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बिना खाल चमड़ा उद्योग बेहाल

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ April 18, 2017

उत्तर प्रदेश में अवैध बूचडख़ानों पर प्रतिबंध लगने के बाद से राज्य के करीब 20,000 करोड़ रुपये के चमड़ा उद्योग पर जबरदस्त मार पड़ी है। फिलहाल इस उद्योग को कच्चा माल यानी चमड़े की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में हजारों अवैध बूचडख़ाने खासकर गैर-संगठित बंद कर दिए हैं। हालांकि मांस निर्यात करने वाले बूचडख़ाने अभी भी चल रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या अब कम होकर मात्र 45 रह गई है। ऐसे में इनके लिए राज्य भर की चमड़ा इकाइयों के लिए चमड़े की आपूर्ति करना आसान नहीं रह गया है। 
 
कानपुर और उन्नाव जिले की चमड़ा इकाइयों को कच्चे माल की आपूर्र्ति लगभग ठप हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आने पर अवैध बूचडख़ाने बंद करने का वादा किया था। राज्य में चमड़ा उद्योग की दयनीय स्थिति पर उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ (यूपीएलआईए) के पूर्व अध्यक्ष ताज आलम ने बिज़नेस स्टैंडर्ड ने कहा, 'चमड़ा विनिर्माण और निर्यात इकाइयों को कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने से इस उद्योग का कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक थम गया है। मांग-आपूर्ति में जबरदस्त असंतुलन है।'
 
आलम ने दावा किया कि आपूर्ति कम होने से पिछले कई हफ्तों के दौरान कच्चे माल की कीमतें भी 20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा, 'अगर ऐसी स्थिति बरकरार रही तो राज्य का चमड़ा उद्योग मौजूदा वित्त वर्ष के लक्ष्य का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं कर पाएगा। हम इस समय अपने खरीदारों से निर्यात मूल्य पर कोई मोल-भाव कर पाने की स्थिति में भी नहीं हैं।'
 
इस बीच चमड़ा निर्यात परिषद (सीएलई) के चेयरमैन जावेद इकबाल ने कहा कि बूचडख़ाने बंद होने से स्थानीय चमड़ा उद्योग का कारोबार 80 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, 'मोटे तौर पर कहें तो हमारा कारोबार ठप हो गया है। इससे भी बुरी बात यह है कि हालात सामान्य होने को लेकर स्थिति स्पष्टï नहीं है।' उन्होंने चमड़ा उद्योग गंगा नदी के किनारे दूर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर भी चिंता जताई। इकबाल ने कहा कि एक तो राज्य का चमड़ा उद्योग पहले से ही बेहाल है उस पर इकाइयां स्थानांतरित करने की मुहिम स्थिति और बिगाड़ देगी। उन्होंने कहा, 'हम उत्तर प्रदेश के बाहर से भी चमड़ा नहीं मंगा सकते हैं क्योंकि इसकी कुल आपूर्ति में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत तक है। राज्य में इतने बूचडख़ाने बंद होने के बाद सारे रास्ते बंद हो गए हैं।' 
 
हालांकि सीएलई के पूर्व क्षेत्रीय चेयरमैन आर के जालान ने दावा किया कि अगले 3-4 हफ्तों में चीजें सुधर जाएंगी। उन्होंने कहा, 'मुझे जहां तक जानकरी मिली है उसके अनुसार राज्य सरकार ने तय मानदंडों का पालन करने वाले बूचडख़ानों को नया लाइसेंस जारी करना शुरू कर दिया है। यह स्वीकार करना हमारे हित में है कि अब उत्तर प्रदेश में अवैध बूचडख़ाने काम नहीं कर पाएंगे।'
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