Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Wednesday, April 26, 2017 05:20 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम खबर

जीएसटी : मुनाफाखोरी रोकना होगा जरूरी

शुभायन चक्रवर्ती और सुदीप्त दे /  April 16, 2017

मलेशिया में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को लागू हुए दो साल हो गए हैं। भारत जीएसटी लागू करने की तैयारी में है। हाल में भारत आए मलेशिया के के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उद्योग मंत्री मुस्तफा मोहम्मद ने अपने यहां के जीएसटी अनुभवों को शुभायन चक्रवर्ती और सुदीप्त दे के साथ साझा किया। पेश हैं बातचीत के संपादित अंश:

 
भारत जीएसटी लागू करने की तैयारी में है। क्या मलेशिया के अनुभव से भारत कुछ सीख सकता है?
 
पहली बात यह है कि जनता के साथ जुड़ाव का मामला है। दूसरी यह कि जीएसटी लोगों के बीच अलोकप्रिय हो गया क्योंकि कुछ वर्गों ने इसका लाभ उठाते हुए कीमतें बढ़ा दीं। इसलिए हमें मुनाफाखोरी रोकने के उपाय करने पड़े। जनता चाहती थी कि सरकार उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे जिन्होंने व्यवस्था का लाभ उठाया। जीएसटी के साथ महंगाई बढऩे का खतरा है लेकिन यही इसकी एक खामी है।
 
नई कर प्रणाली के लिए तैयार होने में मलेशिया के उद्योग जगत को कितना समय लगा?
 
हमारे यहां वर्षों पहले जीएसटी की कल्पना की गई थी। इसलिए उद्योग जगत के पास इसके लिए पर्याप्त समय था। दरों की घोषणा होने के बाद उद्योग को जीएसटी की तैयारी करने के लिए कम से कम 18 महीने का समय मिला। संभव है कि जीएसटी लागू करने से हमें कुछ राजनीतिक नुकसान हुआ लेकिन हमारे प्रधानमंत्री साहसिक थे। हम जीएसटी लागू न करके लोकलुभावन कदम उठा सकते थे लेकिन हमने भविष्य को ध्यान में रखते हुए सही कदम उठाया। 
 
क्या जीएसटी के कारण सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई?
 
हां, ऐसा हुआ। पहले अनौपचारिक क्षेत्र और काला धन इस्तेमाल करने लोग कर नहीं देते थे। जीएसटी के कारण उद्यमियों पर अनुशासन का डंडा चला और उन्होंने अपना हिसाब किताब ठीक किया। फिर भी कुछ लोग हर चीज के लिए जीएसटी को दोष देते हैं। हमें जीएसटी लागू किए हुए दो साल हो गए हैं और अभी इसका काम खत्म नहीं हुआ है। जीएसटी के बिना हम गंभीर संकट में पड़ जाते। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में कमी आई है। तेल से हमारा राजस्व बहुत घट गया है। हमारे प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं कि जीएसटी ने हमें एक चुनौतीपूर्ण राजकोषीय स्थिति से बचा लिया। लेकिन लोगों को यह पसंद नहीं है। लोगों को जीएसटी के बारे में जागरूक और शिक्षित बनाना मुश्किल है लेकिन यह जरूरी है। 
 
मलेशिया के प्रधानमंत्री क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) पर बहुत जोर दे रहे हैं। इस वार्ता के इस साल के अंत तक या अगले साल के शुरू तक पूरा होने की कितनी संभावना है?
 
