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इस्पात में बिक्री दमदार, किया लक्ष्य पार

अदिति दिवेकर और ईशिता आयान दत्त / मुंबई / कोलकाता 04 04, 2017

रिकॉर्ड बिक्री के बाद घरेलू इस्पात उत्पादकों को मध्य अप्रैल से मांग बढऩे की उम्मीद नजर आ रही है। सरकारी स्वामित्व वाली स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) ने 2016-17 में आठ प्रतिशत की वृद्धि के साथ अपनी सर्वश्रेष्ठ बिक्री दर्ज की है। कंपनी ने 2016-17 में 1.3143 करोड़ टन इस्पात विक्रय किया है। मार्च में कंपनी की बिक्री पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 21 प्रतिशत इजाफे के साथ 15.75 लाख टन रही है। सेल ने 2016-17 में 12 प्रतिशत अधिक उत्पादन दर्ज किया है और इस साल के दौरान इसने तीन गुना अधिक निर्यात किया है।  
सज्जन जिंदल के नेतृत्व वाली जीएसडब्ल्यू स्टील ने 2016-17 के लिए निर्धारित अपना लक्ष्य प्राप्त करते हुए 1.580 करोड़ टन कच्चे इस्पात का उत्पादन किया है जो पिछले साल से 26 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल की तुलना में कंपनी के सपाट इस्पात उत्पाद 23 प्रतिशत बढ़कर 1.141 करोड़ टन हो गए हैं, जबकि लंबे उत्पाद 18 प्रतिशत बढ़कर 32.1 लाख टन हो गए हैं। सपाट इस्पात का इस्तेमाल प्रमुख रूप से ऑटोमोबाइल और लबें इस्पात का इस्तेमाल विनिर्माण और आधारभूत कार्यों में किया जाता है। इस्पात उद्योग को विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और घरेलू सामानों की मांग में वृद्धि की उम्मीद नजर आ रही है। ये वे क्षेत्र हैं जिन पर नोटबंदी की मार पड़ी थी।
पिछले कुछ महीनों से उत्पादकों को अपनी क्षमता का उपयोग करने के लिए निर्यात करना पड़ रहा था जो साल की शुरुआत के 75 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत पहुंचा गया। पिछले साल के मुकाबले अप्रैल-फरवरी में इस्पात निर्यात 78 प्रतिशत बढ़कर 66.2 लाख टन पहुंच गया है और आयात 40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 65.9 लाख टन रहा है।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रमुख रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्रों में लगातार सुस्ती को देखते हुए उसका मानना है कि वित्त वर्ष 2017 में इस्पात की कुल खपत वृद्घि उससे पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहेगी। इस्पात की बढ़ती उत्पादन लागत और कीमतों में नरमी से मार्च तिमाही में इस्पात कंपनियों के प्रदर्शन पर दबाव महसूस किया जा सकता है। इस्पात निर्माण में प्रमुख उत्पादन घटक कोकिंग कोयले की कीमतें दिसंबर के 320 डॉलर (20,800 रुपये) प्रति टन के उच्च स्तर से घटकर आधी रह गई हैं, लेकिन मार्च के लिए अनुबंध कीमतें 285 डॉलर (18,525 रुपये) प्रति टन पर थीं। दूसरी तरफ, घरेलू क्षेत्र में धीमी मांग से इस्पात कीमतों में नरमी आई है। फरवरी में इस्पात कीमतों में 2,000 रुपये प्रति टन तक की कमी आई। 
ज्वाइंट प्लांट कमेटी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल और फरवरी के बीच गैर-मिश्रित इस्पात की खपत 4.4 फीसदी बढ़कर 6.934 करोड़ टन हो गई जबकि अलॉय स्टील यानी मिश्रित इस्पात की खपत 9 प्रतिशत तक घटकर 66 लाख टन रह गई। कमेटी इस्पात क्षेत्र के बारे में डेटा एकत्रित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अधिकृत है। घरेलू इस्पात खपत सामान्य तौर पर मॉनसून की विदाई के बाद और निर्माण गतिविधि में तेजी आने के बाद तीसरी तिमाही में फिर से तेज हो जाती है।
इक्रा के अनुसार हालांकि पिछले साल नवंबर में नोटबंदी के बाद वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही की खपत तिमाही आधार पर वृद्घि 2.4 फीसदी तक घटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने की घोषणा की थी जिससे लगभग 86 प्रतिशत मुद्रा चलन से बाहर हो गई और मांग में सुस्ती देखने को मिली थी।
इस्पात निर्माताओं को उम्मीद है कि मार्च में मांग में आई तेजी आगे भी बरकरार रहेगी। एस्सार स्टील के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक दिलीप उम्मेन ने कहा, 'हमने जनवरी और फरवरी में तेज मांग के बाद इस साल मार्च में घरेलू बाजार में मांग में मजबूती दर्ज की है।' लेकिन वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
इस्पात उद्योग का परिचालन मार्जिन दूसरी तिमाही के 13.4 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में 16.3 फीसदी हो गया। इक्रा का कहना है कि एंटी-डम्पिंग शुल्क लगाए जाने के बाद प्राप्तियों में आई तेजी की वजह से परिचालन मार्जिन को मजबूती मिली। एजेंसी का कहना है कि  चालू तिमाही (चौथी तिमाही) में इस्पात कंपनियों का मुनाफा मार्जिन दबाव में रहने का अनुमान है क्योंकि ऊंची लागत वाले कोकिंग कोयले के ज्यादातर इन्वेंट्री की खपत होगी। 
इक्रा में कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठï उपाध्यक्ष एवं समूह प्रमुख जयंत रॉय ने कहा, 'तीसरी तिमाही में कोकिंग कोयले की हाजिर कीमतें अनुबंध कीमतों की तुलना में अधिक थीं। इसलिए यदि कंपनियों ने उस समय के दौरान अनुबंध बाजार की ओर रुख किया होगा तो उन्हें अब लागत दबाव से जूझना पड़ेगा क्योंकि चौथी तिमाही में हालात बदतर हुए हैं।' 
उद्योग की राय भी इसे लेकर अलग अलग है कि अगली वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सुधार आएगा या नहीं। एस्सार स्टील के उम्मेन का कहना है कि इसका स्पष्टï संकेत दिख रहा है कि घरेलू मांग में सुधार आएगा। उनका कहना है, 'फ्लैट स्टील के लिए मांग 4-6 फीसदी की दर से बढ़ रही है। हमारा मानना है कि जब बुनियादी ढांचे और किफायती आवास क्षेत्र के बारे में सरकार के नियोजित खर्च पर काम शुरू होगा तो मांग में तेजी आएगी। रक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बजट आवंटन 80 अरब डॉलर (5.2 लाख करोड़ रुपये) है।' 
उन्होंने कहा, 'अक्षय ऊर्जा, खासकर सौर ऊर्जा पर सरकार द्वारा ध्यान दिए जाने के साथ साथ मेक इन इंडिया जैसी नीतियों और घरेलू परियोजनाओं के लिए घरेलू इस्पात को बढ़ावा दिए जाने के प्रयासों आदि से मांग में तेजी आएगी।'
 
Keyword: steel, sail, jindal,
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