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जीएसटी: खत्म इंतजार राज्य होने लगे तैयार

ईशिता आयान दत्त /  04 04, 2017

देश के सबसे बड़े कर सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। सरकार ने इसे 1 जुलाई से लागू करने की समयसीमा निर्धारित कर रखी है। राज्यों को इस बात का आभास है कि उनके पास तीन महीने का समय है और वे खुद को जीएसटी के लिए तैयार करने में जुटे हैं।
चाहे उत्पादक राज्य हो या फिर उपभोक्ता, भाजपा शासित हो या फिर गैर भाजपा दलों द्वारा शासित राज्य, अब केवल एक ही बात मायने रखती है और वह है तैयारी का स्तर। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जीएसटी लागू करने के लिए गुजरात सबसे बेहतर स्थिति में है। मौजूदा कर व्यवस्था में मौजूदा राज्य के 87 फीसदी विनिर्माता, डीलर और व्यापारी जीएसटी नेटवर्क पर जा चुके हैं। बाकी के भी एक महीने के भीतर ऐसा करने की संभावना है। लेकिन कई राज्य इस होड़ में काफी पीछे चल रहे हैं।
अगर ओडिशा के सरकारी अधिकारियों की मानें तो केवल जीएसटी विधेयक को उडिय़ा भाषा में अनुवाद करने का ही काम बाकी रह गया है। तमिलनाडु 1 जुलाई से जीएसटी को लागू करने के लिए तैयार है और मोदी-ममता के बीच राजनीतिक लड़ाई के बावजूद पश्चिम बंगाल के व्यावसायिक कर विभाग ने एक साल पहले से ही जीएसटी की तैयारी शुरू कर दी थी। हमने दो उत्पादक राज्यों गुजरात और तमिलनाडु तथा दो उपभोक्ता राज्यों ओडिशा और पश्चिम बंगाल में जीएसटी की तैयारी का जायजा लिया। 
 
गुजरात
गुजरात में मौजूदा कर व्यवस्था से जुड़े कुल 498,000 पंजीकृत विनिर्माताओं, डीलरों और व्यापारियों में से 87 फीसदी यानी 435,000 जीएसटी नेटवर्क का रुख कर चुके हैं। बाकी एक महीने में ऐसा कर देंगे। विभिन्न कर विभागों में 3,000 कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। इसके अलावा जीएसटी के लिए जरूरी अत्याधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर भी लगाए जा रहे हैं। अप्रैल मे 42 मास्टर जीएसटी प्रशिक्षक सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे।
जहां तक कंपनियों का संबंध है तो बड़े औद्योगिक घरानों की जीएसटी के लिए बेहतर तैयारी है और गुजरात भी अपवाद नहीं है। जायडस समूह के चेयरमैन और फिक्की के भी अध्यक्ष पंकज पटेल ने कहा कि औपचारिक क्षेत्र की सभी कंपनियां लंबे समय से जीएसटी की तैयारी कर रही थीं क्योंकि उन्हें पहले से ही इसकी जानकारी थी। पटेल ने कहा कि जहां तक जायडस समूह का संबंध है तो कंपनी ने साल की शुरुआत से ही जीएसटी के लिए तैयारी शुरू कर दी थीं। कंपनी ने आंतरिक समितियों का गठन किया, अपने सॉफ्टवेयर तथा ऑटोमेशन तकनीकों को उन्नत किया। साथ ही कर सलाहकारों की भी नियुक्ति कर दी गई है। दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कैडिला हेल्थकेयर और समूह की पर्सनल केयर कंपनी जायडस वेलनेस आदि भी अपने वेंडरों को नई कर प्रणाली के बारे में जागरूक बना रही हैं। अलबत्ता सेरा सैनिटरीवेयर जैसी छोटी कंपनियां जीएसटी की दरों को लेकर अभी देखो और इंतजार करो की मुद्रा में हैं।
 