पहली बात यह है कि केवल मलेशिया या आसियान देश ही नहीं बल्कि हम सभी इसके लिए प्रतिबद्घ हैं। 16 से ज्यादा देश लगातार वार्ता कर रहे हैं। यह एक अहम समझौता है इसलिए अब दुनिया के कई कोनों से संरक्षणवादी आवाजें सुनाई दे रही हैं। दूसरी बात यह है कि हम पिछले कई वर्षों में 17 बार मिल चुके हैं। तीन-बार तो मंत्री स्तर की वार्ता हो चुकी है। जब भारत और मलेशिया के के प्रधानमंत्री मिले तो उन्होंने भी इस पर चर्चा की। तीसरी बात यह है कि हम जानते हैं कि यह प्रशांत के आरपार साझेदारी के अभाव में यह बहुत बड़ा व्यापारिक समझौता होने जा रहा है। आरसीईपी बहुत व्यापक और समावेशी है और भारत तथा चीन भी शामिल हैं। यह सही है कि हमें इस पर मतभेदों को दूर करना होगा। इस पर हमारा अपना रुख है जबकि आसियान और भारत के अपने मुद्दे हैं। इस बारे में अगली मंत्रीस्तरीय बैठक मई में होनी है। इस दौरान हमें देखना होगा कि वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है। हम सभी की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे लेकिन यह एक परिपूर्ण समझौता नहीं हो सकता और हमें इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा। हमारे पास समय बहुत कम है लेकिन सभी प्रमुख देशों की प्रतिबद्घता को देखते हुए यह कठिन जरूरत है लेकिन व्यावहारिक है।
 
ऐसी स्थिति में मलेशिया अंतिम समझौते में सेवा व्यापार को शामिल करने की भारत की मांग को लेकर कितना सहज है?
 
सेवाओं को लेकर कुछ प्रस्ताव हैं। हम जानते हैं कि सेवा क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत है और उसने इस संबंध में वस्तुओं पर कुछ छूट भी दी है। आसियान देशों में यह मुश्किल है क्योंकि सेवाओं को लेकर उनमें भारी मतभेद है। शायद कोई बीच का रास्ता निकल सकता है। मलेशिया सेवाओं पर हो रही वार्ता की अध्यक्षता कर रहा है और हम इस मुद्दे की अच्छी समझ रखते हैं। कई प्रस्ताव और बीच के रास्ते विचाराधीन हैं। फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि इन पर बात नहीं बन पा रही है। इसलिए हमें उन पर फिर से विचार करना होगा। हम जानते हैं कि इस पर भारत का रुख बेहद आक्रामक है। हम यह भी जानते हैं कि आसीईपी के कुछ देश इसके लिए अपने रुख से समझौता कर रहे हैं।
 
आखिरकार इससे वस्तुओं के टैरिफ को लेकर किस तरह का तरीका हासिल किया जा सकता है?
 
इस पर बहुत चर्चा हुई है और यह अधिक से अधिक उदार होगा। वस्तुओं के टैरिफ पर हम समझौते के बहुत करीब पहुंच गए हैं लेकिन अभी तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। यह कहना सही होगा कि सेवाओं के मुकाबले वस्तुओं पर ज्यादा प्रगति हुई है।
 
क्या मलेशिया पाम ऑयल और कच्चे तेल के अलावा भारत को अन्य चीजों के निर्यात की संभावना तलाश रहा है? भारतीय पाम तेल उत्पादकों का आरोप है कि मलेशियाई उत्पादक भारतीय बाजार में सस्ता तेल भेज रहे हैं?
 
निर्यात निजी क्षेत्र का मामला है लेकिन हम भारत को निर्यात बढ़ाने के इच्छुक हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या चाहते हैं और हम क्या बनाते हैं। यह मांग और आपूर्ति का सवाल है। भारत के साथ हमारे व्यापार में पाम ऑयल अहम चीज है। इसके अलावा हम भारत को बिजली उपकरणों और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का भी निर्यात करते हैं। हमारे कुल व्यापार में इन वस्तुओं की भागीदारी करीब 60 फीसदी है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Impact of Network performance on loyalty of smartphone users
   Impact of connected mobile devices on consumer video needs
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
E-DINAR: The startup of the year 2016. Click to know more
E-DINAR - a new generation of P2P exchange
  आपका मत
 क्या जीएसटी में मिले स्थानीय उद्योगों को कर रियायत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.