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पहेली बनी देरी

संपादकीय /  April 09, 2017

रिलायंस जियो ने अपनी 'समर सरप्राइज' पेशकश खत्म कर दी है। इसके तहत और तीन महीने तक कंपनी की सेवाओं का लाभ एक तयशुदा शुल्क देकर उठाया जा सकता था। कंपनी ने यह कदम भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के मशविरे के बाद उठाया। यह पेशकश जियो की प्राइम सुविधा लेने वाले सभी ग्राहकों के लिए थी। प्राइम की पेशकश गत 31 मार्च को समाप्त होनी थी जिसके तहत ग्राहकों को मुफ्त कॉल और काफी सस्ती डाटा सेवा पेशकश की गई थी। ट्राई के इस ताजा हस्तक्षेप के बाद देश के दूरसंचार क्षेत्र की दिक्कत कुछ कम होनी चाहिए। जियो द्वारा अपनी आरंभिक पेशकश को बार-बार आगे बढ़ाने के कारण प्रतिस्पर्धी कंपनियां बार-बार शिकायत कर रही थीं। लेकिन ट्राई ने 'समर सरप्राइज' को लेकर कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की। जियो ने ही अपने स्तर पर यह घोषणा की कि नियामक की सलाह के मुताबिक वह इस पेशकश को वापस ले रही है। शुक्रवार को ट्राई के एक वरिष्ठï अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि 'समर सरप्राइज' नियामकीय खाके के अनुरूप नहीं है। अधिकारी ने यह भी कहा कि जियो ने 31 मार्च को ही यह पेशकश करने के बावजूद कोई टैरिफ योजना पेश नहीं की थी। जियो की पेशकश के खिलाफ जाकर ट्राई ने मुफ्त सेवाओं पर विराम लगा दिया है।
लेकिन नियामक ने यह कदम काफी देर से उठाया। जियो की शुरुआत के बाद दूरसंचार उद्योग को अब तक राजस्व में 20 फीसदी का नुकसान हो चुका है। चार सूचीबद्घ नेटवर्क में से केवल एक भारती एयरटेल को दिसंबर में समाप्त तिमाही में मुनाफा हुआ है। दूरसंचार उद्योग का साझा कर्ज चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। वास्तव में सूचीबद्घ नेटवर्कों का कर्ज उनके मूल्यांकन से अधिक हो चुका है। बैंक अपने कर्ज को लेकर काफी ङ्क्षचतित हो चले हैं। विश्लेषकों को उम्मीद है दूरसंचार बाजार में करीब दो और तिमाहियों तक ऐसी ही मारामारी छिड़ी रहेगी। अगर ट्राई ने समय पर कदम उठाया होता तो इस दिक्कत से बचा जा सकता था। जियो ने अपनी सेवाओं की शुरुआत 5 सितंबर, 2016 को की थी। उस वक्त कंपनी ने 'वेलकम ऑफर' के तहत दिसंबर तक नि:शुल्क सेवाएं देने की बात कही थी। जब यह पेशकश समाप्त हुई तो कंपनी ने 'हैप्पी न्यू इयर' नामक एक और पेशकश कर दी। इसके तहत उपभोक्ताओं को मुफ्त कॉलिंग और डाटा सुविधा दी गई। इस पेशकश में रोजाना एक जीबी डाटा की सीमा तय कर दी गई। अधिकांश ग्राहकों के लिए यह डाटा बहुत था। लब्बोलुआब यह कि जियो की आरंभिक पेशकश जो 90 दिनों के लिए शुरू हुई थी वह 200 दिनों तक चलती रही।
इससे मौजूदा कंपनियों को जो दिक्कत हुई उसका असर सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ा। दूरसंचार विभाग के पूर्व सचिव जे एस दीपक ने फरवरी में ट्राई को लिखे पत्र में नियामक का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया कि मुफ्त पेशकश को आगे बढ़ाए जाने का असर सरकार के राजस्व पर पड़ रहा है। लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (जो सरकार नेटवर्क से वसूलती है) में हाल के महीनों में भारी गिरावट देखने को मिली। आरंभिक आंकड़ों के मुताबिक लाइसेंस शुल्क तीसरी तिमाही के 3,165 करोड़ रुपये से घटकर चौथी तिमाही में 2,300 करोड़ रुपये पर आ गया। वहीं स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क समान अवधि में 1,553 करोड़ रुपये से घटकर 1,416 करोड़ रुपये रह गया। इस बात पर भी एक सवालिया निशान है कि अगली स्पेक्ट्रम नीलामी में सरकार को कितनी राशि हासिल होगी। इस संदर्भ में यह समझना मुश्किल है कि ट्राई ने जियो की इस पेशकश पर निर्णय लेने में इतनी देर क्यों की और इस बात पर क्यों टिका रहा कि वह राजस्व के बजाय सस्ती दूरसंचार सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है?

Keyword: reliance jio, Summer surprise, TRAI,
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