तमिलनाडु
तमिलनाडु 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार है। राज्य में इसकी तैयारी जनवरी से शुरू हुई थी और अब तक 86 फीसदी डीलरों को नई कर प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। तमिलनाडु ने शुरू में जीएसटी का विरोध किया था लेकिन अब उसके सुर बदल गए हैं। राज्य का कहना है कि वह पूरी तरह जीएसटी लागू करने और इसकी सफलता के लिए समर्पित है। तमिलनाडु के वित्त मंत्री डी जयकुमार का कहना है कि सॉफ्टवेयर को जीएसटी के मुताबिक ढालने का काम भी प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि जैसे ही जीएसटी और हर्जाना विधेयकों को संसद की मंजूरी मिलेगी, हम राज्य जीएसटी विधेयक को विधानसभा में पेश करने की स्थिति में होंगे। 
तमिलनाडु ने शराब और पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे से बाहर करने की मांग की थी। एक अधिकारी ने कहा, 'शराब और पेट्रोलियम से राज्य सरकार को बहुत आमदनी होती है और दूसरे राज्यों ने भी इस तरह की मांग की थी। अंतत: इन दोनों को जीएसटी से बाहर रखा गया है।'
जयकुमार ने जीएसटी परिषद के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यों की चिंताओं का पूरा ध्यान रखा गया है जो एक स्वस्थ संघीय व्यवस्था के विकास के लिए बहुत अच्छा है। केंद्र ने तमिलनाडु की कुछ चिंताओं का समाधान कर दिया है जिस पर राज्य सरकार ने संतोष जताया है। इनमें घोषित वस्तुओं को विशेष श्रेणी में रखने का प्रावधान हटाना, शराब और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखना और सबसे अहम पांच साल तक जीएसटी लागू होने से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कानून के तहत स्वतंत्र व्यवस्था बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि नुकसान की गणना और मुआवजे की व्यवस्था उचित और पारदर्शी है जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। क्रॉस एम्पावरमेंट के मुद्दे को भी सौहार्दपूर्ण तरीके से हल कर दिया गया है। इतना ही नहीं केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और मुआवजा विधेयकों को गहन चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया गया है। कुछ मुद्दे अभी बाकी हैं उन्हें भी आम राय से सुलझा लिया जाएगा। 
 
ओडिशा
जीएसटी लागू करने के लिए कानूनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मई में ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र हो सकता है जिसमें ओडिशा राज्य जीएसटी विधेयक को हरी झंडी दी जाएगी। नई कर व्यवस्था के क्रियान्वयन से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम जीएसटी लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब केवल राज्य जीएसटी विधेयक का उडिय़ा में अनुवाद का काम बचा है जो 10-15 दिन में पूरा हो जाएगा। विधानसभा में सभी विधेयक अंग्रेजी और उडिय़ा में पेश करने का नियम है।' जीएसटी लागू करने से पहले ओडिशा सरकार ने 1 अप्रैल से सभी अंतरराज्यीय सीमा जांच चौकियों पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। ओडिशा सरकार ने ओडिशा बिक्री कर कानून, 1947 के तहत 22 जांच चौकियां स्थापित की थीं। ये चौकियां ओडिशा मूल्य संवर्धित कर कानून, 2004 के तहत काम कर रही थीं ताकि कर की चोरी को रोका जा सके। नालदा में झारखंड सीमा पर स्थापित चौकी इस्पात एवं खनन विभाग संचालित करता है और खनिजों की आवाजाही के लिए इसे जारी रखा जाएगा। ओडिशा के वित्त मंत्री प्रदीप अमाट ने कहा, 'प्रस्तावित जीएसटी व्यवस्था में जांच चौकी या बैरियर की स्थापना का प्रावधान नहीं है।' राज्य सरकार के पास जीएसटी को लागू करने के लिए सशक्त बुनियादी ढांचा मौजूद है क्योंकि वह पहले से ही वैट कानून के तहत वेटिस प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन कर जमा कर रही है। अधिकारी ने कहा, 'ओडिशा उन 25 राज्यों में शामिल है जो वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) के दोनों मॉडलों फ्रंट एंड और बैक एंड के इस्तेमाल से अच्छी तरह वाकिफ है। हमारा बुनियादी ढांचा तैयार है और अब केवल कनेक्शन की ही जरूरत है।' जीएसटी व्यवस्था के लिए क्षमता निर्माण के वास्ते राज्य सरकार पहले ही 600 व्यावसायिक कर अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुकी है। व्यावसायिक कर आयुक्त के कार्यालय ने अगले चरण का खाका तैयार किया है। इसके तहत कर अधिकारियों और इससे जुड़े दूसरे पक्षकारों जैसे वकीलों, सेवा प्रदाताओं और डीलरों को अगले तीन महीनों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। कंपनियां भी जीएसटी के लिए कमर कस रही हैं। बालासोर की एसएमई इकाई ओरिपोल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित बेहेड़ा ने कहा, 'जीएसटी के अनुकूल अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर पहले ही बाजार में उपलब्ध है। हमें केवल सॉफ्टवेयर को उन्नत  करने की जरूरत है।'
 
