Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Tuesday, June 27, 2017 12:36 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

पूंजीवाद के दयावान चेहरे को पेश करने की जद्दोजहद

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  April 13, 2017

इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक के कुछ दिन पहले ही अपने पसंदीदा विषय 'दयावान पूंजीवाद' पर अपनी राय सार्वजनिक कर दी। कुछ मीडिया संस्थानों को भेजे गए ई-मेल में नारायणमूर्ति ने कहा कि किसी भी भारतीय कंपनी के शीर्ष पद पर आसीन हरेक शख्स को वेतन एवं अन्य सुविधाओं के मामले में आत्म-संयम रखना चाहिए। उन्होंने कंपनी जगत के शीर्ष अधिकारियों से 'भारत जैसे गरीब देश में सर्वाधिक एवं न्यूनतम वेतन के बीच एक तर्कसंगत अनुपात सुनिश्चित करने' पर भी ध्यान देने को कहा। उनकी यह टिप्पणी इन्फोसिस के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) प्रवीण राव का वेतन बढ़ाए जाने के बाद आई है। 

 
नारायणमूर्ति ने संभवत: अपनी बात रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2007 में दिए गए एक भाषण से प्रेरणा ली है। मनमोहन सिंह ने बड़ी कंपनियों से शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को मोटी तनख्वाह देने से परहेज करने का अनुरोध किया था। उनका मानना था कि साधन-संपन्न और साधन-हीन तबकों के बीच असमानता बढऩे से सामाजिक वैमनस्य बढऩे का खतरा होता है। उन्होंने उद्योग जगत से ऊंचा वेतन देने को लेकर थोड़ा संयत रुख रखने को कहा था। उनका मानना था कि अगर देश भर में आय स्तर में वृद्धि का वेतन बढ़ोतरी से तारतम्य नहीं होगा तो विकास के दायरे से बाहर रह जाने वाले लोगों में असंतोष पैदा हो सकता है।
 
लेकिन भारतीय कंपनी जगत पर उनकी इस सलाह का कोई असर नहीं पड़ा। ऐसा लगता है कि इन्फोसिस भी अपने संस्थापक की राय को शायद ही तवज्जो देगी। कंपनी ने नारायणमूर्ति के ई-मेल के तत्काल बाद जारी बयान में अपने सीओओ के वेतन में 33 फीसदी बढ़ोतरी के निर्णय को सही ठहराया है। उसने कहा है कि यह फैसला प्रमुख भारतीय एवं वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को दिए जा रहे वेतन एवं अन्य सुविधाओं के अनुरूप है। मुद्दा यह है कि दोनों ही पक्षों के तर्कों में दम है। यह सच है कि भारतीय कंपनी जगत अपने शीर्ष अधिकारियों को पारितोषिक देने के मामले में काफी उदार रहा है। असलियत तो यह है कि भारतीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का वेतन वैश्विक स्तर के करीब पहुंचता जा रहा है जबकि भारतीय कंपनियों का आकार वैश्विक स्तर की तुलना में काफी कम है।
 
शीर्ष अधिकारियों को ज्यादा वेतन दिए जाने की धारणा इस जानकारी के बाद और सुदृढ़ हुई है कि मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) और निचले कर्मचारी के वेतन के बीच सबसे ज्यादा फासला भारत में ही है। एऑन हेविट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में किसी सीईओ को मिलने वाला वेतन निचले स्तर के कर्मचारी के वेतन से करीब 675 गुना अधिक है। अमेरिका में शीर्ष और निम्न स्तर के बीच वेतन का फासला 423 गुना है जबकि चीन में यह अनुपात 268 गुना है। 
 
