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कच्चे तेल और रूबल की अस्थिरता का असर एक्सचेंज उद्योग पर

राजेश भयानी / मुंबई April 14, 2017

सौदों के अनुबंधों की संख्या के रूप में इजाफा दिखाने के बावजूद भारत का सबसे बड़ा जिंस एक्सचेंज एमसीएक्स अपनी वैश्विक रैंकिंग के लिए जूझ रहा है, जबकि रूस के मॉस्को एक्सचेंज ने कच्चे तेल के व्यापार में इजाफा दिखाया है। यही नहीं, बल्कि करेंसी के व्यापार में लगातार बढ़ोतरी की वजह से मॉस्को एक्सचेंज ने अब उस यूरेक्स को भी पीछे छोड़ दिया है जो यूरोप में सबसे बड़ा एक्सचेंज हुआ करता था।  
 
दो हफ्ते पहले फ्यूचर्स इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट 2016 में एक्सचेंज उद्योग की कुल रैंकिंग दिखाती है। इसके अनुसार जिंस एक्सचेंजों में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पिछले साल की संख्या छह से सात पर आ गया है और नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) पिछले साल की संख्या नौ से 10 पर आ गया है।
 
हालांकि एनसीडीईएक्स की रैंकिंग के अनुबंधों के सौदों में तेज गिरावट आई है लेकिन इसके पीछे अपनी वजह है। 2016 के दौरान इस पर दो प्रमुख जिंस अरंडी और चने के सौद स्थगित कर दिए गए थे जबकि एक्सचेंज में इन दोनों के सादों के बड़े स्तर पर अनुबंध होते थे। मॉस्को एक्सचेंज की वृद्धि पर अपनी रिपोर्ट में फ्यूचर्स इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कहा है कि इसके कच्चे तेल के अनुबंध का आकार आईसीई के 1,000 बैरल के अनुबंध की तुलना में मात्र 10 बैरल पर आधारित है। यह खुदरा व्यापारियों के लिए ज्यादा सुगम हो जाता है लेकिन हेज कीमत पर जोखिम उठाने वाली कॉरपोरेट कंपनियों के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं रहता है। स्पष्टï रुचि के आंकड़ों में भी यह रुख दिखाई देता है। 2016 के अंत तक एमओईएक्स ब्रेंट कच्चे तेल के अनुबंध का आंकड़ा लगभग 4,50,000 अनुबंधों का था, जबकि आईसीई ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा करीब चार गुना अधिक 21.8 लाख का था।
 
एमसीएक्स की दृष्टिï से भारतीय बाजार में किए गए सौदों के अनुबंधों की संख्या 13.3 प्रतिशत बढ़कर 24.5 करोड़ हो गई, जबकि एनसीडीईएक्स के अनुबंध 31.2 प्रतिशत गिरकर दो करोड़ रह गए। हालांकि एक्सचेंजों ने इस मामले में बातचीत करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई लेकिन उद्योग के सूत्र ने कहा कि मॉस्को एक्सचेंज ने कुछ छोटे अनुबंध भी शुरू किए हैं। मॉस्को एक्सचेंज ब्रेंट कच्चे तेल में सौदे करता है जबकि एमसीएक्स का बेंचमार्क अनुबंध डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल का होता है। इसी तरह उनके ब्रेंट तेल के अनुबंध का आकार एमसीएक्स का दसवां हिस्सा होता है। 2016 में कच्चे तेल और रूबल के मूल्य में रही बड़ी अस्थिरता से भी मॉस्को एक्सचेंज एमसीएक्स से आगे रहा।
 
मॉस्को एक्सचेंज के जिंस अनुबंध 2015 के 12.22 करोड़ की तुलना में 2016 में करीब चार गुना बढ़कर 45.81 करोड़ पर पहुंच गए हैं। इसका कारण है एक्सचेंज द्वारा किए गए छोटे सौदे और करेंसी की अस्थिरता। भारतीय एक्सचेंज उद्योग ने भी यह स्पष्टï किया है कि भारतीय बाजार में अब भी ऑपशंस के सौदे नहीं किए जाते हैं और न ही यह बाजार संस्थानिक भागीदारों के लिए खुला है। 2017 में इन दोनों की शुरुआत की उम्मीद है। जिससे वैश्विक रैंकिंग में भारतीय एक्सचेंज उद्योग अपनी चमक बिखेर सकता है। इसके अलावा नए जिंस भी सौदों की सूची में शामिल किए जा चुके हैं। जिनमें से कुछ तो भारतीय वायदा बाजार में पहली बार शामिल हुए हैं।
Keyword: cruid oil, फ्यूचर्स इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए),
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