोबार, जिसमें स्टेंट भी शामिल है, उसका वित्त वर्ष 2016 की आय में 12 फीसदी योगदान रहा। इसके साथ ही नियत खुराक के मिश्रण को भी विनियमित किया गया है, जिससे कंपनी के कारोबार पर असर पड़ा है।
Keyword: piramal, पीरामल ऐबट,
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