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खाद कंपनियों के शेयरों में तेजी आबाद

उज्ज्वल जौहरी /  April 02, 2017

नोटबंदी के बाद हालात में आए सुधार से उर्वरक कंपनियों के शेयरों को न सिर्फ अपना खोया हुआ आधार लौटाने में मदद मिली है बल्कि इन शेयरों ने अच्छा प्रतिफल भी दर्ज किया है। आम बजट के बाद वित्त वर्ष 2018 में सब्सिडी के बकाया में गिरावट की संभावना, उत्तर प्रदेश में अब मांग में सुधार आने की उम्मीद, उर्वरक उद्योग में सुधारों की गति में तेजी जैसे कई कारणों से इन शेयरों को पिछले कुछ महीनों में बड़ी राहत मिली है।कुल बाजार में तेजी के दौर में देखें तो उर्वरक शेयरों ने भी एक साल में शानदार प्रतिफल दिया है। कोरोमंडल इंटरनैशनल, चंबल फर्टिलाइजर्स, जीएसएफसी, टाटा केमिकल्स, दीपक फर्टिलाइजर्स ने पिछले एक साल में करीब 52 से 98 फीसदी की तेजी दर्ज की है। भविष्य में भी इन शेयरों में तेजी बरकरार रहने की संभावना है। 
लगातार तीन चुनौतीपूर्ण वर्षों के बाद वित्त वर्ष 2017 में उर्वरक कंपनियों के शेयरों में यह बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। कमजोर मॉनसून, कच्चे माल की ऊंची कीमतों, बकाया सब्सिडी ज्यादा होने और नीतिगत अनिश्चितता की वजह से इस क्षेत्र की कंपनियों ने खराब प्रदर्शन किया था। हालांकि इस वित्त वर्ष में जहां मॉनसून में सुधार से बड़ी मदद मिली, वहीं प्राकृतिक गैस और एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश), डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) और 2016 में यूरिया (पिछले दो साल में 30 प्रतिशत तक की गिरावट) की गिरती कीमतों से भी मदद मिली है। सरकार ने वित्त वर्ष 2018 के लिए बजट आवंटन 70,000 करोड़ रुपये पर बरकरार रखा है। इससे बकाया सब्सिडी में कमी की उम्मीद बढ़ी है। 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सतीश मिश्रा और दीपक कोल्हे का कहना है कि पहले से चली आ रही पुरानी सब्सिडी का दो-तिहाई से अधिक बकाया इस वित्त वर्ष में चुकाया जा सकता है। उद्योग  की  प्रमुख चिंता 35,000 करोड़ रुपये की पुरानी सब्सिडी है और इसका बड़ा हिस्सा वित्त वर्ष 2017 के 70,000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन (सब्सिडी वितरण की ताजा जरूरत 55,800 करोड़ रुपये, कुल 90,800 करोड़ रुपये) से पूरा किया जाएगा। सरकार ने वित्त वर्ष 2018 के लिए भी इतना ही आवंटन बरकरार रखा है। ऐसे में ज्यादातर बकाया सब्सिडी को चुका दिया जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि इसकी बदौलत उर्वरक कंपनियों के ब्याज खर्च में कम से कम 40 प्रतिशत तक की कमी आएगी। 
इस बीच आईसीआरए में कॉरपोरेट रेटिंग्स के समूह प्रमुख एवं वरिष्ठï उपाध्यक्ष के रविचंद्रन का कहना है कि वित्त वर्ष 2017 की पहली छमाही में कमजोर आधार को देखते हुए और रबी फसलों के लिए अधिक एमएसपी मिलने से किसानों की खर्च क्षमता में सुधार और सीजन के दौरान बुआई में तेजी की वजह से वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में उर्वरक खपत में वृद्घि दर्ज की जाएगी। आईसीआरए का मानना है कि यदि विभिन्न राज्य सरकारों ने कृषि ऋण माफी पर अमल किया तो उर्वरक की मांग और अधिक बढ़ सकती है। 
