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कागज पर दिख रही उम्मीद की छाप

राजेश भयानी / मुंबई April 04, 2017

कागज निर्माण कंपनियों के लिए अच्छा समय फिर से लौट आया है। शैक्षिक पुस्तकों के लिए मांग ऐसे समय में बढ़ रही है जब आयातित कागज महंगा हो रहा है जिससे पेपर कंपनियों को मूल्य निर्धारण ताकत मिल रही है। जनवरी से जेके पेपर और बल्लारपुर समेत कई पेपर कंपनियों ने कम से कम दो बार कीमतें बढ़ाई हैं क्योंकि वे मांग आपूर्ति संतुलन में वापसी देख रही हैं और आयात भी महंगा हो रहा है।
चूंकि जनवरी के बाद से कई श्रेणियों के कागज की कीमतें 3-4 फीसदी तक बढ़ी हैं,  जबकि पिछले एक साल में कीमतों में औसत 8 फीसदी की तेजी आई है जिसमें बी ग्रेड पेपर मिलें भी शामिल हैं। वैश्विक रूप से वुड पल्प की बढ़ती कीमतों ने आयातित कागज के महंगा होने में अहम भूमिका निभाई है जिससे भारतीय कंपनियों को कीमतें बढ़ाने का मौका मिला है। इसके अलावा गुणवत्तायुक्त कागज का निर्माण करने वाली बल्लारपुर पेपर मिल की कुछ इकाइयों के बंद होने से भी दबाव बढ़ा है। इन मिलों को उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर होने की वजह से बंद कर दिया गया।
हालांकि उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि बल्लारपुर ने भी कीमतें बढ़ाईं, कंपनी से कुल आपूर्ति पिछले 12 महीनों में 3-4 लाख टन तक घट गई जबकि कागज की मांग में 5-6 लाख टन तक का इजाफा देखा गया। आपूर्ति में यह अंतर उस समय देखा गया जब आयातित काज महंगा हो रहा है और इससे कागज मिलों को बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने में मदद मिली है। पिछले तीन महीनों में वुड पल्प यानी लकड़ी की लुगदी की कीमतें 20 फीसदी चढ़कर 600 डॉलर प्रति टन पर पहुंची हैं जबकि पिछली दो तिमाहियों में इनमें 25 फीसदी के आसपास तेजी दर्ज की गई। बड़ी मिलों पर दबाव के बावजूद पेपर कंपनियों की शेयर कीमतों का सूचकांक जनवरी से सेंसेक्स को मात देने में सफल रहा है।
एक शीर्ष ग्रेड वाली मिल के एक अधिकारी ने कहा, 'भारतीय कंपनियां आयातित लुगदी पर कम निर्भर हैं क्योंकि वे इसकी घरेलू आधार पर स्वयं व्यवस्था करती हैं और इसलिए उन्हें अपने मुनाफे को भी सुधारने में मदद मिली है। मार्च तिमाही भी बेहतर होगी क्योंकि लगातार कीमत वृद्घि के बावजूद मांग में सुधार आया है।' हालांकि वह उन कुछ मिलों को लेकर आशंकित हैं जो पैकेजिंग बोर्ड की बड़ी भागीदारी से जुड़ी हुई हैं क्योंकि इसके लिए कच्चे माल (अपशिष्टï कागज और लुगदी) की कीमतें बढ़ी हैं। 
दिसंबर तिमाही में कई पेपर कंपनियों ने राजस्व और मुनाफे के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया। प्रख्यात पेपर मिलों ने राजस्व और मुनाफे में 5-50 फीसदी के बीच वृद्घि दर्ज की। एक प्रमुख पेपर कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'मार्च में हालात में और सुधार का रुझान दिख रहा है। बल्लारपुर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है क्योंकि उसकी कुछ इकाइयां बंद हो गई हैं।' केआर चोकसी शेयर्स ऐंड सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी कहते हैं, 'पेपर कंपनियों ने एक बड़ी मिल से आपूर्ति समस्या के बाद खासकर पिछले कुछ महीनों में अच्छी वृद्घि दर्ज की है और अब उन्हें मूल्य निर्धारण ताकत के साथ उनके राजस्व और मार्जिन में सुधार आने की संभावना है। बिजली की कम लागत से भी उन्हें अपनी कुल लागत को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिली है।' 
फेडरेशन ऑफ पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शमजी करिया ने कहा, 'आयात सीमित हो रहा है क्योंकि आयातित कागज की कीमतें चढ़ रही हैं।' लगभग 100 डॉलर प्रति टन की वृद्घि हो चुकी है या वैश्विक निर्यातकों ने अगली खेपों के लिए कीमत वृद्घि का संकेत दिया जो लगभग 40 डॉलर प्रति टन के आसपास हो सकती है। शमजीभाई ने यह भी कहा, 'अनकोटेड पेपर के लिए मांग मजबूत है, लेकिन आयात अधिक होने के साथ कोटेड पेपर में भी कीमत वृद्घि देखी गई है।' उन्होंने कहा कि लुगदी हासिल करने के लिए पेड़ों की कटाई के बजाय अधिक पौधरोपण के साथ अब भारतीय कागज उद्योग शुद्घ रूप से पर्यावरण अनुकूल बन गया है। मौजूदा समय में लुगदी इस्तेमाल को लेकर पेड़ों और आयात पर निर्भरता घटी है।
Keyword: paper, demand, import,
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