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उम्मीद बरकरार

संपादकीय /  April 19, 2017

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि इस वर्ष मॉनसून सामान्य रहेगा। इससे आश्वस्ति पैदा हुई है। इससे पहले मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले निजी संस्थान कह चुके हैं कि आगामी मॉनसून के दौरान कमजोर वर्षा हो सकती है। देश के कृषि क्षेत्र को बेहतर मॉनसून की आवश्यकता है ताकि वह गत वर्ष के सुधार को आगे जारी रख सके। उससे पहले वर्ष 2014 और 2015 में हमें एक के बाद एक सूखे की स्थिति झेलनी पड़ी थी। वहीं वर्ष 2016 में नोटबंदी ने त्रस्त किया।

 
देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी भले ही घटकर 15 फीसदी से भी कम रह गई लेकिन अभी भी देश की बड़ी आबादी को पूरी तरह या आंशिक तौर पर अपने निबाह के लिए इसका सहारा लेना होता है। मॉनसून अगर सामान्य रहता है तो इससे कृषि उपज में सुधार होगा, महंगाई पर नियंत्रण हो सकेगा और ग्रामीण मांग में सुधार होगा। ये सारी बातें आर्थिक वृद्घि के लिए प्रेरक साबित होंगी। भूजल संसाधन बहुत तेजी से नष्टï हो रहे हैं, उनके बचाव और सूख रहे जलाशयों को भरने के लिए अच्छी बारिश बहुत आवश्यक है। इससे खेतों की सिंचाई आसान ही नहीं होती है बल्कि जलविद्युत उत्पादन में भी मदद मिलती है। बहरहाल यह आईएमडी का आरंभिक अनुमान है। कहीं अधिक अहम और बेहतर अनुमान जून के पहले सप्ताह में जारी किया जाएगा। 
 
यह सच है कि आईएमडी ने पूरे मौसम के दौरान औसतन 96 फीसदी वर्षा होने की उम्मीद जताई है जो निजी पूर्वानुमान लगाने वाली संस्था स्काईमेट के 95 फीसदी के अनुमान से बहुत अलग नहीं है। लेकिन आईएमडी ने मॉनसून को सामान्य बताया है जबकि निजी संस्थान का अनुमान सामान्य से कम का है। यह बड़ा अंतर है। इससे कारोबारी भावनाओं में सुधार होगा और समग्र आर्थिक दृष्टिïकोण भी बेहतर होगा। इतना ही नहीं असल बात यह है कि आईएमडी ने संकेत दिया है कि यह बारिश पूरे देश में फैली हुई होगी। यह स्काईमेट के अनुमान से उलट है जिसने कहा है कि पश्चिमी और प्रायद्वीपीय इलाकों में  बारिश सामान्य से कम होने की आशंका है। इसमें गुजरात, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। चूंकि इनमें से कई इलाके पिछले साल भी सूखे से ग्रस्त थे, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, ऐसे में यह अनुमान बहुत निराश करने वाला है। एक और वजह है जिसके चलते हमें थोड़ी प्रतीक्षा करनी चाहिए। चूंकि गत आठ में से सात साल के दौरान हम बारिश के अनुमान में चूके हैं इसलिए आईएमडी के दीर्घकालिक अनुमान बहुत अधिक भरोसेमंद नहीं माने जा सकते। 
 
बहरहाल, इस वर्ष के अनुमान सही होने की कुछ अच्छी वजह मौजूद हैं। मसलन यह आकलन बेहतर तरीके से किया गया है। इसके लिए अमेरिकी मौसम पूर्वानुमान मॉडल अपनाया गया है लेकिन उसे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाला भी गया है। ऐसे ही डायनामिक मॉडल अन्य देशों में भी आजमाये जा रहे हैं और उनके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इस नए मॉडल की मदद से आईएमडी के पुराने आंकड़ा आधारित मॉडल को बदला जाएगा जो सन 1980 के दशक के अंत से इस्तेमाल किया जा रहा है। परंतु इस वर्ष अगर ध्यान दिया जाए तो उस पुरानी शैली के पूर्वानुमान भी काफी हद तक डायनामिक मॉडल के अनुरूप ही रहे हैं। इसकी वजह से आईएमडी के मॉनसून संबंधी पूर्वानुमान की साख मजबूत हुई है। इसके अलावा आईएमडी ने अल नीनो की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया है। अल नीनो प्रभाव अक्सर दक्षिण पश्चिम मॉनसून को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करता रहा है। लेकिन उसने हिंद महासागर में तापमान क्षेत्र का भी ध्यान रखा है जो मॉनसून के लिए अनुकूल प्रतीत हो रहा है और अल नीनो की काट कर सकता है।
Keyword: monsoon, भारतीय मौसम विभाग,
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