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सोना सस्ता होने के आसार

सुशील मिश्र / मुंबई April 17, 2017

रत्न एवं आभूषण कारोबार की चमक एक बार फिर वापस आती दिख रही है। सोना महंगा होने के बावजूद मांग में तेजी है। सोना आयात में अचानक तेजी पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। कुछ इसे नोटबंदी का असर मान रहे हैं जबकि सराफे इसकी वजह अच्छी फसल होने को बताते हैं। बाजार में आयात शुल्क में कटौती की अटकलें तेज हो गई हैं। जीएसटी के साथ आयात शुल्क में कटौती से सोना सस्ता होने का दौर शुरू होने का अनुमान लगाया जा रहा है।  
 
इस साल जनवरी की शुरुआत में सोना 27,840 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो इस समय 29,000 के पार चल रहा है। सोना महंगा होने के साथ इसका आयात भी तेजी से बढ़ा है। मंदी की मार झेल रहे आभूषण कारोबार में अप्रैल से दिसंबर तक 264 टन सोना आयात किया गया जबकि नोट बंदी के बाद 30 मार्च तक 360 टन सोना विदेश से मंगाया गया। अकेले मार्च महीने में 103 टन सोने का आयात हुआ और अप्रैल में अब तक आयात ऊंचे स्तर पर रहा है। 
 
इसी महीने अक्षय तृतीया होने की वजह से आभूषण कारोबारी सोने के आयात का ऑर्डर दे रहे हैं। आयात के हिसाब से निर्यात नहीं बढ़ रहा है जिसकी वजह आयात शुल्क को माना जा रहा है। ज्वैलर्स एसोसिएशन के कुमार जैन कहते हैं कि ग्रामीण इलाके में सोने की मांग बहुत अच्छी है। शादी विवाह का सीजन और अक्षय तृतीया होने की वजह से घरेलू मांग और तेज होगी। ऐसे में आयात शुल्क में कटौती होती है तो आभूषण कारोबार के अच्छे दिन आ जाएंगे। 
 
आयात शुल्क कम होगा तो सोना सस्ता होगा। आभूषण कारोबारियों का कहना है कि इस समय उनका कारोबार अच्छा है इसीलिए कुछ लोग बाजार में सोना सस्ता होने की अफवाह फैला रहे हैं, अगर ग्राहकों के मन में यह बात आ गई कि सोना सस्ता होने वाला है तो खरीदारी कमजोर हो जाएगी। रत्न एवं आभूषण कारोबारी संजय शाह कहते हैं कि सोना और आभूषण कारोबारी दबाव में हैं, उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। देश में 10 फीसदी आयात शुल्क पहले से ही लगा है। साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोने के आभूषणों के आयात पर पांच फीसदी शुल्क लगा दिया है, जिससे पश्चिम एशिया के रास्ते भारत से होने वाले गहनों के निर्यात पर असर पड़ा है। 
 
सोने पर आयात शुल्क होने की वजह से तस्करी का कारोबार चमक रहा है। सराफा कारोबार के जानकार हार्दिक हुंडिया कहते हैं कि सरकार अपनी आंखों में पट्टी बांधकर दूसरों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है। दरअसल देश में हर साल करीब 900-1000 टन सोने की खपत होती है और 2016-17 करीब 650 टन सोना आयात हुआ, ऐसे में साफ है कि बाकी करीब 350 टन सोना देश में तस्करी के रास्ते आया है। हर दिन हवाई अड्डे पर लोग सोने की तस्करी के मामले में पकड़े जाते हैं लेकिन बंदरगाह पर सोना क्यों नहीं पकड़ा जा रहा है जबकि सबको पता है कि हर शुक्रवार और शनिवार को सोना कंटेनरों में भरकर देश के प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचता है और इसके बाद देशभर में फैले तस्करों के एजेंट इनको सराफों के पास तक पहुंचाते हैं। तस्करी रोकने के लिए आयात शुल्क में कटौती करना ही सबसे सही रास्ता है। इसीलिए सरकार को आयात शुल्क में कमी करनी चाहिए। 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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