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जीएसटी परिषद में उठाएंगे जीएसटी आगे बढ़ाने की उद्योग की मांग

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना /  04 04, 2017

बीएस बातचीत

सभी की नजरें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर केंद्रित हैं और अब ध्यान मुख्य रूप से इससे संबंधित नियमों और खास दरों पर केंद्रित हो गया है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना के साथ बातचीत में कहा कि कंपनियों के लिए विविध पंजीकरण की प्रक्रिया कायम रहेगी और जीएसटी परिषद दरें तय करने के लिए विभिन्न बैठकें कर सकती है। उनसे हुई बातचीत का मुख्य अंश:

हालांकि सरकार कह रही है कि जीएसटी 1 जुलाई से लागू होगा, लेकिन उद्योग की मांग है कि इसे 1 सितंबर तक टाला जाए, क्योंकि वह अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। क्या जीएसटी को दो महीने टालना संभव है?

इस बारे में निर्णय जीएसटी परिषद को लेना होगा। यदि उद्योग इसे लेकर ज्यादा चिंतित है तो वह हमें या राज्यों को इस बारे में लिखे। हम उनकी बात को जीएसटी परिषद की बैठक में रखेंगे। लेकिन फिलहाल हम इसे 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। यदि उद्योग और कारोबार जगत को 1 जुलाई को लेकर कोई समस्या है तो उनको हमें बताना चाहिए। हम परिषद को इससे अवगत कराएंगे। परिषद ही इस बारे में निर्णय लेगी।

जीएसटी परिषद दरों पर विचार करना है। बैंकों समेत विभिन्न क्षेत्रों द्वारा विविध पंजीकरण को लेकर भी चिंता सामने आई हैं। क्या इन चिंताओं को दूर किया जाएगा?

हमारा एक दोहरा प्रशासित जीएसटी होगा। विविध पंजीकरण समाप्त करने पर राज्य सहमत नहीं हैं। राज्यों का कहना है कि जब तक प्रत्येक कंपनी हमारे साथ पंजीकृत नहीं होती और हमारे साथ उसका खाता नहीं होता तो हम यह कैसे समझ पाएंगे कि वह हमारे राज्य में कितनी सेवाएं दे रही है। यह राज्यों की स्थिति है, भले ही अधिकारियों के स्तर पर हो। राज्यों का दूसरा तर्क यह है कि भले ही कोई कंपनी अखिल भारतीय स्तर पर सेवाओं का परिचालन कर रही हो, वह राज्यों में स्थानीय स्तर पर वस्तुएं खरीद सकती है। यहां तक कि बैंक के पास भी मूल्य वर्धित कर पंजीकरण होता है। इसलिए, यदि वे माल के साथ साथ सेवाओं के लिए भी पंजीकरण कराएं तो क्या नुकसान है। विविध पंजीकरण से बचे रहना संभव नहीं है। बैंकों या सेवा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के साथ समस्या यह है कि यदि वे राज्यों के लिए कंपनी के अंदर आपूर्ति मुहैया कराती हैं तो इसका हिसाब कैसे रखा जाएगा। इसलिए, उस आपूर्ति के मूल्यांकन की समस्या होगी। उन्हें इस तरह के लेनदेन और वाउचर का रिकॉर्ड रखना होगा। मूल्यांकन पर नियमों का ध्यान रखने की जरूरत होगी। 

इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर भी इस तरह की समस्या है कि जब तक आपूर्तिकर्ता ने कर नहीं चुकाया होगा तो इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं दिया जाएगा। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

डीलरों को किसी भी महीने के अपने सभी बिक्री बिल अगले महीने की 10 तारीख तक तैयार रखने होंगे। जब सभी डीलर यह काम कर लेंगे तो आपकी खरीदारी इनवॉइस स्वत: ही अपलोड हो जाएंगे। इसलिए, आपको यह जानने की जरूरत होगी कि मान लीजिए कि आपने 10 पार्टियों से खरीदारी की है और इनमें से 9 के बिल अपलोड हो गए हैं। अगर किसी ने ऐसा नहीं किया है तो आप अपने खरीदारी इनवॉइस अपलोड कर सकते हैं। हम आपको इनपुट क्रेडिट भी देंगे। साथ ही एक मैसेज भी उनके पास जाएगा कि भुगतान नहीं किया गया है, कृपया भुगतान करें। 

दरों के निर्धारण पर समिति कब तक निर्णय ले लेगी?

अधिकारियों की समिति अप्रैल के अंत तक या मई के मध्य तक अगली बैठक (जब भी यह होगी) से पहले जीएसटी परिषद को रिपोर्ट सौंपेगी। लेकिन दर निर्धारण के बारे में अंतिम फैसला लेने के लिए कई बैठकें की जा सकती हैं।

क्या निर्माणाधीन मकानों के लिए समान मासिक किस्त (ईएमआई) पर जीएसटी लगेगा? और वाणिज्यिक आवास के किराये के बारे में क्या स्थिति है?

बिल्कुल नहीं। ईएमआई पर जीएसटी क्यों लगेगा? ईएमआई महज ऋण की अदायगी है। वाणिज्यिक इमारत के किराये पर जीएसटी लगेगा। मौजूदा समय में भी इस पर सेवा कर लागू है। इसलिए मौजूदा व्यवस्था कायम रहेगी। कार्य अनुबंध भी जीएसटी के दायरे में आएंगे।
Keyword: Hasmukh Adhia, GST, industry,
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