बिजनेस स्टैंडर्ड - कपड़ा निर्यातकों को पड़ रही मार
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कपड़ा निर्यातकों को पड़ रही मार

विनय उमरजी और टी ई नरसिम्हन /  April 16, 2017

अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 2017 में रुपये में आई 5 प्रतिशत से अधिक तेजी से विभिन्न स्तरों पर कपड़ा निर्यातकों को बुरी चोट पड़ी है। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत से कपड़ा एवं परिधान निर्यात को बांग्लादेश, वियतनाम और चीन से कड़ी टक्कर मिल रही है। इन हालात के बाद पिछले कुछ सालों से भारत से कपड़ा निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ा है।

 
बिजनेस स्टैंडर्ड ने रुपये में मजबूती के असर का प्रभाव जानने के लिए जिन कंपनियों से बात की उनमें कुछ ने उनके कारोबार पर पडऩे वाले असर पर टिप्पणी से इनकार कर दिया जबकि कुछ ने कहा कि उनके कारोबार पर नकारात्मक असर हुआ है। हालांकि वे मानते हैं कि यह असर अस्थायी रहेगा लेकिन उन्हें इस बात का भी डर हैं कि हालात ऐसे बने रहे तो उनका मार्जिन और कम हो जाएगा।
 
 बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर सूचीबद्ध कंपनी इंडो रामा सिन्थेटिक्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ओ पी लोहिया कहते हैं, 'मुनाके पर असर जरूर पड़ा है। हालांकि यह असर अस्थायी लग रहा है, इसलिए हम इसकी भरपाई करने में सक्षम होंगे। तत्काल असर के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। रुपये में तेजी कुछ समय तक बरकरार रहने के बाद ही हम कारोबार पर असर का मूल्यांकन कर पाने की स्थिति में होंगे।'
 
कंपनी के सालाना 2,100 करोड़ रुपये राजस्व में निर्यात का योगदान तकरीबन 20 प्रतिशत है। चीन से मिल रही कड़ी टक्करी के बीच रुपये में तेजी से ऊन, रेशे और वस्त आयात सस्ते हो जाएंगे, जिनसे घरेलू उत्पादक के कारोबार प्रभावित होंगे। कपड़ा एवं परिधान उद्योग करीब 50 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात करता है, जिनमें करीब 70 प्रतिशत डॉलर में होते हैं। चीन, वियतनाम और बांग्लादेश में वहां की मुद्राएं कमजोर रहने से भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
 
सबसे अधिक असर परिधान उद्योग पर होगा, जिनके कुल 17 अरब डॉलर निर्यात में अब तक शायद ही तेजी आई है। इतना ही नहीं, परिधान निर्यात में मार्जिन डॉलर में 2-4 प्रतिशत रहता है। इस उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से कारोबार फायदेमंद नहीं रह गया है। क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राहुल मेहता कहते हैं, 'हमारा निर्यात प्रतिस्पद्र्धी नहीं रह गया है वहीं बांग्लादेश और अन्य देशों से आयात सस्ता हो गया है। इससे घरेलू उद्योग पर जबरदस्त दबाव पड़ा है। कुछ कारोबारियों ने हेजिंग जरूर की है लेकिन अगले एक महीने या कुछ अधिक समय में राजस्व पर और अधिक पड़ सकता है।'
Keyword: textiles, कपड़ा निर्यातकों,
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