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कर्ज माफी की राह नहीं आसान

ईशान बख्शी, संजीव मुखर्जी और अरूप रायचौधरी /  April 07, 2017

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 36,359 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ करने की घोषणा की। दीगर बात है कि राज्य का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2017 के संशोधित अनुमानों के अनुसार राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 4.45 प्रतिशत (55,020 करोड़ रुपये) है, ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि राज्य सरकार बैंकों को भुगतान करने के लिए रकम कहां से जुटाएगीï?
 
विभिन्न विकल्पों पर हो रहा विचार
एक तरीका यह हो सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपनी किसी इकाई को बॉन्ड जारी करने के लिए कहे। इससे राज्य के राजकोषीय घाटे पर भी सीमित असर होगा। बॉन्ड से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल बैंकों को भुगतान के लिए होगा। आम तौर पर राज्य नियंत्रित इकाइयां व्यावसायिक परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए बॉन्ड जारी करती हैं। इन परियोजनाओं से प्राप्त राजस्व से ऋण चुकाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बॉन्ड राज्य के बजट में भी नहीं दिखते हैं, इसलिए वित्तीय घाटे की गणना के लिए इन पर विचार भी नहीं होता है। हालांकि इस मामले में राजस्व का विकल्प नहीं होने से राज्य सरकार को इन ऋणों के भुगतान के लिए सालाना प्रावधान करने होंगे। यह रकम हरेक साल उस इकाई को अनुदान के तौर पर अंतरित की जाएगी और राज्य के बजट में यह दिखेगा। इस तरह 36,359 करोड़ रुपये का एक हिस्सा ही बजट में हरेक साल दिखेगा और इससे वित्तीय घाटा प्रबंधित करना आसान हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश पर 2013-14 में 69,300 करोड़ रुपये बकाया गारंटी थी। 
केंद्र और राज्य सरकारों में काम कर चुके उत्तर प्रदेश कैडर के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा, 'एक राज्य इकाई ये बॉन्ड जारी कर सकती है, जिसकी गारंटी राज्य अपनी सीमा में रहकर देगा।' हालांकि उन्होंने आगाह किया कि बॉन्ड जारी करना उतना आसान नहीं है। कुछ दूसरे विकल्प भी हैं। राज्य सरकार अपने खाते में पूरी 36,359 करोड़ रुपये रकम डाल सकती है और इसे पांच सालों में बांट सकती है। इससे भी राजकोषीय घाटे पर असर कम हो जाएगा। एक दूसरे अर्थशास्त्री ने कहा, 'तेलंगाना सरकार ने ऐसा ही तरीका अपनाया था और ऋण माफी चार सालों में बांट दी थी।'
पूर्व कैबिनेट सचिव और पूर्व में योजना आयोग के सदस्य रहे बी के चतुर्वेदी ने कहा, 'राज्य सरकारी बैंकों से लिए गए कर्ज माफ नहीं कर सकते बल्कि किसानों की तरफ से भुगतान की शर्तों पर बैंकों से बातचीत कर सकते हैं। इससे ऋण भुगतान में ढील दी जा सकती है और पांच सालों में इनके भुगतान की अनुमति दी जा सकती है।' उत्तर प्रदेश बिजली वितरण कंपनियों के पुनरुद्धार के लिए शुरू उदय के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की तरह ही भुगतान कर सकता है। इसके तहत बैंक किसानों का ऋण माफ कर देंगे और राज्य बॉन्ड जारी करेगा जिन्हें बैंक खरीदेगा। 
चतुर्वेदी कहते हैं, 'ऐसे विशेष मामले में केंद्र इन बॉन्ड के लिए रकम जुटाने के लिए राज्य को उनके उधारी कार्यक्रमों में मदद कर सकते हैं। इन बॉन्ड पर सामान्यत: ब्याज दर कम होती है क्योंकि इन्हें राज्य सरकार की गारंटी प्राप्त होती है। अगर राज्य सरकार दूसरी योजनाओं में तार्किक रूप से व्यय नहीं करती है तो उक्त तरीका अपनाने से राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।' यानी इसका मतलब हुआ कि उत्तर प्रदेश को अपने खर्च में कटौती करनी होगी। 
दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कर्जमाफी के लिए रकम के प्रावधान के लिए बॉन्ड जारी करने में आदित्यनाथ प्रशासन की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। ऋण बाजार में बॉन्ड जारी करने के लिए राज्यों का बहीखाता दुरुस्त होना चाहिए ताकि रेटिंग एजेंसियां इनके बॉन्ड को इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग दे सकें। वित्त मंत्रालय यह भी साफ कर चुके हैं कि केंद्र उत्तर प्रदेश सरकार को सीधे तौर पर कोई मदद नहीं देगा। इस बारे में एक अधिकारी ने कहा,'ऐसे मामलों में सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार होता है और एक के ऊपर दूसरे को तरजीह नहीं दी जा सकती।' राज्य सरकार इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ से निपटने के लिए वित्त के दूसरे स्रोतों जैसे लोक लेखा आदि का इस्तेमाल कर सकती है। वित्त वर्ष 2016 में 31,559 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे में केवल 18,700 करोड़ रुपये का ही वित्त पोषण बाजार से उधारी के जरिये करने का प्रस्ताव दिया गया। शेष रकम के लिए प्रावधान दूसरे स्रोतों जैसे विशेष प्रतिभूतियां निर्गत कर किया जाना था। 
उत्तर प्रदेश इस आर्थिक बोझ से निपटने का भले ही कोई न कोई रास्ता खोज ले, लेकिन अब महाराष्ट्र, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी कर्ज माफी की मांग उठ सकती है। मद्रास उच्च न्यायालय पहले ही तमिलनाडु सरकार को सभी किसानों के कर्ज माफ करने का आदेश दे चुका है और सहकारी समितियों और बैंकों को बकाया वसूलने से रोक दिया है। इससे पहले राज्य ने केवल छोटे और सीमांत किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी।
Keyword: UP, farm loan,
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