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ऑनलाइन निवेश: बिना धोखाधड़ी बचत बड़ी

संजय कुमार सिंह /  April 16, 2017

यह उदाहरण देखिए: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की ई-टर्म पॉलिसी का सालाना प्रीमियम 23,861 रुपये है। लेकिन जीवन अमूल्य नाम की उसी पॉलिसी को यदि आप ऑफलाइन खरीदते हैं तो उसका सालाना प्रीमियम 38,640 रुपये होगा। इससे साफ है कि पॉलिसी को ऑनलाइन खरीदने में बड़ा फायदा होता है। लेकिन  बीमा कंपनियों द्वारा बेची जाने वाली कुल पॉलिसी में ऑनलाइन पॉलिसी का योगदान बहुत कम है। यदि व्यक्तिगत और  सामूहिक दोनों प्रकार के बीमा कारोबार को शामिल किया जाए तो 2015-16 में नए बिजनेस प्रीमियम में ऑनलाइन बिक्री का सिर्फ 0.22 फीसदी का योगदान रहा और व्यक्तिगत बीमा के कारोबार को ही गिना जाए तो योगदान 0.52 फीसदी रहा। (स्रोत: आईआरडीए की सालाना रिपोर्ट 2015-16)  स्वास्थ्य बीमा में ऑनलाइन बिक्री का योगदान कुल प्रीमियम का महज दो फीसदी रहा (स्रोत: हैंडबुक ऑफ इंडियन इंश्योरेंस स्टेटिस्टिक, 2015-16)। लेकिन कार्वी की एक ताजा रिपोर्ट पर यकीन करें तो उसके आंकड़ों के अनुसार म्युचुअल फंडों की बिक्री में मूल्य के हिसाब से ऑनलाइन बिक्री का योगदान महज 0.92 फीसदी रहा।

 
ऑनलाइन खरीदारी के ढेर सारे फायदे
 
ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते रुझान की एक मुख्य वजह खर्च में अच्छी खासी कमी है। अपना 50 प्रतिशत व्यवसाय ऑनलाइन करने वाली फर्म एगॉन लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य डिजिटल अधिकारी मार्टिन डी जोंग का कहना है, 'ग्राहकों को कीमत के मामले में 40 फीसदी तक की बचत हो सकती है।' बीमा एग्रीगेटरों की वेबसाइटों पर जाकर खरीदार पॉलिसी की विशेषताओं और कीमतों की तुलना कर सकते हैं। पॉलिसीबाजार डॉटकॉम की वरिष्ठï निदेशक अंजला धीर का कहना है, 'जब आप किसी ऑफलाइन एजेंट के जरिये पॉलिसी खरीदते हैं तो आपको सिर्फ वही जानकारी होती है जो आपको समझाई जाती है। आप बारीकियों से अच्छी तरह से वाकिफ नहीं होते हैं। जब आप इसे ऑनलाइन खरीदते हैं तो खरीदार बारीकियों पर गंभीरता से ध्यान देता है।'
 
प्रत्यक्ष रूप से म्युचुअल फंडों की बिक्री करने वाले कई प्लेटफॉर्म भी अपने ग्राहकों को एल्गो के जरिये सलाह (जिन्हें रोबो एडवाइजर्स के नाम से जाना जाता है) मुहैया कराते हैं, जिसके कई फायदे हैं। क्लियरफंड्ïस डॉटकॉम के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी कुणाल बजाज कहते हैं, 'ऑनलाइन परामर्श किसी खास स्थान तक ही सीमित नहीं होता।' क्लियरफंड्ïस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेशकों को प्रत्यक्ष रूप से फंडों की बिक्री करता है और यह सेबी के साथ पंजीकृत निवेश सलाहकार भी है। सलाहकारों के साथ सलाह की गुणवत्ता हर व्यक्ति के लिए अलग अलग हो सकती है। इसमें गलत बिक्री की भी अधिक आशंका रहती है। ऑनलाइन परामर्श के मामले में, चूंकि यह बड़े डेटा एल्गोरिदम और वैश्विक रूप से श्रेष्ठï कार्य प्रणालियों पर आधारित होती है, इसलिए सलाह की गुणवत्ता असमान होने की आशंका रहती है। ऑनलाइन परामर्श महंगा भी है। जहां कुछ प्लेटफॉर्म मुफ्त में परामर्श मुहैया कराते हैं जबकि अन्य प्लेटफॉर्म छोटी रकम वसूलते हैं। वे आपको म्युचुअल फंडों के डायरेक्ट प्लान में निवेश की भी अनुमति देते हैं। ट्रेल कमीशन का अभाव आपकी सेवानिवृति रकम में भारी अंतर ला सकता है।
 
कमजोर पैठ
 
एसबीआई लाइफ के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी अरिजित बसु ने हाल में आयोजित बिजनेस स्टैंडर्ड राउंड टेबल में कहा कि ऑनलाइन चैनल के संदर्भ में वे यह महसूस करते हैं कि बिक्री किसी वेब एग्रीगेटर, सोशल मीडिया चैनल जैसे वितरक या गूगल के साथ करार करने की उनकी क्षमता से संबंधित थी जिससे उनके उत्पाद बिक्री के लिहाज से अच्छी स्थिति में होते हैं। 
 
