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पाकिस्तानी अदालत ने नवाज मामले में दिखाई चतुराई

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  April 21, 2017

यह एक विरला अदालती फैसला है, जिसमें हर किसी को संतुष्ट किया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ काले धन को सफेद करने और भ्रष्टाचार के आरोपों पर वहां के उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में चतुराई दिखाई है। उसने एक तरफ 'अपर्याप्त सबूतों' के आधार पर नवाज शरीफ को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने रहने की इजाजत दी, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक दल गठित करने का आदेश दे दिया। अदालत के दो शब्दों-'अपर्याप्त सबूत' से उत्साहित होकर पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के समर्थक लाहौर और इस्लामाबाद की गलियों में जश्न मनाने लगे। अदालत ने यह कहकर शरीफ को अपमानित भी किया कि पिछली जांच निष्पक्ष नहीं रहीं और संयुक्त जांच दल (जेआईटी) अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। इस सब पर शरीफ की बेटी मरियम ने अपनी प्रतिक्रिया में अल्लाह का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस परिवार को ज्यादा बुरा होने की आशंका थी।  

 
विपक्ष का मानना है कि उसके आरोप सही निकले हैं और वह कह रहा है कि नवाज शरीफ सरकार शक्ति विहीन हो गई है- अगर उसे थोड़ी बहुत शर्म है तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन शरीफ और उनके सलाहकारों को ऐसा कदम उठाने की कोई वजह नजर नहीं आ रही है क्योंकि देश की शीर्ष अदालत ने उन्हें पाकिस्तान की सत्ता चलाने का अधिकार दिया है। शरीफ को लेकर अदालत का फैसला बंटा हुआ था। तीन न्यायाधीशों में से दो का कहना था कि उन्हें अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। 
 
इस घटनाक्रम का पाकिस्तान और भारत पर क्या असर पड़ेगा? 
 
भले ही नवाज शरीफ का परिवार कुछ भी कहे, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वह कमजोर पड़े हैं। उच्चतम न्यायालय ने उनके लिए प्रधानमंत्री के रूप में अपनी ताकत का इस्तेमाल करने के लिए कई खिड़कियां खुली छोड़ी हैं। हालांकि आदेश में यह कहा गया है कि जेआईटी का अध्यक्ष संघीय जांच एजेंसी का अध्यक्ष कोई वरिष्ठ अधिकारी होनी चाहिए, जिसका पद अतिरिक्त महानिदेशक से नीचे नहीं हो । लेकिन यह व्यक्ति कौन होगा और उसे कौन नियुक्त करेगा, इसे लेकर आदेश में कुछ नहीं कहा गया है। इस तरह आदेश में प्रधानमंत्री कार्यालय को जांच अधिकारी को गारंटीशुदा रिपोर्ट देने के बदले सेवानिवृत्ति के बाद के आकर्षक सौदों की पेशकश से रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। अधिकारी को प्रभावित करने के कई रास्ते खुले छोड़ दिए गए हैं। इसी तरह समूह के अन्य सदस्यों को भी प्रभावित किया जा सकता है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के को-चेयरपर्सन आसिफ जरदारी इस ओर उंगली उठा रहे हैं। उन्होंने कहा है, 'प्रधानमंत्री के अधीनस्थ सरकारी कार्यालय किस तरह उनके और उनके परिवार के खिलाफ आरोपों की जांच कर सकते हैं?'
 
नवाज शरीफ के क्षेत्राधिकार में आने वाले अन्य मामलों पर अदालत के आदेश का कोई असर नहीं पड़ा है। चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) जैसे समझौतों पर बातचीत करने और इससे संबंधित बुनियादी ढांचे पर 54 अरब डॉलर खर्च करने जैसे फैसले लेने में वह शीर्ष पदाधिकारी बने रहेंगे। सीपीईसी का ज्यादातर बुनियादी ढांचा एक निजी कंपनी समूह द्वारा बनाया जाएगा और इसका भुगतान चीन और पाकिस्तान करेंगे। अगर सभी परियोजनाएं योजना के अनुसार लागू हुईं तो इन परियोजनाओं की कीमत पाकिस्तान में 1970 के बाद के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से आगे निकल जाएगी। 
 
सीपीईसी परियोजना से वर्ष 2015 से 2030 के बीच करीब 7 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने और पाकिस्तान की वृद्धि दर में 2.5 फीसदी इजाफा होने का अनुमान है। इन सब से शरीफ परिवार की तिजोरी में दौलत भी दिन दुगुनी रात चौगुनी बढ़ती जा रही है। पाकिस्तानी सेना पूरी तरह ऑपरेशन रद्द उल फसाद में जुटी हुई है, जिसका मकसद इस्लामिक सुधारवादियों और आतंकवादियों को अलग-अलग वर्गीकृत करना है। जानीमानी निवेेश बैंकिंग कंपनी एक्सोटिक्स हसनैन मलिक का आकलन है कि वर्ष 2017 की पहली तिमाही में आतंक से संबंधित मौत 40 फीसदी कम हुई हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएलएन) का संसदीय बहुमत इतना बड़ा है कि निचले सदन में सत्तारूढ़ पार्टी की सदस्य संख्या पूरे विपक्ष से भी ज्यादा है, इसलिए शरीफ को अपना प्रशासनिक एजेंडा लागू करने से कोई नहीं रोक सकता। पाकिस्तान में आम चुनाव वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में होने हैं, लेकिन जिस तरह वहां विपक्ष में बिखराव है, उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि अगर शरीफ समय से पहले आम चुनाव कराएंगे तो उन्हें फिर से जीत हाथ लगेगी। 
 
भारत के लिए क्या हैं मायने? 
 
कुलभूषण जाधव मामले से दोनों देेशों के बीच संबंधों में आई खटास जल्द से जल्द दूर की जानी जरूरी है। दोनों देशों के प्रधानमंत्री जून के पहले सप्ताह में कजाकिस्तान में होने वाली शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में मिलेंगे। इस बैठक में दोनों देश एससीओ के पूर्ण सदस्य बन जाएंगे। साफ है कि नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ हाथ मिलायेंगे, लेकिन क्या यह मुलाकात इससे आगे भी बढ़ेगी? और दोनों देशों की नौकरशाही कैसे पृष्ठभूमि तैयार करेगी? क्या लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद हबीब जहीर और जाधव की अदला-बदली होगी? 
 
हालांकि इस समय दोनों देश खुद के काम पर ध्यान दे रहे हैं। पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के आदेश (फरवरी में लिखा गया, लेकिन इस सप्ताह के प्रारंभ में पढ़ा गया) को लेकर कई सप्ताह तक चिंतित रहने के बाद शरीफ प्रशासन एक बार फिर काम में जुट गया है। शरीफ के इलाज के लिए लंदन जाने के बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही है। इस परिवार ने प्रभार संभाल लिया है और अब हम शक्ति और सत्ता के इस अंतहीन मनोरंजक उपमहाद्वीपीय नाटक का अगला चैप्टर देखेंगे, लेकिन दोनों देशों के लोगों को नुकसान की वजह से यह आनंददायक नहीं होगा। 
Keyword: pakistan, nawaz sharif, नवाज शरीफ,
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