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गैस के अभाव में गिरेगी बिजली : ठप होंगे गैस आधारित पावर प्लांट!

श्रेया जय / नई दिल्ली 04 04, 2017

कटेंगी 24,000 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाएं

इस बार चिलचिलाती गर्मी कुछ ज्यादा ही परेशान कर सकती है। आम तौर पर गर्मी में बिजली की किल्लत वैसे ही रहती है, लेकिन अब एक मुश्किल आन खड़ी हुई है। मामला यह है कि गैस आधारित 24,000 मेगावॉट क्षमता वाली बिजली परियोजनाएं गैस के अभाव में ग्रिड से कट जाएंगी। केंद्र सरकार इन परियोजनाओं को समर्थन दे रही थी, लेकिन अब इसने इन्हें ठंडे बस्ते में डालने का निर्णय लिया है।

इस फैसले से जिन कंपनियों की बिजली इकाइयों पर असर पड़ेगा उनमें एनटीपीसी, गुजरात राज्य बिजली आपूर्ति कंपनी लिमिटेड, सीएलपी इंडिया, टॉरंट पावर, जीवीके इंडस्ट्रीज, लैंको पावर, जीएआर एनर्जी आदि शामिल हैं। दरअसल राज्यों ने 4 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने से मना कर दिया था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं से हाथ खींच लिए।

केंद्रीय बिजली मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों में गैस बिजली परियोजनाएं थी, लेकिन इन्होंने ऊंची लागत का हवाला देकर इन संयंत्रों से बिजली खरीदने से मना कर दिया। पिछले साल हुई अंतिम चरण की बोली प्रक्रिया के बाद राज्यों ने बिजली खरीद समझौते पर भी हस्ताक्षर नहीं किए।' केंद्रीय कोयला, बिजली, खान और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल को भी यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि यह योजना रोकी जा रही है लेकिन अगर राज्य दिलचस्पी दिखाते हैं तो यह फिर शुरू की जा सकती है। 

देश में गैस ग्रिड से जुड़ीं 24,150 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता में 14,305 मेगावॉट को घरेलू गैस की आपूर्ति नहीं है। यहां करीब 60,000 करोड़ रुपये मूल्य का निवेश गैर-निष्पादित परिसंपत्ति बनने के कगार पर पहुंच गया है। देश में घरेलू गैस की सीमित आपूर्ति के कारण शेष 9,845 मेगावॉट क्षमता भी उम्मीदों के अनुसार काम नहीं कर रही है। 

बाहर से आयातित महंगी रीगैसीफाइड एलएनजी (आरएलएनजी) गैस खरीदने के लिए बिजली संयंत्रों को सब्सिडी का लाभ देने के लिए सरकार ने रिवर्स ई-ऑक्शन प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें आरएलएनजी खरीदने के लिए पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड (पीएसडीएफ) से आने वाली सब्सिडी रकम के लिए रिवर्स बिड का प्रावधान था। बोली की रकम सब्सिडी सहायता की राशि को दर्शाती हैं, जो बिजली कंपनियां सरकार से चाहती हैं। बोली एमएसटीसी द्वारा तैयार ई-बिडिंग प्लेटफॉर्म पर लगी थी। योग्य बोलीदाताओं ने कुल बिजली उत्पादन का भी जिक्र किया था। इसके साथ ही उन्होंने उस सब्सिडी रकम का भी जिक्र किया था, जो वितरण कंपनियों के लिए शुद्ध खरीद मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थी।

Keyword: power companies, shortage, gas,
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