Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Monday, April 24, 2017 06:37 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

परमाणु हथियार क्षमता और हमारा सिद्घांत

नितिन पई /  April 11, 2017

भारत के परमाणु सिद्घांत को लेकर चल रही बहस के बीच यह मान लेना भूल होगी कि भारत अपने रुख में कोई बदलाव कर रहा है। इस संबंध में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं नितिन पई
शाकाल और गब्बर में लंबे समय से विवाद था। दोनों एक दूसरे के खिलाफ दुश्मनी पालते थे लेकिन आपस में लडऩे से बचते थे क्योंकि इससे दोनों को ही नुकसान पहुंचता। कई बार गलतफहमियां ऐसी छोटी मोटी घटनाओं को जन्म देती हैं जो आगे चलकर बड़ी दुश्मनी में तब्दील हो सकती हैं। इसके चलते खूनी लड़ाइयां तक हो सकती हैं। एक दिन शाकाल पूरे शहर में ऐसे पोस्टर लगवा देता है जिनमें दावा किया जाता है कि उसका गैंग अब गब्बर पर पहले हमला नहीं करेगा। लेकिन अगर पहले सामने से वार हुआ तो वह पीछे भी नहीं हटेगा। अब आप जरा खुद को गब्बर की जगह रखकर देखिए। आप शाकाल के वादे को कितनी गंभीरता से लेंगे?
सरसरी तौर पर देखा जाए तो शाकाल के वादे की एकमात्र वजह यही नजर आती है कि वह घायल होने से बचना चाहता है। आप इस संभावना से कभी इनकार नहीं कर सकते हैं कि शाकाल की घोषणा आपको आश्वस्त करने की एक चतुराई भरी चाल है ताकि वह आपको चौंका सके। यानी आपको उस पर कड़ी नजर रखनी होगी। उसकी ताकत का मुकाबला करना होगा और हमेशा इस आशंका में जीना होगा कि वह आप पर पहले हमला कर सकता है, भले ही उसने कुछ भी वादा किया हो।
चीन और पाकिस्तान भारत के पहले परमाणु हथियार न इस्तेमाल करने की घोषणा (एनएफयू)को इसी दृष्टि से देखते हैं।  हम भी चीन के एनएफयू को इसी दृष्टि से देखते हैं। ऐसी किसी भी घोषणा के बाद कोई भी प्रतिपक्षी से आश्वस्त नहीं होता है और उसे हमेशा यह जोखिम रहता है कि सामने से अचानक हमला हो सकता है। दरअसल परमाणु हमले की वजह से होने वाले भयंकर नुकसान के डर से ही देश एक दूसरे पर पहले हमला नहीं करते। परमाणु प्रतिरोध का यही मूल है।
हाल ही में अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस में आयोजित हालिया सम्मेलन के बाद पत्रकारों और विद्वानों ने यह मानना शुरू कर दिया है कि शायद भारत ने अपना एनएफयू सिद्धांत त्याग दिया हो। कहा जा रहा है कि संभव है कि भारत पाकिस्तान के परमाणु हथियार जखीरे को नष्ट करने के लिए पहले उस पर हमला कर दे ताकि भारत के खिलाफ ऐसे हमले की आशंका ही समाप्त की जा सके। पाकिस्तानियों ने भी कहना शुरू कर दिया है कि हम तो पहले से ही ऐसा कह रहे थे। भारत को परमाणु क्षेत्र से दूर रखने के हिमायती निहित स्वार्थी तत्त्वों ने अपनी कलम की धार तेज करनी शुरू कर दी है।
इस दावे में कोई दम नहीं है। किसी को नहीं पता कि पाकिस्तान के पास कितने परमाणु हथियार हैं। किसी को नहीं पता कि वे कहां रखे गए हैं। किसी को नहीं पता कि उनको प्रक्षेपित करने की व्यवस्था कहां है। एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान के पास 120 ऐसे हथियार हैं। यह केवल अनुमान है। ऐसे में पहले हमला कर उनको नष्ट करने की बात एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं। गौरतलब है कि केवल एक बम की मदद से भारत का एक पूरा शहर बरबाद किया जा सकता है। वह बम भारत की सामाजिक स्थिरता और आर्थिक संभावनाओं को खत्म कर सकता है।
अगर मान लिया जाए कि भारत ऐसा हमला करेगा तो इसके लिए भारत को पाकिस्तान को पूरी तरह खत्म करना होगा क्योंकि वहां हजारों जगह हैं जहां बम रखे जा सकते हैं। अगर ऐसा किया गया तो कुछ एक भारतीय शहरों के नष्ट होने का जोखिम भी रहेगा क्योंकि पाकिस्तान की तरह से जवाबी हमला हो सकता है। यह सब केवल इसलिए कि कहीं पाकिस्तान सीमा पार करने वाले कुछ भारतीय जवानों पर हमला न कर दे?