वेब एग्रीगेटरों का कहना है कि जीवन बीमा के मामले में, एंडाउमेंट जैसे जटिल उत्पादों का दबदबा है। धीर कहती हैं, 'एंडाउमेंट योजनाएं मुख्य रूप से कंपनियों द्वारा ऑफलाइन चैनल द्वारा बेची जाती हैं।' सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज एलआईसी का मौजूदा समय में ऑनलाइन के जरिये कम बिक्री आधार है। धीर कहती हैं, 'टर्म और सस्ती यूलिप जैसी सामान्य पॉलिसी के मामले में, ऑनलाइन चैनल का योगदान कुल बिक्री में 75-80 प्रतिशत का है।' मोटर बीमा में, जब लोग नई कार खरीदते हैं तो वे सामान्य तौर पर डीलर से बीमा पॉलिसी भी ऑफलाइन चैनल के जरिये खरीदते हैं। 
 
कुछ विश्लेषक ऑनलाइन की कम पैठ के लिए पारंपरिक तौर-तरीकों में बदलाव से जुड़ी दिक्कतों को भी जिम्मेदार मानते हैं। लोगों ने अतीत में किसी जान-पहचान वाले एजेंट या ब्रोकर के जरिये बीमा पॉलिसी खरीदी। पॉलिसीएक्स डॉटकॉम के मुख्य कार्याधिकारी एवं संस्थापक नवल गोयल ने कहा, 'ऑनलाइन चैनल में इंसानी तत्व की अनुपस्थिति एक मुख्य समस्या है। वहीं ऑनलाइन खरीदारी के लाभ के बारे में जागरूकता का अभाव भी एक अहम कारक है। प्रक्रिया को सुगम बनाने की राह में पैदा होने वाली समस्या तीसरा अहम कारक हो सकती है।'
 
इस पर गौर कीजिए कि भारतीय सिर्फ पिछले तीन साल से ही ऑनलाइन पर लेनदेन को सहज महसूस कर रहे हैं। कई ई-कॉमर्स कंपनियां 10 साल से ऑनलाइन कारोबार में मौजूद हैं, लेकिन पिछले पांच साल में इसमें अच्छी खासी तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे लेकर आशान्वित हैं कि ऑनलाइन माध्यम के साथ सहजता बढ़ी है और लोग अपने वित्तीय लेनदेन ऑनलाइन पर करना पसंद करेंगे। धीर का कहना है, 'स्वास्थ्य, मोटर पॉलिसी आदि सिर्फ पांच साल से ही ऑनलाइन पर उपलब्ध हैं। लेकिन उनकी ऑनलाइन बिक्री सालाना आधार पर तेजी से बढ़ रही है।' वह कहती हैं कि डीलर से अपनी पहली मोटर बीमा पॉलिसी खरीदने वाले ज्यादातर लोग अगले साल से ऑनलाइन पर इसकी खरीदारी करेंगे। सरकार द्वारा डिजिटल अभियान पर जोर दिए जाने से भी ऑनलाइन बीमा योजनाओं की बिक्री में ठीकठाक तेजी आने की संभावना है। दिसंबर 2016 में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की वेबसाइटों के जरिये नई पॉलिसी ऑनलाइन खरीदने पर सामान्य बीमा में 10 प्रतिशत और जीवन बीमा में 8 प्रतिशत छूट की घोषणा की थी। जाज का कहना है, 'कुछ वर्ष पहले तक एक बड़ी दिक्कत थी सामान्य केवाईसी का अभाव। केंद्रीकृत केवाईसी प्रक्रिया की शुरुआत के साथ, शुरू में केआरए (केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों) और अब सीकेवाईसी (इस साल फरवरी में पेश) के जरिये और आधार-आधारित केवाईसी से खाता खोलने की प्रक्रिया तेज हुई है।' 
 
याद रखें
 
वित्तीय रूप से जानकार ग्राहक स्वयं शोध कर सकते हैं और श्रेष्ठï वित्तीय योजनाओं में ऑनलाइन के जरिये निवेश कर सकते हैं। वित्तीय रूप से कम जानकार निवेशकों को सेबी-पंजीकृत किसरी निवेश अधिकारी की सलाह लेनी चाहिए और फिर ऑनलाइन खरीदारी करनी चाहिए। यह याद रखने की जरूरज है कि निवेश के वक्त सिर्फ कीमत पर ही ध्यान केंद्रित न करें। जोंग के अनुसार, 'विभिन्न पॉलिसी की तुलना करते वक्त न सिर्फ कीमत पर ध्यान दें बल्कि संंबंधित विशेषताओं पर भी विचार करें। चिकित्सा बीमा जैसी योजनाओं के मामले में सही जानकारी दें जिससे दावे के समय समस्याओं से बचा जा सके।' 
Keyword: investment, online, LIC,,
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