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क्या बाजार पर दिखेगा संकट?

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली April 18, 2017

भारतीय मौसम विभाग ने साल 2017 (जून-सितंबर) में मॉनसून के सामान्य रहने की भविष्यवाणी की है और देश भर में बारिश का वितरण उचित रहेगा। विभाग के मुताबिक, मॉनसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की 96 फीसदी रहेगी, जिसमें पांच फीसदी की कमी या बढ़ोतरी हो सकती है। मॉनसून की भविष्यवाणी करने वाली निजी क्षेत्र की स्काईमेट ने हाल में अपने अनुमान में कहा था कि मॉनसून की बारिश सामान्य से कम यानी लंबी अवधि के औसत की 95 फीसदी रहेगी और इसने उत्तर भारत में भीषण गर्मी की चेतावनी भी दी है। 
 
ये भविष्यवाणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत में करीब 70 फीसदी बारिश इसी अवधि में होती है और इससे देश के कृषि क्षेत्र के आधे हिस्से की सिंचाई होती है और यह खरीफ की फसलों के लिए भी महत्वपूर्ण है। सामान्य से कमजोर मॉनसून से महंगाई बढ़ सकती है और देश के आर्थिक परिदृश्य पर इसका असर पड़ सकता है। इक्रा लिमिटेड की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, मॉनसून का असर और महंगाई के लिहाज से अन्य जोखिम मसलन वस्तु एवं सेवा कर कम से कम अगले कुछ महीने तक स्पष्ट नहीं होंगे। इसके अतिरिक्त कुल स्तर के लिहाज से बारिश का समय काफी महत्वपूर्ण होगा। मॉनसून की शुरुआत में काफी बारिश बुआई में मदद कर सकती है। हालांकि सीजन के दूसरे हिस्से में पर्याप्त बारिश उपज के लिए महत्वपूर्ण होगा।
 
ऐसे में बाजार इन घटनाक्रमों को कैसे देख सकता है? कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद विश्लेषकों का मानना है कि बाजार इसका पूरा असर देखने के लिए शायद इंतजार कर सकता है, जो कैलेंडर वर्ष 2017 की दूसरी छमाही में स्पष्ट होगा। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध व रणनीति प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, विगत में बाजार की प्रतिक्रिया सतत नहीं रही है। फंडामेंटल के लिहाज से सामान्य के कम बारिश का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। ऐसे परिदृश्य में सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। मॉनसून का अनुमान लगाना मुश्किल होता है और अभी अप्रैल का महीना चल रहा है। मुझे लगता है कि बाजार आगे इस पर प्रतिक्रिया जताएगा, जब आगामी महीनों में बारिश के विश्वसनीय आंकड़े सामने आएंगे।
 
मॉनसून के अलावा बाजार अन्य कारणों मसलन जीएसटी का क्रियान्वयन, देसी मोर्चे पर कंपनियों की आय और अमेरिका व यूरोजोन में होने वाली प्रगति, ब्रिटेन के चुनाव के नतीजे, भूराजनैतिक हालात, तेल की कीमत आदि पर प्रतिक्रिया जता सकता है, जो बाजार के सेंटिमेंट पर असर डालेंगे। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, लगातार दो साल बेहतर मॉनसून अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे होंगे और ग्रामीण इलाके में मांग बढ़ाएगा। अगर मॉनसून एलपीए का 90 फीसदी रहता है तो भी मेरा मानना है कि यह अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहतर रहेगा और बाजार इसे सकारात्मक रूप में ग्रहण करेगा। हालांकि कैलेंडर वर्ष 2017 में बाजार बेहतर रहा है और गिरावट के लिए किसी संकेत का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि बाजार ने मॉनसून का पहला अवरोध पार कर लिया है और कंपनियों की आय, जीएसटी के क्रियान्वयन व अन्य वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखेगा।
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