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रियल एस्टेट के शेयरों में उफान

राघवेंद्र कामत / मुंबई April 17, 2017

आज स्टॉक एक्सचेंजों पर रियल्टी के शेयर इस उम्मीद में चढ़े कि वाणिज्यिक रियल एस्टेट में निवेशकों की दिलचस्पी और बेंगलूरु, पुणे व हैदराबाद जैसे शहरों में वाणिज्यिक संपत्तियों की कम इन्वेंट्री, प्रमुख बाजारों में स्थिर किराए आदि से डेवलपरों को वाणिज्यिक परियोजनाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। इंडियाबुल्स रियल एस्टेट के शेयर 40 फीसदी, एचडीआईएल के शेयर 8.75 फीसदी, डीएलएफ के शेयर 8.08 फीसदी, गोदरेज प्रॉपर्टीज के शेयर 6.56 फीसदी, यूनिटेक के शेयर 6.37 फीसदी, ओमैक्स के शेयर 5.37 फीसदी, ओबेरॉय रियल्टी के शेयर 0.52 फीसदी चढ़े। कुछ और रियल्टी शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बीएसई रियल्टी इंडेक्स में 8.82 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 1875.70 पर पहुंच गया।
 
इंडियाबुल्स रियल एस्टेट बड़े वैश्विक फंडों से रकम जुटाने की प्रक्रिया में है। ब्लैकस्टोन, ब्रुकफील्ड, जीआईसी या सीपीपीआईबी बड़े वैश्विक फंड हैं और ये भारत में ऐसे मौके की तलाश कर रहे हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी। कंपनी ने आज कहा कि वह अपने वाणिज्यिक व पट्टा कारोबार इंडियाबुल्स कमर्शियल एसेट्स के दायरे में लाएगी और यह अलग होल्डिंग कंपनी होगी। यह रणनीतिक निवेश लाने के लिए हो रहा है। कंपनी ने यह जानकारी एक्सचेंजों को दी है। कंपनी का शेयर इस घोषणा के बाद आज बीएसई पर 40 फीसदी चढ़कर 148.15 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गया। कंपनी ने कहा कि पुनर्गठन के बाद नई वाणिज्यिक कंपनी की हैसियत 2,311 करोड़ रुपये की होगी और शुद्ध कर्ज 3,950 करोड़ रुपये की। इसे 2017-18 में एन्युटी राजस्व 692 करोड़ रुपये और 2020-21 तक 1,357 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है और पट्टे वाला इलाका तब तक 83.5 लाख वर्गफुट तक चला जाएगा।
 
इंडियाबुल्स रियल एस्टेट की हिस्सेदारी 14,000 करोड़ रुपये की अनुमानित रियल एस्टेट परिसंपत्तियों में 55 फीसदी है। इसमें मुंबई का वन इंडियाबुल सेंटर और इंडियाबुल्स फाइनैंस सेंटर शामिल है, जो इसके पोर्टफोलियो की कीमत का करीब आधा है। एक सूत्र ने कहा, कंपनी वैश्विक प्राइवेट इक्विटी निवेशकों को होल्डिंग कंपनी का 30 से 40 फीसदी हिस्सा दे सकती है। हालांकि कंपनी का रीट्स सिंगापुर में सूचीबद्ध है, लेकिन ये चीजें होल्डिंग कंपनी की हिस्सेदारी के विनिवेश में आड़े नहीं आएगी। कोशिशों के बाद भी कंपनी के प्रबंधन से इस बारे में जानकारी हासिल नहीं हो पाई।
 
हाल में देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ ने सिंगापुर की जीआईसी के साथ करार किया है, जिसके तहत किराया इकाई डीएलएफ साइबरसिटी डेवलपर्स की 40 फीसदी हिस्सेदारी बेची जानी है। वैश्विक पीई दिग्गज ब्लैकस्टोन भी हिस्सेदारी खरीद की दौड़ में थी। डीएलएफ ने सौदे की राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अनुमान है कि यह 10,000 करोड़ रुपये लेकर 12,000 करोड़ रुपये होगी।
 
अमेरिकी ब्लैकस्टोन ने मुंबई की रहेजा कॉर्प के साथ सौदा किया है, जिसके तहत उसकी वाणिज्यिक इकाई की 15 फीसदी हिस्सेदारी 1,600 करोड़ रुपये में ली है। साल 2014 के मध्य में इंडियाबुल्स के प्रवर्तकों ने कंपनी अलग-अलग कर दी थी। समीर गहलौत को जिन कंपनियों का नियंत्रण मिला उनमें इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, इंडियाबुल्स सिक्योरिटीज और इंडियाबुल्स होलसेल सर्विसेज शामिल हैं। अन्य प्रवर्तकों राही रतन और सारा मित्तल को सूचीबद्ध इंडियाबुल्स पावर और असूचीबद्ध इंडियाबुल्स इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड पावर मिला। ऐंजल ब्रोकिंग के वरिष्ठ इक्विटी शोध विश्लेषक अभिषेक लोहिया ने कहा, ज्यादातर बड़े वैश्विक निवेशकों ने भारत के पट्टा बाजार में भागीदारी को प्राथमिकता दी है क्योंकि खुदरा में मांग सुस्त है। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर, पुनर्खरीद,
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