शीर्ष अधिकारियों को दिए जा रहे ऊंचे वेतन के विरोध में उठ रही तमाम आवाजों के बावजूद इसकी संभावना बहुत कम है कि कंपनी जगत इस पर ध्यान देगा। इसकी वजह यह है कि कंपनियों का वास्तविक नियंत्रण रखने वाले प्रवर्तकों की नजर में शेयरधारकों की सक्रियता का मतलब किसी अवरोध से अधिक कुछ नहीं है। भारतीय कंपनी जगत में सर्वाधिक वेतन पाने अधिकारी उन कंपनियों के प्रवर्तक भी हैं। ऐसे भी कई वाकये देखे गए हैं जहां प्रवर्तक परिवार के कई सदस्य पूर्णकालिक निदेशक भी बन जाते हैं और वेतन के रूप में अच्छी-खासी रकम भी घर ले जाते हैं। 
 
दूसरी तरफ ऊंची तनख्वाह का समर्थन करने वालों का कहना है कि कंपनियां अपने शीर्ष अधिकारियों को दिए जाने वाले वेतन के बारे में अच्छी तरह जानती हैं लिहाजा यह विरोध बेमतलब है। इस देश में काबिल सीईओ की मांग उनकी आपूर्ति से काफी अधिक है। इसके अलावा परिपक्व बाजारों की तुलना में शीर्ष पदों पर नियुक्त किए जाने लायक लोगों की उपलब्धता भी काफी कम है। इसी से जुड़ा एक पहलू यह भी है कि अब कंपनियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मनचाहे नतीजे देने वाले उनके अधिकारी मोटी तनख्वाह भी पा रहे हैं।
 
ये कंपनियां नारायणमूर्ति के उठाए मुद्दे को बेकार बताते हुए इस आधार पर खारिज कर रही हैं कि इन्फोसिस के सीओओ का वेतन बढ़ाने का फैसला उनके प्रदर्शन, कंपनी के लक्ष्यों को हासिल करने और कंपनी के प्रदर्शन जैसे कारकों पर भी निर्भर करता है। अगर इनमें से कोई भी कारक अनुपस्थित है तो राव का परिवर्तनीय वेतन भी बदल जाएगा। इस तर्क में भी दम है। विश्लेषण करें तो प्रशांत राव के वेतन एवं अन्य सुविधाओं में शुद्ध बढ़ोतरी केवल 1.4 फीसदी ही होगी। इसकी वजह यह है कि वह अगले चार वर्षों तक अपने शेयर नहीं बेच सकेंगे, उनके वेतन में नकदी का हिस्सा भी 10.6 फीसदी घटा दिया गया है और प्रदर्शन-आधारित हिस्सा 45 फीसदी से बढ़ाकर 63 फीसदी कर दिया गया है। इन्फोसिस ने अपने बयान में कहा है कि अगर अगले चार वर्षों तक कंपनी और संबंधित व्यक्ति का प्रदर्शन अच्छा रहता है तब जाकर उनके वेतन में बढ़ोतरी 33.4 फीसदी पर पहुंचेगी। 
 
अक्सर यह कहा जाता है कि सीईओ को ऊंचा वेतन दिए जाने पर एतराज नहीं होना चाहिए क्योंकि काबिल सीईओ की मांग उनकी आपूर्ति से अधिक है। इसके अलावा हरेक कंपनी के निदेशक मंडल से यह अधिकार है कि वह प्रतिभावान लोगों को आकर्षित करने के लिए ऊंचे वेतन एवं अन्य लाभों की पेशकश कर सके। इसके साथ ही सीईओ स्तर के अधिकारियों को काफी जोखिम भी उठाने पड़ते हैं लिहाजा उनके अधिक वेतन को वाजिब ठहराया जा सकता है। भारतीय कंपनियों के प्रवर्तकों में हाल के दिनों में वैश्विक बाजार से सीईओ लाने की प्रवृत्ति भी जोर पकड़ रही है। सवाल उठता है कि क्या इस मुश्किल कारोबारी हालात में किसी तरह के दयावान पूंजीवाद की जगह बची रह गई है? इसका जवाब तलाश कर पाना वाकई में मुश्किल है। 
Keyword: infosys, इन्फोसिस, संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या तय विनिवेश लक्ष्य को हासिल कर पाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.