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एमएमटीसी चाहे पुराना सोना

दिलीप कुमार झा / मुंबई April 14, 2017

कच्चे सोने के आयात में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि कच्चे माल की अपनी जरूरत पूरी करने के लिए एलबीएमए (लंदन बुलियन मार्केट्स एसोसिएशन) से मान्यता प्राप्त भारत की एकमात्र रिफाइनरी एमएमटीसी पैम्प ने अपना ध्यान पुराने घरेलू सोने के संग्रह पर केंद्रित कर दिया है। सरकारी स्वामित्व वाली एमएमटीसी और स्विट्जरलैंड स्थित पैंम्प एसए (विश्व की अग्रणी सराफा रिफाइनरी) के संयुक्त उद्यम वाली इस कंपनी ने पुराने सोने का संग्रह करने के लिए प्रमुख शहरों में 10 केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में पुराने गहनों के सोने की गुणवत्ता परखने वाले यंत्रोपकरण और जांच करनी वाली मशीने हैं। इन संग्रह केंद्रों ने इस वित्त वर्ष में अब तक पुराने सोने के जरिये तीन टन सोने का इजाफा करते हुए एमएमटीसी पैम्प की मदद की है।
 
यह कदम इस दृष्टिï से भी महत्त्वपूर्ण है कि नवंबर 2015 में जारी सरकार की स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) में अब तक 6.4 टन सोने का ही संग्रह हुआ है। सरकार ने जीएमएस को सफल बनाने के लिए बैंकों की हजारों शाखाओं को इस कार्य में लगाया है। लेकिन इसके बावजूद इस योजना में करीब छह टन सोने का ही संग्रह हो पाया है और इसमें से भी ज्यादातर सोना मंदिरों से ही आया है। इस दृषिट से एमएमटीसी पैम्प में हुए तीन टन के इस इजाफे को भारी सफलता माना जा सकता है क्योंकि कंपनी ने प्रमुख शहरों में स्थित अपने10 केंद्रों में कुछेक दर्जन कर्मचारी ही लगाए हुए हैं।
 
भारत का पुराने सोने का बड़ा बाजार है। वैसे तो पुराने सोने को नए गहनों में तब्दील कर दिया जाता है लेकिन सामान्य रूप में पुराने गहनों को फिर से छड़ों के रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है। चूंकि कच्चे सोने के आयात में गिरावट आ रही है इसलिए पुराने सोने का शोधन एक अच्छे कारोबार के रूप में उभर रहा है। एमएमटीसी पैम्प के प्रबंध निदेशक राजेश खोसला ने कहा, 'दुनिया भर में कच्चे सोने की किल्लत है क्योंकि विश्वसनीय खनिक आमतौर पर बेहतर शोधकों के साथ सौदा करते हैं। (इसका अर्थ यह है कि इन रिफाइनरियों द्वारा उत्पादित सोने को सही समझा जाता है और उनके उत्पाद दुनिया भर में स्वीकृत किए जाते हैं।) हालांकि दुनिया भर के खनिक भारत में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, फिर भी जिन खनिकों के साथ हम सौदे करते हैं वे भारत में बहुत कम मात्रा में कच्चा सोना बेचते हैं। इसलिए हमने घरेलू स्रोतों से पुराने गहनों को एकत्रित करना शुरू कर दिया है। हमारी योजना भविष्य में इसे और बढ़ाने की है।' आयातित कच्चे सोने पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एमएमटीसी की योजना पुराने सोने का संग्रह करने के लिए हर साल कम से कम पांच नए संग्रह केंद्र स्थापित करने की है। इसी के साथ कंपनी कच्चे माल के अपने स्थानीय स्रोतों में भी इजाफा करेगी। इसका मानना है कि इनकी निरंतरता बनी रहेगी।
 
खोसला ने कहा कि हमने अनुमान लगाया है कि भारतीय घर-परिवारों में 25,000 टन सोना है। इसमें से पुराने सोने के रूप में हमारा लक्ष्य इसके एक फीसदी यानी 250 टन पर ही है। अगर हम टूटे हुए गहनों के तौर पर इस्तेमाल किए जा चुके 10 प्रतिशत गहनों को ही लक्ष्य बनाएं तो हम हर साल 25 टन प्राप्त कर लेंगे। हम उपभोक्ताओं से ऐसे टूटे हुए गहनों को देने के लिए कह रहे हैं जिनका उनके लिए कोई इस्तेमाल नहीं है। एमएमटीसी कच्चे माल की आपूर्ति पर ध्यान देते हुए फिलहाल स्थापित क्षमता के आधे भाग का परिचालन कर रही है। उधर घरेलू स्तर पर पुराने गहनों के जरिये सोने में सुधार के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ताओं को 2.75 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर पर कीमती गहनों की बिक्री प्रोत्साहित करने में जीएमएस असफल रही है।
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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