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आवक और बढ़ते तापमान ने घटाए सब्जियों के दाम

दिलीप कुमार झा / मुंबई 04 03, 2017

चढ़ते तापमान ने गिराईं कीमतें

गुजरात और मध्य प्रदेश की भारी आवक से बढ़ी सब्जियों की आपूर्ति, तापमान में अचानक हुई तेजी से किसानों को सता रहा सब्जियों के खराब होने का डर

देश भर में तापमान में हुई अचानक वृद्धि से किसानों को सब्जियों के खराब होने का डर सता रहा है। यही कारण है कि उपज की बिक्री को लेकर चल रही किसानों की आपाधापी की वजह से पिछले दो सप्ताह में सब्जियों के दाम गिर गए है। सरकार के राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि मुंबई की थोक मंडी में फूलगोभी के दाम 17 मार्च से 25 प्रतिशत गिरकर फिलहाल 6 रुपये (मॉडल कीमत) प्रति किलोग्राम पर चल रहे हैं। दिल्ली में करेला और बैगन के दाम दो हफ्ते में क्रमश: 31.4 प्रतिशत और 36.4 प्रतिशत तक गिरकर 24 रुपये (मॉडल कीमत) और 8.75 रुपये (मॉडल कीमत) प्रति किलोग्राम रह गए हैं। इसी प्रकार कोलकता के थोक बाजार में भिंडी की कीमत 25.7 प्रतिशत तक लुढ़कर 26 रुपये (मॉडल कीमत) प्रति किलोग्राम पर आ गई है। थोक बाजारों के बाद मुंबई में दो हफ्ते के अंदर लहसुन के खुदरा दाम भी 20 प्रतिशत गिरकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं। इसी तरह कोलकाता में करेले के दाम 30 प्रतिशत तक लुढ़कर 25 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं।

सब्जियों के दामों में आई इस तेज गिरावट ने किसानों में डर पैदा कर दिया है। अधिकांश किसान बेहतर आमदनी की उम्मीद में अगले साल वैकल्पिक फसल की ओर रुख करने की योजना तैयार कर रहे हैं। हालांकि किसानों के ज्यादा लाभकारी फसलों की ओर रुख करने से उनकी चिंता भी और ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि किसी क्षेत्र विशेष के सभी किसान समान रूप से समान बीजों की ही बुआई करते हैं।

ऑल इंडिया वेजीटेबल्स ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीराम गाढवे ने कहा कि इस साल सब्जियों की जोरदार फसल हुई है। इस कारण पिछले कुछ हफ्तों से आवक में तेजी की वजह से कीमतों में गिरावट आई है। इसके अलावा पिछले दो हफ्तों से तापमान में आई अचानक तेजी के कारण किसान सब्जी खराब होने के डर से अपनी काटी गई उपज को रोकना नहीं चाहते हैं।

नुकसान से बचने के लिए किसान शीघ्रता से वैकल्पिक फसलों का रुख कर लेते हैं। बदकिस्मती से जिस फसल से किसान ज्यादा पैसा प्राप्त करने की कल्पना करते हैं, वास्तव में कटाई के समय उससे ही ज्यादा तनाव पैदा होता है। इसका कारण यह है कि किसी खास फसल को उगाने से उस सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन होता है। हालांकि ऐसे किसानों को दूसरी फसलों की ओर रुख करना पश्चाताप दुख होता है, जैसा कि आलू की खेती के संबंध में हुआ है।

पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में किसान वास्तव में आलू आग में जला रहे हैं क्योंकि बाजार में चल रही कीमत से परिवहन की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इसलिए किसानों और नीति निर्धारकों के लिए किसानों को मौसम की दशाओं पर निर्भर संतुलित फसलों की बुआई के सही निर्णय लेने के संबंध में सलाह देना और उनकी सहायता करना जरूरी है।

वाशी के एक स्टॉकिस्ट संजय भुजबल ने कहा कि कुछ कंपनियों ने कृषि परामर्श सेवाएं नियत की हैं। लेकिन किसानों को बुआई के सही फैसले, मौसम के हालात, कटाई का समय और बेहतर विक्रय के लिए उनके उत्पादों के विपणन के संबंध में उनके परामर्श से किसानों को तनाव से निकालने में लंबा वक्त लगेगा। असल में किसानों की किस्मत बदलने में कृषि प्रौद्योगिकी की इन कंपनियों को लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा।

उधर, देश भर में कम आपूर्ति वाली सब्जियों के दाम मजबूत बने हुए हैं। उदाहरण के लिए मुंबई में गैर सीजन वाली हरी मटर के दाम असाधारण रूप से 44 प्रतिशत उछल कर फिलहाल थोक बाजार में 44 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहे हैं। हालांकि यहां खुदरा में मटर की कीमत 66.7 प्रतिशत उछालकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। इसी तरह दिल्ली के खुदरा बाजार में टमाटर की कीमत 25 प्रतिशत बढ़कर 25 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है और कोलकाता में गोभी के खुदरा दाम 37.5 प्रतिशत बढ़कर 11 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं।

शहर की परामर्श कंपनी आरएमएल एगटेक के प्रबंध निदेशक राजीव तेवतिया ने कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश से होने वाली अधिक आपूर्ति ने सब्जियों की आपूर्ति को लगातार जारी रखा हुआ है। हालांकि तापमान में हो रही बढ़ोतरी और जलाशयों में गिरते जल स्तर की वजह से सब्जियों की कटाई आने वाले हफ्तों में प्रभावित होगी। हमें अप्रैल में थोक बाजारों में अधिकांश सब्जियों की कीमत में 5-8 रुपये प्रति किलोग्राम वृद्धि की उम्मीद है।
Keyword: vegetables, farmers, temperature,
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