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ब्याज दरें घटती जाएं तो कहां रकम लगाएं

तिनेश भसीन /  April 02, 2017

अब जबकि लगभग सभी बैंकों ने अपनी जमा दरें (डिपॉजिट रेट) घटा दी हैं, तो ऐसे में निश्चित प्रतिफल पाने का एकमात्र विकल्प डाकघर बचत योजना (पीओएसएस) ही रह गई है। हालांकि निवेशक अगर थोड़ा अधिक जोखिम लेना चाहें तो उनके लिए ऋण फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कम समय के लिए निवेश करने वालों के लिए डेट फंड भी उपयोगी हो सकते हैं क्योंकि इनमें बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के बराबर या उससे अधिक प्रतिफल देने की क्षमता है। साथ ही, इनसे निकासी करने पर किसी तरह का जुर्माना भी नहीं लगता यानी कोई पैसा नहीं कटता। लंबी अवधि के लिए रकम लगाने वाले निवेशकों के लिए ये कर के लिहाज से भी अच्छे होते हैं।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 5 साल की सावधि जमा पर ब्याज दर 6.5 प्रतिशत कर दी है, जो पिछले 11 सालों में सबसे कम है। एक साल की जमा पर ब्याज कम होकर 6.9 प्रतिशत रह गया है। बैंक ने 180 दिन से 210 दिन तक के एफडी पर भी ब्याज दरें आधा प्रतिशत कम कर दी हैं और अब वह इन पर 6.5 प्रतिशत सालाना प्रतिफल दे रहा है। 211 दिन से लेकर 1 साल से कम की सावधि जमा पर निवेशकों को 1 मार्च से अब 6.5 फीसदी ब्याज मिलेगा जो पहले 7 प्रतिशत था। लंबी अवधि की जमाओं पर भी 10 और 20 आधार अंक की कमी आ गई है। 
अगर ऊंचे कर दायरे में आने वाला व्यक्ति बैंक की किसी सावधि जमा में निवेश करता है तो 4 प्रतिशत से अधिक की महंगाई दर को देखते हुए उसे कोई वास्तविक प्रतिफल नहीं मिलेगा। अगर आप अधिक सुरक्षित और सुनिश्चित प्रतिफल चाहते हैं तो फिर डाक घर जाइए और वहां सावधिा जमा में निवेश कीजिए। डाक घर बचत योजना में निवेश तभी फायदे का सौदा है जब आपकी आय कर योग्य नहीं है या फिर आप 10 फीसदी की कर श्रेणी में आते हैं।
छोटी अवधि की जमाओं के लिए बैंक और डाक घर में अधिक अंतर नहीं है, लेकिन लंबी अवधि के लिए अंतर अधिक हो जाता है। एसबीआई जहां 3 साल की जमा पर 6.5 प्रतिशत प्रतिफल देता है, वहीं डाक घर में जमा दर पर 7.2 प्रतिशत ब्याज मिलता है। 5 साल की एफडी पर एसबीआई 6.5 प्रतिशत जबकि डाकघर 7.7 प्रतिशत ब्याज मुहैया कराता है।
अगर आप कर बाद बेहतर प्रतिफल के लिए जोखिम ले सकते हैं तो डेट फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। बढ़ते जोखिम के हिसाब से डेट फंड की कुछ श्रेणियों में लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म, शॉर्ट टर्म, इनकम और डायनामिक बॉन्ड फंड शामिल हैं। निवेशकों को अपने  निवेश लक्ष्य के लिहाज से श्रेणी का चयन करना चाहिए। अगर आप एक महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं तो लिक्विड फं ड चुनिए। अगर यह अवधि एक से तीन महीने है तो अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म फंड और कम से कम एक साल से तीन साल के लिए है तो शॉर्ट-टर्म फंड का चयन कीजिए। तीन साल या इससे अधिक समय के लिए इनकम फंड में निवेश करें। पहली तीन श्रेणियां अपेक्षाकृति अधिक सुरक्षित हैं, इनकम फंड और अन्य लंबी अवधि की योजनाओं के साथ अवधि का थोड़ा जोखिम जुड़ा होता है। 
लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजरीज के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं, 'जो निवेशक एफडी से ऋण फंडों में 2 साल या उससे अधिक के लिए रकम निवेश करना चाहते हैं, उन्हें ऐसी योजनाओं पर विचार करना चाहिए, जिनके पास शॉर्ट टर्म फंड श्रेणी में संचय की रणनीति है। इनकम फंड का सक्रिय रूप से प्रबंधन होता है इसलिए वे उतार-चढ़ाव वाले होते हैं और पहली बार निवेश करने वाले लोग इससे घबरा सकते हैं।' संचय रणनीति में फंड प्रबंधक बॉन्ड खरीदकर उसे परिपक्वता तक रखते हैं, इसलिए उनमें ज्यादा-उतार-चढ़ाव नहीं होता।
लंबी अवधि के लिए दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि निवेशक फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान्स (एफएमपी) पर दांव लगाएं। एफएमपी छोटी अवधि की बैंक एफडी के मुकाबले 50-100 प्रतिशत तक अधिक प्रतिफल दे सकते हैं। चूंकि, निवेशक इन फंडों में परिपक्वता अवधि तक निवेश करते हैं, इसलिए ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से उन्हें सुरक्षा मिलती है। इन लंबी अवधि के डेट फंडों में कर की गणना के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे कुल कर देनदारी कम हो जाती है। सद्गोपन कहते हैं, 'इस समय कोई निवेशक अगर अपने पुराने निवेश को भुनाता है तो इंडेक्सेशन का इस्तेमाल करने पर कुल कर देनदारी करीब 3-5 प्रतिशत होती है।'
 
Keyword: deposit rate, FD, interest,
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