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बराबरी में बैठकर मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे प्रधानमंत्री

संजीव मुखर्जी और अर्चिस मोहन / नई दिल्ली April 21, 2017

राष्ट्रपति भवन का प्रेक्षागृह अब विज्ञान भवन की जगह बैठकों का नया अड्डा बन रहा है। खासकर ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन वहां हो रहे हैं, जिनमें राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। रविवार को राष्ट्रपति भवन के प्रेक्षागृह में नीति आयोग की प्रशासनिक परिषद की बैठक होगी, जिसमें 'नए भारत' के बारे में राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अपने विचार रखेंगे। सभी 29 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विधानसभा वाले 2 केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और पुदुच्चेरी के मुख्यमंत्रियों को बैठक में आमंत्रित किया गया है।
 
बहरहाल कुछ सूत्रों ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने रविवार की बैठक में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। इसके पहले योजना आयोग प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच ज्यादातर बैठकों का आयोजन विज्ञान भवन मेंं कराता था। साथ ही अंतर राज्यीय परिषद की बैटक भी विज्ञान भवन में होती थी, जो केंद्र सरकार के कार्यक्रमों के आयोजन का दिल्ली में प्रमुख स्थल है। नवगठित नीति आयोग के प्रशासनिक परिषद की पहली और दूसरी बैठक प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7 रेस कोर्स रोड पर हुई थी। 
 
सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री 'सहकारी संघवाद' में विश्वास करते हैं, ऐसे में उनके साथ मुख्यमंत्रियों की इस तरह की बैठकों का स्थल ऐसा होना चाहिए, जहां 'गोलमेज' के प्रारूप में चर्चा हो सके और इससे संकेत मिले कि हर कोई बराबर के दर्जे में बैठकर बात कर रहा है। इसके विपरीत विज्ञान भवन के मुख्य कान्फ्रेंस हाल में इस तरह की बैठकों में प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्री मंचासीन होते थे और मुख्यमंत्री व अधिकारी दर्शक की तरह बैठते थे। मोदी जब 2001 और मई 2014 के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो विज्ञान भवन में होने वाली इस तरह की कई बैठकों में शामिल हुए थे। 
 
मौजूदा सरकार द्वारा इस स्थल का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है। नीति आयोग का पिछला डिजिधन पुरस्कार समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया था। साथ ही राष्ट्रीय विकास परिषद की भी बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई थी। नीति आयोग की प्रशासनिक परिषद में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में अगले 3 साल के लिए नए भारत के लिए दृष्टिपत्र पेश किया जाएगा। इसके साथ ही 15 साल के लिए देश का व्यापक खाका भी पेश किया जाएगा। 3 साल के रणनीतिक पत्र में तत्कालीन लक्ष्यों पर ध्यान होगा। यह पहला मौका है जब प्रशासनिक परिषद की बैठक राष्ट्रपति भवन में होने जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री चाहते थे कि ऐसा प्रेक्षागृह हो, जहां सभी लोग बराबरी में बैठें और मुख्यमंत्री अपनी बात रख सकें। 12वीं पंचवर्षीय योजना आखिरी योजना थी, जिसका काल 31 मार्च को खत्म हो गया और नेहरू काल की विरासत इसके साथ खत्म हो गई थी। सरकार ने योजना आयोग को भंग करने के साथ ही नीति आयोग का गठन किया था। इसके अलावा मोदी सरकार ने योजनागत और गैर योजनागत व्यय का वर्गीकरण भी खत्म कर दिया है। 
Keyword: narendra modi, development, CM,,
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