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केयर्न को 15 जून तक 10,247 करोड़ रुपये कर का नोटिस, ब्याज भी मांगा

दिलाशा सेठ और ज्योति मुकुल / नई दिल्ली 04 09, 2017

300 फीसदी लग सकता है जुर्माना

► विभाग ने साथ ही 1400 करोड़ रुपये ब्याज देने को कहा
कर और ब्याज भुगतान के लिए 15 जून तक का समय

आयकर विभाग ने पेट्रोलियम खनन क्षेत्र की ब्रिटेन की दिग्गज कंपनी केयर्न को 15 जून तक 10,247 करोड़ रुपये कर बकाये का भुगतान करने को कहा है। विभाग ने कंपनी को भेजे नोटिस में 1,400 करोड़ रुपये ब्याज की भी मांग की है और पूछा है कि उस पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।

इससे पहले आयकर अपीलीय पंचाट (आईटीएटी) ने पिछले महीने अपने आदेश में केयर्न पर पिछली तारीख से पूंजीगत लाभ कर लगाने के आयकर विभाग के फैसले को सही ठहराया था। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'विभाग ने केयर्न को 15 जून तक बकाया कर का भुगतान करने को कहा है। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो उसके खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू होगी। अब तक कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गई है क्योंकि हम निवेश के माहौल को खराब नहीं करना चाहते हैं। लेकिन केयर्न सहयोग नहीं कर रही है।'

आयकर विभाग ने पिछले साल जनवरी में कंपनी को कर आकलन नोटिस भेजा था। उसके आधार पर अब कंपनी को कर की राशि का एक फीसदी यानी हर महीने 100 करोड़ रुपये के हिसाब से 1,400 करोड़ रुपये ब्याज भी चुकाने को कहा गया है। यह मामला वर्ष 2006 में केयर्न द्वारा अपनी भारतीय परिसंपत्तियों को नई कंपनी केयर्न इंडिया को हस्तांतरित करने से जुड़ा है।

विभाग ने साथ ही उच्च न्यायालय में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'अगर केयर्न आईटीएटी के आदेश पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय में जाती है तो अदालत हमारे पक्ष को सुने बिना कोई आदेश नहीं देना चाहिए। इसलिए हमने हस्तक्षेप याचिका डाली है।' केयर्न ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। आयकर विभाग केयर्न पर करीब 300 फीसदी जुर्माना लगा सकता है। अधिकारी ने कहा, 'समय तेजी से बीत रहा है। हमने केयर्न को नोटिस भेजकर पूछा है कि उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। सितंबर तक हमें जुर्माना लगाना है। यह 300 फीसदी हो सकता है क्योंकि कंपनी सहयोग नहीं कर रही है और न ही नियमों का पालन कर रही है।'

हालांकि आईटीएटी ने कंपनी को 18,800 करोड़ रुपये की ब्याज राशि में राहत दी थी लेकिन आयकर विभाग ने आयकर कानून के एक अन्य नियम के तहत ब्याज की मांग की है। अधिकारी ने कहा, 'बकाये पर ब्याज की मांग आयकर कानून की धारा 220 (2) के तहत की गई है।'

केयर्न ने भारत सरकार से 5.6 अरब डॉलर मुआवजा मांगा है। कंपनी का कहना है कि भारत द्वारा करार का उल्लंघन करने से उसे भारी नुकसान हुआ है। पिछले साल विवाद निपटारा योजना के तहत सरकार ने 1 जून से 31 दिसंबर तक एकमुश्त कर निपटान की पेशकश की थी। बाद में इसे 31 जनवरी तक बढ़ाया गया था। लेकिन केयर्न ने इसका इस्तेमाल नहीं किया।

Keyword: income tax, cairn, notice, interest,
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