हालांकि बड़ा फायदा यूरिया सेक्टर में प्रमुख सुधारों की बदौलत  मिल सकेगा। इस समय में प्रायोगिक परियोजना चल रही है जिसमें निर्माता को किसानों को खुदरा बिक्री करने के लिए सब्सिडी भुगतान किया जाता है। उम्मीद है कि इस योजना को जून 2017 से देश भर में लागू किया जा सकता है। इसे लेकर भी अटकलें देखी जा रही हैं कि सब्सिडी का स्थानांतरण अब सीधे किसानों को उनके खातों में किया जाएगा जिससे कंपनियों पर बोझ घटेगा। इससे गैर-कृषि क्षेत्र द्वारा उर्वरकों (खासकर यूरिया) की कालाबाजारी और गलत इस्तेमाल की घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी। विश्लेषकों का कहना है कि इससे जहां सरकार को बड़ी बचत करने में मदद मिलेगी वहीं निर्माताओं के लिए कार्यशील पूंजी जरूरतें घटाने में भी मदद मिलेगी। दुरुपयोग रोकने के लिए यूरिया की 'नीम कोटिंग' पहले ही की जा चुकी है। हालांकि विश्लेषक इस योजना के क्रियान्वयन की तारीखों को लेकर आश्वस्त नहीं हैं और इसलिए वे अपने अनुमानों में इस बारे में कुछ भी साफ तौर पर नहीं कह रहे हैं। रविचंद्रन का कहना है कि योजना पर अमल में एक साल लग सकता है। 
फिर भी, बदलते हालात को देखते हुए विश्लेषक उर्वरक कंपनियों पर सकारात्मक बने हुए हैं। इनमें एलकेपी सिक्योरिटीज शामिल है, जिसके विश्लेषकों ने गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स (जीएनएफसी) को अपने पसंदीदा शेयरों में शामिल किया है। इन विश्लेषकों का मानना है कि भरूच की यह कंपनी वित्त वर्ष 2017 और वित्त वर्ष 2018 के लिए रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज कर सकती है।  जीएनएफसी के दोनों बिजनेस - केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स शानदार प्रदर्शन दर्ज करने के लिहाज से मजबूत स्थिति में हैं। 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के पसंदीदा शेयरों में चंबल फर्टिलाइजर्स और कोरोमंडल इंटरनैशनल शामिल हैं क्योंकि ब्रोकरेज का मानना है कि इन दो कंपनियों को बकाया पुरानी  सब्सिडी मिलने से बड़ा लाभ हासिल हो सकता है। चंबल फर्टिलाइजर्स को क्षमता वृद्घि से भी मदद मिलेगी और विश्लेषक वित्त वर्ष 2018 के बाद अपने अनुमानों में इस क्षमता वृद्घि को शामिल कर सकते हैं। 
प्रमुख केमिकल व्यवसाय की मांग में सुधार, कच्चे माल की कीमतों में नरमी आदि को ध्यान में रखते हुए एमके ग्लोबल के विश्लेषकों का कहना है कि दीपक फर्टिलाइजर्स वित्त वर्ष 2016-19 के दौरान एबिटा और पीएटी में 18 और 25 फीसदी की मजबूत वृद्घि दर्ज कर सकती है। उर्वरक सेगमेंट में कंपनी ने अपनी क्षमता भी दोगुनी कर 6 लाख टन तक बढ़ा ली है और विभिन्न अवरोधों को दूर कर वह इस क्षमता को बढ़ाकर 11 लाख टन करना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि इसके अलावा कंपनी को प्राइस-पूलिंग व्यवस्था के तहत गैस की कम लागत से भी मदद मिलेगी। 
गिरावट के संदर्भ में प्रमुख जोखिम मॉनसून है जिसके शुरुआती संकेतों के हिसाब से दीर्घावधि औसत से नीचे रहने का अनुमान है। 
Keyword: fertilizer, subsidy, demonetization,
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