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जोखिम उठाने की क्षमता कम तो बैलेंस्ड फंड में डालें रकम

तिनेश भसीन /  April 14, 2017

जोखिम से बचने वाले निवेशक के लिए इक्विटी फंड के बारे में किसी म्युचुअल फंड वितरक की आमतौर पर यही सलाह होती है कि बैलेंस्ड फंड खरीदें। फंड वितरक का सुझाव होगा, 'डेट फंड की मौजूदगी से यह सुनिश्चित होगा कि जब भी शेयर बाजार गिरे, उस समय इसमें गिरावट का असर कम हो। साथ ही इससे इक्विटी फंडों की तरह कर लाभ भी मिलेगा।' ताज्जुब नहीं जो निवेशक इन योजनाओं की तरफ भाग रहे हैं। जनवरी 2013 में जहां इन फंडों के प्रबंधन के अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) 13,790.7 करोड़ रुपये थीं वहीं अब ये लगभग सात गुना बढ़कर 98,593.9 करोड़ रुपये पर पहुंच गई हैं। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बैलेंस्ड एडवांटेज और एचडीएफसी प्रूडेंस क्रम से 17,368 करोड़ रुपये और 16,469 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ शीर्ष पांच इक्विटी योजनाओं में शुमार हैं। 

 
जहां तक मार्केटिंग का सवाल है तो वितरक गलत नहीं है। बैलेंस्ड फंड शुद्ध इक्विटी योजनाओं, खासकर मिड-या स्मॉल कैप फंड की तुलना में काफी कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं। फंड प्रबंधक अपने पोर्टफोलियो का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करते हैं। इससे उन्हें एक साल के निवेश के बाद कर-मुक्त प्रतिफल देने में आसानी होती है। लेकिन दुविधा यह है कि इन फंडों का पोर्टफोलियो किस तरह से तैयार किया जाता है?
 
बैलेंस्ड फंडों की दो रणनीतियों में से पहली है इक्विटी आवंटन। सीधे शेयरों में निवेश के रूप में कम से कम 65 प्रतिशत रकम वे इक्विटी में लगाते हैं। शेष निवेश डेट में किया जाता है। ये 65 प्रतिशत भी निवेश फंड प्रबंधक के विश्वास के आधार पर लार्ज, मिड-या स्मॉल-कैप शेयरों में किया जा सकता है। इसी तरह, डेट का हिस्सा भी इसी आधार पर तय किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि फंड प्रबंधक मानता है कि ब्याज दरें नीचे आएंगी तो वह उन प्रतिभूतियों को होल्ट कर सकता है जिनकी अवधि सात-आठ साल या इससे अधिक है। इसके विपरीत, यदि परिदृश्य बढ़ती ब्याज दर वाला है तो वह अल्पावधि वाली प्रतिभूतियों पर दांव लगा सकता है।
 
अन्य रणनीति है इक्विटी में 40 फीसदी, आर्बिट्राज में 30 फीसदी और डेट में 30 फीसदी निवेश की। फंड प्रबंधक की दिलचस्पी और दक्षता के आधार पर इस रणनीति में अलग-अलग अनुपात तय किया जा सकता है। आर्बिट्राज रणनीति में नकदी और वायदा बाजारों में एकदम उलट पोजीशन ली जाती है। यानी एक बाजार में आप खरीदार हैं तो दूसरे में बिकवाल होते हैं। इसलिए यदि कोई शेयर नकद बाजार में 1000 रुपये पर और वायदा बाजार में 1100 रुपये पर कारोबार कर रहा है तो उसे नकद बाजार में खरीदना और वायदा बाजार में बेचना समझदारी होगी। 
 
टाटा म्युचुअल फंड के वरिष्ठï प्रबंध निदेशक प्रदीप गोखले कहते हैं, 'जिन योजनाओं में आर्बिट्राज रणनीतियों का इस्तेमाल किया जाता है, वे इनकम फंडों के समान होती हैं। इनमें प्रमुख सूचकांकों की तरह ज्यादा गिरावट नहीं आती है, बल्कि डेट फंडों की तुलना में बेहतर प्रतिफल भी देती हैं।' कई ऐसी कंपनियां हैं जिनके तीन-चार बैलेंस्ड फंड हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी में इक्विटी मामलों के डिप्टी सीआईओ मनीष गुनवानी कहते हैं, 'हरेक योजना उन निवेशकों के मकसद से बनाई जाती हैं, जो अधिक उतार-चढ़ाव पसंद नहीं करते लेकिन जो लंबी अवधि में संपत्ति सृजन के लिए इक्विटी में निवेश का लाभ उठाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के चार फंड हैं। प्रत्येक फंड इक्विटी निवेश की भिन्न विशिष्टïता वाला है, जिसके आधार पर आप निवेश का निर्णय ले सकते हैं।'
 
