Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, September 22, 2017 12:58 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

बैटरी चालित वाहन और परंपरागत कार बाजार

आकाश प्रकाश /  April 13, 2017

सरकार बिजली से चलने वाले वाहनों को मदद मुहैया करा सकती है लेकिन इस संबंध में बाकायदा नीति बनाए जाने की आवश्यकता है। इस संबंध में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं आकाश प्रकाश 

 
बिजली चालित वाहनों (ईवी) के आगमन के साथ ही वाहन उद्योग में हलचल पैदा होने की संभावना उत्पन्न हो गई। इसने उत्साह और भय दोनों पैदा किए। इसे लेकर कई तरह के शोध पत्र प्रकाशित किए गए। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा वाहन निर्माता कंपनियों के लिए भविष्य ठीक नहीं है और आगे चलकर उनका वही हश्र हो सकता है जो 100 साल पहले उनकी बदौलत घोड़े से चलने वाली बग्घी का हुआ। वहीं वाहन कंपनियों का मानना है कि उनको कोई समस्या नहीं होने वाली। उनको लगता है कि उनके पास वितरण, ब्रांड और तकनीकी संसाधन हैं जिनकी बदौलत वे ईवी के दौर में भी फल-फूल सकती हैं। 
 
यह बदलाव काफी अहम है क्योंकि वैश्विक स्तर पर यात्री कारों का कारोबार 18 खरब डॉलर से अधिक है। इस कारोबार का मुनाफा 150 अरब डॉलर और कारोबारी तादाद 900 करोड़ है। महज संदर्भ के लिए बात करें तो स्मार्टफोन उद्योग का राजस्व 340 अरब डॉलर का है और पर्सनल कंप्यूटर कारोबार 170 अरब डॉलर का है। मौजूदा वाहनों से बैटरी चालित ईवी का यह सफर बड़े पैमाने पर विसंगति पैदा करेगा। राजस्व का आकार और मुनाफे पर जोखिम उत्पन्न होगा। इससे एक ओर जहां कई अनुषंगी उद्योगों को लाभ होगा तो वहीं समान मात्रा में उद्योगों को नुकसान भी देखने को मिलेगा। लिथियम इयॉन बैटरियों की धूम होगी। आने वाले कई दशकों तक ये बैटरी बाजार में सबसे अहम उत्पाद होंगी। 
 
किसी भारतीय व्यक्ति के लिए इन बातों का क्या महत्त्व है? हमारी कंपनियों पर इसका क्या असर होगा? क्या हमें इन बातों को लेकर चिंतित होना चाहिए? हकीकत यह है कि वाहन क्षेत्र देश के उन चुनिंदा विनिर्माण क्षेत्रों में से एक है जिनमें हमें सफलता हासिल हुई है। हमारा देश वर्ष 2017 में करीब 800,000 कारों का निर्यात करेगा जिनकी कीमत करीब चार अरब डॉलर होगी। इनका 90 फीसदी काम स्थानीय होगा। छोटी कारों के निर्माण हमारी स्थिति काफी अच्छी है। इसके अलावा अगर वाहन कलपुर्जा उद्योग को शामिल कर लिया जाए तो 4-5 अरब डॉलर का निर्यात तो अपने आप बढ़ जाता है। यह उन चुनिंदा क्षेत्रों में शामिल है जिनमें हमें वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञता हासिल है और हम प्रतिस्पर्धी भी हैं। मेक इन इंडिया अभियान छोटी कारों में खूब सफल है। वर्ष 2020 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन जाएगा। घरेलू बाजार 45 लाख कारों का होगा। फिलहाल 85 फीसदी तक कलपुर्जे देश में ही बनते हैं। अगर वाहन उद्योग ने ईवी का रुख किया तो हमारी यह बढ़त समाप्त हो जाएगी। हम कार निर्माण का बड़ा केंद्र बने रहेंगे या आयातित लिथियम इयॉन बैटरी और अन्य घटकों की असेंबली वाली जगह बनेंगे यह देखना होगा क्या हम कार बाजार में उसी स्थिति को पहुंचेंगे जिस स्थिति में आज हम स्मार्टफोन बाजार में हैं?
 
