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नियमों के नए मेन्यू से परेशान हुए रेस्तरां मालिक

करन चौधरी और संजीब मुखर्जी /  04 20, 2017

अदालती आदेश के बाद बड़ी तादाद में बंद हो रहे रेस्तरां और बार

कई कारोबारी इस कारोबार से निकलने की तलाश रहे हैं संभावना

होटल कारोबारी सुभाष गुप्ता का मानना है कि उन्हें इस व्यवसाय को फिर से शुरू करना पुराना लगता है, लेकिन उन्हें ऐसा करना होगा। 45 वर्षीय गुप्ता का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में आने वाले शराब दुकानों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के बाद उनके चार बार और रेस्तरां में ग्राहकों की आवक तेजी से घट गई। 

गुप्ता के रेस्तरां उत्तर प्रदेश के लगभग सभी राजमार्गों पर हैं और इनमें दो को बंद किया जा चुका है और तीसरे रेस्तरां को मेरठ में बंद किए जाने की बात की जा रही है। वह कहते हैं, 'सिर्फ 'भोजन' ही बिक्री नहीं तलाश सकता, इसके साथ शराब को भी बेचे जाने की जरूरत होगी। बंद हो चुके दो रेस्तरां में ग्राहकों की आवक घटकर 12 प्रतिशत रह गई थी। अब मैं व्यावसायिक तौर पर रेस्तरां चलाने के लिए लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं पूरी कोशिश करूंगा और इसे दुकान में तब्दील करूंगा और सिर्फ एक रेस्तरां चलाऊंगा।'

अपने बंद हो चुके दो रेस्तरां के लिए अभी तक कर्ज चुका रहे गुप्ता नुकसान से उबरने की कोशिश में लगे हुए हैं। पिछले 20 दिनों में पूरे देश में रेस्तरां मालिक विभिन्न घटनाक्रम और सरकारी नीतियों से प्रभावित हुए हैं। लाइसेंस के झंझट, सख्त नियमों और कानूनों से पहले ही दबाव महसूस कर रहे रेस्तरां उद्योग को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजमार्गों के पास शराब की बिक्री प्रतिबंधित किए जाने, आंशिक नियंत्रण और सेवा शुल्क वसूलने से रोके जाने जैसे बदलावों से इस उद्योग को बड़ा झटका लगा है।

कई कारोबारी इस कारोबार से निकलने की संभावना तलाश रहे हैं तो कई अन्य नई रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं और सेक्टर में हो रहे बदलावों के अनुरूप ढलने की कोशिश कर रहे हैं। फेडरेशन ऑफ होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) के उपाध्यक्ष गरीश ओबरॉय कहते हैं, 'हमें कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। बड़ी तादाद में होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं और कुछ बंद होने के कगार पर हैं। जो रेस्तरां किराए की परिसंपत्तियों से चलाए जाते हैं, वे जल्द ही लीज समझौते समाप्त करने के लिए बाध्य हो सकते हैं। कई लोगों ने हमसे पूछा है कि वे अपने रेस्तरांओं को वाणिज्यिक परिसंपत्तियों में किस तरह से तब्दील कर सकते हैं।'

हाल में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि रेस्तरां अपने ग्राहकों से सेवा शुल्क नहीं मांग सकते हैं। यह एक ऐसा निर्णय है जिसने उद्योग को मुनाफे के लिहाज से दबाव का सामना करना पड़ रहा है। रेस्टोरेंट चेन बार्सीलोस के विपणन प्रमुख रोहित मल्होत्रा ने कहा, 'कुछ वजहों से सरकार रेस्तरां उद्योग पर काफी सख्त बनी हुई है। सेवा शुल्क हमारे उद्योग का अहम हिस्सा है। इसका लाभ प्रत्यक्ष रूप से रेस्तरां के सभी सदस्यों को मिलता है। वहीं टिप्स भी सिर्फ वेटर तक सीमित नहीं हैं।' यह रेस्टोरेंट चेन शराब पर प्रतिबंध से प्रभावित हुई है और अपना एक रेस्तरां बंद कर रही है। बार्सीलोस ने हाई स्ट्रीट से अपने आउटलेटों को मॉल में स्थानांतरित किए जाने का भी निर्णय लिया है। रेस्तरां मालिकों के अनुसार विस्तार का उनका अगला चरण राजमार्गों से दूर होगा क्योंकि बार और शराब का ही उनके राजस्व में लगभग 65 प्रतिशत योगदान रहा है।
Keyword: restaurant, होटल कारोबारी,
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