अब लोग यह मानने के लिए स्वतंत्र हैं कि क्या कोई भारतीय नेता कुछ हजार जवानों की मृत्यु की आशंका समाप्त करने के लिए लाखों लोगों की जान चली जाने देगा? अगर पाकिस्तान भारत पर हमला करता है और परमाणु बम गिराता भी है तो हमारे पास इससे निपटने के कई विकल्प हैं। अगर जरूरत पड़ ही जाए तो परमाणु हथियारों की भी कमी नहीं।
मुझे लगता है कि सामरिक नीतिकारों के साथ एक समस्या है। वे अपना अवधारणात्मक ढांचा शीतयुद्ध के आधार पर तैयार करते हैं जहां दो महाशक्तियां अन्य देशों को लेकर आपस में लड़ती रहीं। इन देशों का भूगोल और उनका जननांकीय ढांचा भारतीय उपमहाद्वीप से अलग है।
ऐसे में जब हमें भारत, पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में प्रतिरोधी शक्ति या प्रतिरोधी मूल्य की बात सुनने को मिलती है तो मुझे आश्चर्य होता है कि क्या विश्लेषकों को वाकई ऐसा लगता है कि हम इनमें से दो को अपने संदर्भ में अलग कर सकते हैं। हमारी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि परमाणु हथियारों को आबादी से कहीं दूर एकत्रित करना मुश्किल है। सैनिकों पर हमलों को शहरों पर हमलों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इन तमाम ढांचों की बात करें तो ये हमें भ्रामक निष्कर्ष की ओर ले जा सकते हैं।
परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का निर्णय हमेशा राजनीतिक होता है इसलिए इसे सामरिक भी कहा जा सकता है। भारत का परमाणु सिद्घांत यह है कि एक परमाणु हमला बहुत भीषण होता है और उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। यह अच्छी स्थिति है। परमाणु हमला करने की आकांक्षा रखने वाले विरोधी को यह जानना चाहिए कि अगर उसने ऐसा कुछ किया तो इसके जवाब में एक भीषण त्रासदी ही हमारे सामने होगी। ऐसे में जोखिम उठाना है या नहीं, यह तय करने का जिम्मा भी प्रतिद्वंद्वी का ही रहेगा।
अगर पाकिस्तान चाहता है कि वह परमाणु हथियार तैयार करने, उसे ले जाने के लिए क्रूज मिसाइल तैनात करने पर और अधिक धन खर्च करे तो वह ऐसा कर सकता है। लेकिन उन्हें यह बात अधिक हताश कर रही है कि भारत इस पर कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दे रहा।
भारत को अपना रुख पहले जैसा ही रखना चाहिए: यानी किसी भी तरह के हमले की स्थिति में जबरदस्त प्रतिक्रिया। फिर चाहे वह पुराने बमों के रूप में हो या मिसाइल की मदद से लक्षित हमले के रूप में। देश के सामरिक क्षेत्र में हो रही बहस और राजनेताओं की व्यक्तिगत टिप्पणियों से इतर यही भारत की आधिकारिक स्थिति होनी चाहिए और यही है। ऐसा केवल सिद्घांत के प्रति समर्पण की वजह से नहीं होना चाहिए बल्कि इसलिए होना चाहिए क्योंकि हम परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बेहतर तरीके से वाकिफ हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में परमाणु प्रतिरोध का संबंध साझा नुकसान की समझ से तय होता है, न कि शीतयुद्घ की शैली के तयशुदा विनाश से।

Keyword: atomic policy, nuclear, india, pakistan,
Advertisements
  Impact of Network performance on loyalty of smartphone users
   Impact of connected mobile devices on consumer video needs
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
E-DINAR: The startup of the year 2016. Click to know more
E-DINAR - a new generation of P2P exchange
  आपका मत
 क्या रेरा के लागू होने से डेवलपरों पर कसेगी नकेल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.