ईवी की ओर जाना अपरिहार्य है। देखना केवल यह है कि ऐसा कब तक होता है। बैटरी चालित वाहन बेहतर विकल्प हैं। महंगे वाहनों के क्षेत्र में तो इसके चलते बदलाव आने भी लगा है और इसका निचले स्तर पर भी आना तय है। सबसे बड़ा सवाल लागत का है। बैटरी चालित वाहन की बैटरी 17 से 18 हजार डॉलर की आती है जबकि जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहन का इंजन तंत्र 5,000 डॉलर में। बैटरी कीमतों में सालाना 20 फीसदी की दर से गिरावट आने की उम्मीद है जिससे यह लागत कम होगी। उत्सर्जन मानकों के कारण पारंपरिक ईंधन की लागत बढ़ेगी। अधिकांश विशेषज्ञों का कहना है कि 2025-2030 के बीच यह लागत सम पर आ जाएगी। ईवी तेज और किफायती हैं। इनसे कोई उत्सर्जन नहीं होता। मैंने जो अध्ययन देखे हैं, उनसे पता चलता है कि 2025 तक बाजार में 25 फीसदी हिस्सेदारी ईवी की होगी और 2035 तक यह स्तर 90 फीसदी हो जाएगा। अपेक्षाकृत मंद अनुमान बताते हैं कि 2025 तक इनकी पहुंच बाजार में 10 फीसदी और 2035 तक 30 फीसदी होगी। इस बदलाव में सबसे आगे चीन होगा। उसके बाद यूरोपीय संघ। उभरते बाजार पीछे 
रह जाएंगे। 
 
यह बदलाव पूरे उद्योग जगत को हिला कर रख देगा। अगर अन्य क्षेत्रों के तकनीकी बदलाव पर नजर डालें तो अंदाजा लगता है कि पारंपरिक वाहनों की जगह बैटरी वाले वाहन आ जाएंगे। यही भविष्य की मूल प्रौद्योगिकी होगी। ईवी का निर्माण पारंपरिक वाहन की तुलना में काफी आसान होगा। इसमें ज्यादा कलपुर्जे नहीं लगेंगे और यह बात कलपुर्जा कंपनियों पर असर डालेगी। खासतौर पर इंजन और ट्रांसमिशन बनाने वाली कंपनियां इससे प्रभावित होंगी। मौजूदा दौर में इन क्षेत्रों में ही सबसे अधिक मार्जिन है। यह पूरा बाजार बदल जाएगा। 
उद्योग जगत के पास अभी तालमेल बिठाने के लिए दशक भर का वक्त है। अगर ईवी अत्यंत तेजी से अपनी जगह बनाएं तो भी वैश्विक स्तर पर परंपरागत वाहनों का कारोबार वर्ष 2016 से 2026 के बीच सालाना 0.75 फीसदी की दर से ही गिरेगा। विकसित देशों में जहां ईवी की धूम रहेगी वहीं उभरते बाजार में परंपरागत वाहनों की बिक्री बहुत तेजी से होगी। असली प्रभाव वर्ष 2026 के बाद नजर आएगा। 
 
देश के कलपुर्जा निर्माताओं के पास एक दशक का वक्त है। मामला चाहे टेस्ला जैसी नई ईवी कंपनी को आपूर्ति करने की हो या पुरानी वाहन कंपनियों को, आपूर्तिकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे नए डिजाइन के मुताबिक प्रासंगिक बने रहें। चूंकि हमारा तमाम कार निर्यात उभरते बाजारों में होता है इसलिए हमें यह ध्यान रखना होगा कि अगले एक दशक तक हमारा परंपरागत कारोबार जारी रहेगा। जो भी समायोजन करना है वह इस दौरान हो सकता है। बैटरी तकनीक में चीन सबसे अव्वल है। वर्ष 2016 में सबसे अधिक बैटरी चालित वाहन वहीं बिके। वहां इसके लिए खासी रियायत भी है। वर्ष 2020 तक चीन बैटरी के मामले में कोरियाई और जापानी कंपनियों को कड़ी टक्कर देने लगेगा। 
 
भारत इस क्षेत्र में बहुत अधिक प्रगति नहीं कर सका है। हमारे यहां बैटरी निर्माण की कोई खास व्यवस्था नहीं है, न ही हमारे पास संबंधित तकनीक है। मेरी नजर में अब तक किसी भारतीय कंपनी या सरकार ने इस दिशा में कोई प्रयास भी नहीं किया है। हम सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन, पॉलिसिलिकन और फ्लैट पैनल तकनीक सभी में पीछे हैं। इन सभी क्षेत्रों में हमारे पास कोई तकनीकी सुविधा है ही नहीं। ऐसा लगता है मानो बैटरी प्रणाली और प्रौद्योगिकी में भी हमारे साथ यही होगा। सरकार को इसमें हमारी मदद करनी होगी लेकिन हमें इस संबंध में एक नीति की आवश्यकता है। हम एक और बदलाव में पीछे नहीं रह सकते। अगर ऐसा हुआ तो हम भविष्य में भी अहम तकनीक के आयातक बनकर रह जाएंगे।
Keyword: battery, car,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या पीपीपी मॉडल से सस्ते मकान का सपना होगा साकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.