इसके अलावा डेट बैलेंस्ड फंड भी हैं जो इक्विटी से जुड़े हुए हैं। इन्हें हाइब्रिड (डेट) के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। छोटे निवेशक को या तो इस रणनीति, धारणा और अंतर को समझने के लिए उचित ढंग से शोध करने की जरूरत है या उसे अपने प्रोफाइल के लिए अनुकूल फंड के लिए सलाहकार की दक्षता पर निर्भर रहने की जरूरत है। सुस्त या नए निवेशकों के लिए: मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के निदेशक एवं पोर्टफोलियो विशेषज्ञ धवल कपाडिया कहते हैं, 'बैलेंस्ड फंड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जिनमें जोखिम उठाने की क्षमता कम है या जो इक्विटी में निवेश के लिहाज से नए हैं। जो निवेशक सात वर्ष से अधिक के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनको उन फंडों पर विचार करना चाहिए जिनका निवेश इक्विटी में अधिक है।' ये फंड उन लोगों के लिए भी अच्छे हैं जो परिसंपत्ति आवंटन में ज्यादा सक्रिय नहीं होना चाहते हैं। बिड़ला सनलाइफ एएमएसी के मुख्य कार्याधिकारी ए बालासुब्रमण्यन कहते हैं, 'एक फंड प्रबंधक परिसंपत्ति आवंटन का ध्यान रखता है और निवेशकों को इसे पुन: संतुलित बनाने की जरूरत नहीं होती है।' 
 
लेकिन अगर आप अपने परिसंपत्ति आवंटन को सख्ती से  बनाए रखना चाहते हैं तो फिर बैलेंस्ड फंड आपके लिए नहीं हैं। इन फंडों का इक्विटी में निवेश बाजार के हालात के आधार पर 35 फीसदी से लेकर 80 फीसदी भी हो सकता है। फंड्ïसइंडिया डॉटकॉम में म्युचुअल फंड रिसर्च की प्रमुख विद्या बाला कहती हैं, 'आपका इनकी निवेश रणनीतियों पर भी नियंत्रण नहीं होता है। अगर कोई निवेशक इक्विटी के लिए लार्ज-कैप शेयरों वाली रणनीति और डेट के लिए संचय करने की रणनीति चाहता है तो उसे अपने  लक्ष्य के लिए निवेश को दो अलग अलग फंडों में बांटना होगा।' बैलेंस्ड फंड का मिड कैप या डेट में ही पूरा निवेश भी हो सकता है, वह अवधि रणनीति भी अपना सकता है। अलग परिसंपत्ति आवंटन बरकरार रखने की तुलना में बैलेंस्ड फंड अधिक महंगे भी हो सकते हैं। गेटिंग यू रिच के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी रोहित शाह कहते हैं, 'इक्विटी फंडों का खर्च अनुपात 2.5 फीसदी होता है जबकि डेट फंड 1.5 फीसदी वसूलते हैं। बैलेंस्ड फंड  अगर आपसे 2.25 फीसदी का शुल्क खर्च वसूलें तो भी यह अधिक महंगा होगा।' लंबी अवधि में जब परिसंपत्ति बढ़ती जाती है तो यह अनुपात अहम हो जाता है। 
 
युवा हैं तो इक्विटी पर दें जोर: डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड किसी बैलेंस्ड फंड की तुलना में लंबी अवधि के दौरान बेहतर प्रतिफल देने में सक्षम होंगे। पिछले तीन वर्षों में बैलेंस्ड फंडों और मल्टी-कैप फंडों का सालाना औसत क्रम से प्रतिफल 19.04 प्रतिशत और 22.03 प्रतिशत रहा। फाइव-स्टार रेटिंग वाले मल्टी-कैप फंड आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बैलेंस्ड (23.43 फीसदी) की तुलना में पिछले तीन साल में बेहतर प्रतिफल (29.17 प्रतिशत) दिया। 8-10 साल के दौरान इक्विटी ने आम तौर पर अन्य योजनाओं को मात दी है। अधिक इक्विटी आवंटन वाला और अच्छी तरह से प्रबंधित फंड बेहतर प्रतिफल की पेशकश करेगा।
 

वर्ष 2014 के बजट में डेट फंडों पर कराधान बदलाव के बाद ये फंड ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं। अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर की अवधि एक साल से बढ़ाकर तीन साल की गई। इसके बाद कई मौजूदा फंडों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। किसी बैलेंस्ड फंड का चयन करते समय निवेशक को उस फंड के पिछले प्रदर्शन पर भी ध्यान देने की जरूरत होगी।

ये फंड जोखिम-मुक्त नहीं: वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि कई निवेशक मानते हैं कि बैलेंस्ड फंड में कम उतार-चढ़ाव रहता है, सो वे जोखिम से मुक्त होते हैं। लेकिन ये फंड जोखिम-मुक्त नहीं हैं, लेकिन इनमें डाइवर्सिफाइड फंडों की तुलना में इनमें कम ही उतार-चढ़ाव होता है। डाइवर्सिफाइड फंडों में शेयरों के लिए अधिक राशि का आवंटन होता है। शाह कहते हैं, 'कई बैलेंस्ड फंडों का अच्छा-खासा निवेश मिड-और स्मॉल-कैप शेयरों में होता है जिससे उनमें उतार-चढ़ाव हो सकता है।' 

 
नियमित आय के लिए एमआईपी बेहतर: चूंकि इन फंडों का शेयरों में निवेश होता है, इसलिए लोगों को नियमित आय के लिए इनमें निवेश से परहेज करना चाहिए। सेवानिवृत लोगों को अक्सर ऐसी मासिक आय योजनाओं (एमआईपी) के लाभांश विकल्प में निवेश की सलाह दी जाती है जिनका 15-25 फीसदी निवेश शेयरों में और शेष डेट में होता है। शेयरों में निवेश से कुल रिटर्न बढ़ जाता है। निवेश सलाहकारों का कहना है कि बैलेंस्ड फंड एमआईपी की जगह नहीं ले सकते। बैलेंस्ड फंडों का शेयरों में अधिक निवेश होता है और इनसे मिलने वाला लाभांश टिकाऊ और एक समान नहीं होता है।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर, पुनर्खरीद,
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