बिजनेस स्टैंडर्ड - इस्पात लक्ष्य के लिए काफी अहम है ब्राउनफील्ड
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 25, 2017 11:27 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम निवेश खबर

इस्पात लक्ष्य के लिए काफी अहम है ब्राउनफील्ड

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता April 14, 2017

पुराने संयंत्रों को खरीदकर उन्हें विकसित करने में भारत के शीर्ष इस्पात निर्माताओं की क्षमता में अहम योगदान है। पिछले दशक में सेल, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील समेत भारत की प्रमुख इस्पात निर्माता कंपनियों ने अपनी मौजूदा भूमि परिसंपत्तियों के विस्तार के जरिये 1.67 करोड़ टन की क्षमता हासिल की और इस अवधि के दौरान देश की कुल क्षमता वृद्घि में इसका योगदान 21 फीसदी का रहा।

 
यदि 30 करोड़ टन की इस्पात क्षमता हासिल करने के लिए भारत में 91,000 एकड़ भूमि की जरूरत है तो ग्रीनफील्ड (उत्पादन या विस्तार के लिए नई इकाई की स्थापना) के तहत उद्योग के लिए ब्राउनफील्ड पर विचार करना महत्त्वपूर्ण होगा। इन कंपनियों के लिए ज्यादातर वृद्घि भविष्य मेंं भी ब्राउनफील्ड विस्तार के जरिये हासिल होगी। जेएसडब्ल्यू स्टील ने सात वर्षों में 80 लाख टन क्षमता जोड़ी, टाटा स्टील ने लगभग 32 लाख टन और सार्वजनिक क्षेत्र की सेल ने 55 लाख टन क्षमता हासिल की। हालांकि टाटा स्टील जमशेदपुर में अन्य 10 लाख टन क्षमता के विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी पहले ही हासिल कर चुकी है जिससे उसकी कुल क्षमता बढ़कर 1.1 करेाड़ टन हो जाएगी।
 
जेएसडब्लयू स्टील में कॉमर्स एंड मार्केटिंग के निदेशक जयंत आचार्य ने कहा कि कंपनी के विजयनगर संयंत्र में क्षमता फिलहाल 1.2 करोड़ टन है और इसे बढ़ाकर 1.6 या 2 करोड़ टन किया जा सकेगा। जेएसडब्ल्यू ने वर्ष 2025 तक 4 करोड़ टन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। आचार्य ने कहा, 'नई एक करोड़ टन की क्षमता विजयनगर और डोल्वी संयंत्रों से प्राप्त होगी। अन्य 2-3 करोड़ टन या तो ग्रीनफील्ड से या मुख्य तौर पर अधिग्रहणों के जरिये हासिल हो सकती है।' जेएसडब्ल्यू की मौजूदा समय में इस्पात क्षमता 1.8 करोड़ टन पर है। 
टाटा स्टील ने हाल में कलिंगनगर में ग्रीनफील्ड संयंत्र स्थापित किया है। उसकी पहले चरण की क्षमता 30 लाख टन होगी। टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (स्टील मार्केट एंड सेल्स) पीयूष गुप्ता ने कहा कि कलिंगनगर में क्षमता सुधार उम्मीद की तुलना में बेहतर है। उन्होंने कहा, 'कलिंगनगर से उत्पादन में तेजी की वजह से टाटा स्टील को बड़ी मदद मिली है।' 
 
दूसरे चरण में, टाटा स्टील कलिंगनगर में क्षमता बढ़ाकर 50 लाख टन कर सकती है और भविष्य में इसे बढ़ाकर 1.6 करोड़ टन तक किए जाने की योजना है। जमशेदपुर और कलिंगनगर में टाटा स्टील की क्षमता 1.3 करोड़ टन है। सेल ने पिछले दशक के दौरान अपनी क्षमता में लगभग 55 लाख टन तक का इजाफा किया है। यह वृद्घि के अगले चरण के बीच में है और वर्ष 2018-19 तक क्षमता बढ़ाकर 2.2 करोड़ टन की जाएगी जो मौजूदा समय में 1.9 करोड़ टन के स्तर पर है। यह सब ब्राउनफील्ड रूट के जरिये संभव होगा। दीर्घावधि लक्ष्य है क्षमता बढ़ाकर 5 करोड़ टन करना। 
 
ब्राउनफील्ड विस्तार के कई फायदे हैं। इंडियन स्टील एसोसिएशन के महासचिव सनक मिश्रा के अनुसार पिछले दशक में 60 प्रतिशत क्षमता वृद्घि ब्राउनफील्ड रूट के जरिये की गई। भूमि मुद्दों को आसान बनाए जाने के साथ साथ ब्राउनफील्ड रूट में लागत ढांचा भी अपेक्षाकृत कम है और मंजूरियां जल्द मिल जाती हैं। फिर भी, ब्राउनफील्ड के जरिये भारत के 30 करोड़ टन के लक्ष्य पर पहुंचने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
 
उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है, 'ब्राउनफील्ड की अपनी सीमाएं होंगी। इसलिए जहां ग्रीनफील्ड का कम अनुपात हो सकता है, वहीं बड़ी कंपनियां ग्रीनफील्ड को लेकर पीछे हट सकती हैं। इसके अलावा, ब्राउनफील्ड के लिए भूमि का अधिग्रहण कई कंपनियों द्वारा किया जा सकता है। इसलिए प्रतिस्पर्धी कीमत पर भूमि हासिल करना एक प्रमुख शर्त बनी रहेगी। 30 करोड़ टन का लक्ष्य पर्यावरण, निवेश लागत और अन्य समस्याओं की वजह से एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।' औसत आधार पर 1991 से क्षमता वृद्घि की दर 40 लाख टन सालाना रही है। 13 वर्षों में 18 करोड़ टन क्षमता वृद्घि हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मौजूदा कुल क्षमता 12.2 करोड़ टन है। 
 
आईसीआरए के वरिष्ठï उपाध्यक्ष जयंत रॉय का कहना है कि भूमि से जुड़ी समस्याओं के अलावाा कंपनियों द्वारा क्षमता वृद्घि के लिए जरूरी कोष की व्यवस्था, निरंतर आधार पर जरूरी मांग में विफल रहना और इस क्षमता के लिए परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचा बढ़ाने की राह में पैदा होने वाली चुनौतियां भी अहम हैं। हालांकि गुप्ता अतिरिक्त क्षमता की बाजार खपत को लेकर आशान्वित हैं, भले ही अप्रैल से फरवरी के दौरान खपत वृद्घि 3.4 फीसदी पर रही हो। 
Keyword: steel, company, इस्पात, न्यूनतम आयात मूल्य, एमआईपी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अस्पतालों के शुल्क पर लगना चाहिए अंकुश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.