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल का व्यावसायिक कर विभाग पिछले एक साल से जीएसटी की तैयारी में जुटा है। विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। पंजीकरण से लेकर जीएसटीएन तक जीएसटी से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए कोलकाता के केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त के कार्यालय में एक जीएसटी माइग्रेशन सेवा केंद्र स्थापित किया गया है। वैट के डीलरों का जीएसटी के तहत पंजीकरण का काम भी प्रगति पर है। पश्चिम बंगाल में अधिकांश करदाताओं का सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से कम है इसलिए जीएसटी व्यवस्था के तहत राज्य पर अधिक बोझ रहेगा। राज्य को 1.5 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाले 90 फीसदी करदाताओं पर नजर रखनी होगी। अलबत्ता एक जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कहा, 'पश्चिम बंगाल से चरणबद्घ तरीके से अधिकारी जीएसटी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। लेकिन 1 जुलाई की समयसीमा के लिए शायद यह प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। इस बात का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि रिटर्न कैसे भरा जाएगा, वे कैसे आकलन करेंगे, इनपुट और आउटपुट में मिलान क्लीयर होना चाहिए, बिलों के आंकड़ों के लिए एक निश्चित फॉर्मेट होना चाहिए। अब तक सारी तैयारी केवल जीएसटी प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए ही है। पूरे विभाग को प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है।'
हालांकि सरकारी स्तर पर जीएसटी की तैयारी के लिए कुछ तैयारी है लेकिन कंपनियां अभी जीएसटी से जुड़े अंतिम कानूनों का इंतजार कर रही हैं। बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री की अप्रत्यक्ष कर समिति के अध्यक्ष और टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेट एलएलपी के संरक्षक तिमिर बरन चटर्जी ने कहा, 'बड़ी कंपनियों को तो छोडि़ए, छोटी कंपनियां भी जीएसटी के लिए तैयार नहीं हैं। राज्य जीएसटी के नियमों के बारे में कोई स्पष्टïता नहीं है। साथ ही करदाताओं को भी प्रशिक्षण देने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में अगर 1 जुलाई से जीएसटी लागू होता है तो फिर भ्रम और अफरातफरी का माहौल हो सकता है।'
इमामी लिमिटेड में मुख्य कार्याधिकारी (फाइनैंस स्ट्रेटजी ऐंड बिजनेस डेवलपमेंट) तथा मुख्य वित्तीय अधिकारी नरेश भंसाली के मुताबिक उनकी कंपनी जीएसटी अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इमामी और एवरेडी इंडस्ट्रीज अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रही हैं और उन्होंने नई कर नीति से निपटने के लिए जरूरी आईटी क्षमता स्थापित कर ली है। भंसाली ने कहा, 'हम अपनी खरीद और वितरण प्रक्रियाओं पर जीएसटी के असर का अध्ययन कर रहे हैं। इसमे हमने अपने भागीदारों को भी शामिल कर रखा है।' एवरेडी भी कर सलाहकारों से सलाह ले रही है और अपनी आईटी प्रणालियों को जीएसटी के अनुकूल बना रही है। हालांकि दोनों कंपनियों को आशंका है कि जब जीएसटी लागू होगा तो असंगठित और थोक विक्रेताओं को शुरुआत में कुछ दिक्कतें हो सकती हैं। 
अलबत्ता सीआईआई पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष उमेश चौधरी का मानना है कि उपभोक्ता उत्पाद, ऑटो और ऑटो कलपुर्जे वाली विनिर्माण कंपनियां जीएसटी के पहले लागू होने की उम्मीद कर रही थीं और उन्होंने समय पर अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन बैंकिंग, बीमा, मीडिया और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों से जुड़ी सेवा कंपनियों की चाल सुस्त रही है और अब वे इसकी तैयारी में जुटी हैं। 
(साथ में निर्माल्य बेहेड़ा, विनय उमरजी, सोहिनी दास, टी ई नरसिम्हन, नम्रता आचार्य और अभिषेक रक्षित)
 
Keyword: GST, West Bengal, Gujrat,
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